प्रीलिम्स फैक्ट्स : 19 मई, 2018 | 19 May 2018

आयुष को अंग्रेज़ी भाषा में स्‍थान मिला

वैज्ञानिक और तकनीकी शब्‍दावली आयोग (Commission for Scientific and Technical Terminology) ने वैज्ञानिक और तकनीकी उद्देश्‍यों के लिये आयुष AYUSH शब्‍द को हिन्‍दी और अंग्रेज़ी भाषा में अपनाने का फैसला किया है। चिकित्‍सा की पाँच परंपरागत और पूरक प्रणालियों - आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्‍सा (नेचुरोपैथी), यूनानी, सिद्ध और होम्‍योपैथी के संक्षिप्त रूप में आयुष शब्‍द लोकप्रिय हो चुका है।

  • इस शब्‍द को सफलतापूर्वक अपना लिया गया है और सभी सरकारी सूचनाओं में इसका इस्‍तेमाल किया जा रहा है।
  • यह चिकित्‍सा की सभी समग्र प्रणालियों के बीच सामंजस्य को दर्शाता है।
  • इस निर्णय का प्रभाव यह होगा कि इससे देश की सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य चुनौतियों के प्रबंधन का समेकित समाधान करने संबंधी आयुष मंत्रालय के प्रयासों को मज़बूती मिलेगी।
  • आयोग द्वारा मंज़ूर आयुष शब्‍द का अर्थ है ‘स्‍वास्‍थ्‍य सेवा की परंपरागत और गैर- परंपरागत प्रणालियाँ तथा चिकित्‍सा, जिसमें आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्‍सा, यूनानी, सिद्ध और होम्‍योपैथी शामिल हैं।’

एसएंडपी प्लैट्स ग्लोबल मेटल पुरस्कार
S&P PLATTS Global Metals Award 2018

सार्वजनिक उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड National Mineral Development Corporation ने कारपोरेट सामाजिक दायित्व श्रेणी corporate social responsibility (CSR) में 2018 के लिये एसएंडपी प्लैट्स ग्लोबल मेटल पुरस्कार प्राप्त किया है। कंपनी को यह पुरस्कार 17 मई, 2018 को लंदन में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। एनएमडीसी ने पुरस्कार के लिये नामित दुनिया की 12 बड़ी कंपनियों के बीच यह पुरस्कार हासिल किया।

  • इस पुरस्कार की शुरुआत के बाद कारपोरेट सामाजिक दायित्व की श्रेणी में पहली बार किसी भारतीय कंपनी को पुरस्कृत किया गया है।
  • एसएंडपी प्लैट्स ग्लोबल मेटल पुरस्कार कंपनियों को उनके नवाचार और उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर दिया जाता है।

एनएमडीसी

  • एनएमडीसी लौह अयस्क खनन क्षेत्र की भारत की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका सालाना उत्पादन 35 मिलियन टन है। घरेलू बाज़ार में इसकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है।
  • समय के साथ कंपनी की कारपोरेट सामाजिक दायित्व गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2011-12 की अवधि में कंपनी ने इस पर 86 करोड़ रुपए खर्च किये थे जो पिछले तीन वर्षों के दौरान औसतन 190 करोड़ रुपए पर पहुँच गए।

शंघाई सहयोग संगठन

शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation-SCO) एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संगठन है। यूरेशिया का अर्थ है यूरोप और एशिया का संयुक्त महाद्वीपीय भूभाग। इस संगठन की शुरुआत शंघाई-5 के रूप में 26 अप्रैल 1996 को हुई थी। शंघाई-5 चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताज़िकिस्तान देशों का संगठन था।

  • 15 जून, 2001 को जब उज्बेकिस्तान को इसमें शामिल किया गया तो इसका नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया।
  • हेड ऑफ स्टेट काउंसिल इसका शीर्षस्थ नीति-निर्धारक निकाय है। चीनी और रूसी शंघाई सहयोग संगठन की आधिकारिक भाषाएँ हैं।

वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान में शंघाई सहयोग संगठन 8 सदस्यों वाला एक बहुपक्षीय संगठन है। इसकी स्थापना 15 जून, 2001 में चीन के शंघाई शहर में चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताज़िकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने की थी।
  • भारत के साथ ही पाकिस्तान भी एससीओ का सदस्य बन चुका है और अब इस संगठन के सदस्यों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
  • सदस्यता विस्तार के साथ ही एससीओ अब दुनिया की कुल आबादी के 42 प्रतिशत हिस्से, कुल जीडीपी के 20 फीसदी हिस्से तथा विश्व के 22 फीसदी भूभाग का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

उद्देश्य

  • एससीओ का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थायित्व के लिये भी परस्पर सहयोग को बढ़ावा देना है।

बांग्लादेश का पहला संचार उपग्रह

कैलिफ़ोर्निया स्थित एयरोस्पेस कंपनी, स्पेसएक्स ने बांग्लादेश के पहले संचार उपग्रह "बंगबंधु  सैटेलाइट 1" (Bangabandhu-1) को अपने सबसे शक्तिशाली फाल्कन 9 रॉकेट (SpaceX Falcon 9 rocket) से लॉन्च किया। इस राकेट को केनेडी स्पेस सेंटर  (Kennedy Space Center) से ब्लॉक 5 नाम से लॉन्च किया गया।

उद्देश्य

  • बंगबंधु-1 बांग्लादेश का पहला संचार उपग्रह है। यह बांग्लादेश की खाड़ी, भारत, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, फिलीपींस और इंडोनेशिया से संबंधित वीडियो फुटेज़ उपलब्ध कराने के साथ-साथ संचार कवरेज भी प्रदान करेगा।
  • इसकी सबसे विशेष बात यह है कि यह बांग्लादेश के ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगा।