प्रीलिम्स फैक्ट्स : 7 जून, 2018 | 07 Jun 2018

भारत - इंडोनेशिया समन्वित निगरानी अभियान

  • 31वें भारत–इंडोनेशिया समन्वित निगरानी (इंड-इंडो कॉर्पेट) अभियान के समापन समारोह के लिये कमांडर दीपक बाली की कमान में आईएनएस कुलीश और अंडमान तथा निकोबार कमान का एक डोर्नियर समुद्री गश्‍ती विमान बेलावन, इंडोनेशिया पहुँचा।
  • समापन समारोह 6 से 9 जून, 2018 तक आयोजित किया जाएगा।
  • 24 - 25 मई, 2018 को पोर्ट ब्‍लेयर में इंड-इंडो कॉर्पेट अभियान को शुरू किया गया था, इसके तहत 26 मई से 2 जून, 2018 तक समन्वित निगरानी की गई।
  • दोनों देशों की नौसेनाएँ रणनीतिक साझेदारी की व्यापक परिधि के अंतर्गत वर्ष 2002 से वर्ष में दो बार ‘अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक सीमा रेखा’ (IMBL) पर समन्वित निगरानी को कार्यान्वित कर रही हैं।

उद्देश्‍य

  • इसका उद्देश्‍य मित्रवत देशों के साथ समुद्री क्षेत्र में भारत की शांतिपूर्ण उपस्थिति एवं एकता के लिये बेहतर माहौल सुनिश्चित करना तथा भारत-इंडोनेशिया के बीच मौजूदा संबंधों को सुदृढ़ करना है।
  • इसके तहत हिंद महासागर क्षेत्र को वाणिज्यिक नौपरिवहन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिये सुरक्षित बनाने पर विशेष बल दिया गया है।
  • हाल के समय में क्षेत्र के समुद्री खतरों से निपटने के लिये भारतीय नौसेना की तैनाती बढ़ी है। इसके अतिरिक्‍त भारत सरकार के सागर (क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा और प्रगति) के दृष्टिकोण के हिस्‍से के रूप में भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में कई राष्‍ट्रों की सहायता कर रही है।

विशेष आर्थिक ज़ोन नीति का अध्ययन करने वाले समूह के प्रमुख होंगेः बाबा कल्याणी

भारत सरकार ने विशेष आर्थिक ज़ोन (सेज़) नीति का अध्ययन करने के लिये प्रतिष्ठित व्यक्तियों के एक समूह का गठन किया है। सेज़ नीति 1 अप्रैल, 2000 से लागू है। इसके बाद मई, 2005 में संसद ने विशेष आर्थिक ज़ोन अधिनियम, 2005 पारित किया और इसे 23 जून, 2005 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। सेज़ अधिनियम, 2005 को 10 फरवरी, 2006 से लागू किया गया है।

  • यह समूह सेज़ नीति का अध्ययन करेगा, वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में निर्यातकों की जरूरतों के मुताबिक सुझाव देगा, सेज़ नीति को डब्ल्यूटीओ के अनुकूल बनाएगा, सेज़ नीति में सुधार का सुझाव देगा, सेज़ योजनाओं का तुलनात्मक विश्लेषण करेगा और सेज़ नीति को अन्य समान योजनाओं के अनुरूप संगत बनाने के लिये सुझाव देगा।
  • यह समूह तीन महीने में अपनी अनुशंसाएँ प्रदान करेगा।

विशेष आर्थिक क्षेत्र

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा ‘सेज़’ (Special Economic Zones – SEZs) उस विशेष रूप से पारिभाषित भौगोलिक क्षेत्र को कहते हैं, जहाँ से व्यापार, आर्थिक क्रियाकलाप, उत्पादन तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।
  • यह क्षेत्र देश की सीमा के भीतर विशेष आर्थिक नियम कायदों को ध्यान में रखकर व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिये विकसित किया जाता है।
  • इसके लिये सरकार ने अतिरिक्‍त आर्थिक गतिविधियों का संचालन करने; वस्‍तुओं और सेवाओं के निर्यात को प्रोत्‍साहन देने; स्‍वदेशी और विदेशी स्रोतों से निवेश को प्रोत्‍साहन; रोज़गार के अवसरों का सृजन; आधारभूत सुविधाओं का विकास इत्यादि के उद्देश्य से 2005 में एक अधिनियम पारित किया था|

डॉ. वर्जीनिया ऐपगार

डॉ. वर्जीनिया ऐपगार के 109वें जन्मदिन के अवसर पर गूगल ने डूडल बनाकर उनको याद किया है। इस डूडल में डॉ. वर्जीनिया ऐपगार को एक लेटरपैड तथा पेन पकडे हुए दिखाया गया है। 

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • वर्जीनिया ऐपगार का जन्म 7 जून 1909 को हुआ था। 
  • उन्हें ऐपगार स्कोर (जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य का त्वरित आकलन करने का एक तरीका) के आविष्कारक के रूप में जाना जाता है।
  • उनका शुरुआती जीवन अमेरिका के न्यू जर्सी में बीता। 
  • उन्होंने परिवार में बहुत सी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखा जिसके कारण उनकी रुचि चिकित्सा एवं विज्ञान की तरफ बढ़ी गई। 
  • वर्ष 1949 में डॉ वर्जीनिया ने सर्जरी में अपनी पढ़ाई पूरी की।
  • डॉक्टर वर्जीनिया पहली महिला थीं जो प्रतिष्ठित कोलंबिया यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ फिज़िशियंस एंड सर्जंस में प्रोफेसर बनीं। उन्होंने यह उपलब्धि वर्ष 1949 में हासिल की। 
  • डॉक्टर ऐपगार और उनके साथियों ने वर्ष 1950 के दौरान अमेरिका में बढ़ते शिशु मृत्यु दर के समय कई हज़ार नवजात बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी एकत्रित की। 
  • वर्ष 1960 तक किसी बच्चे के पैदा होने के 24 घंटे के भीतर उसके स्वास्थ्य का पता लगाना बहुत आसान हो गया था।
  • 1972 में डॉक्टर वर्जीनिया ने 'Is My Baby All Right?' नाम से एक किताब लिखने में भी योगदान दिया। 
  • इस किताब में जन्म के दौरान होने वाली समस्याएँ और उनके समाधान को स्पष्ट किया गया है। 
  • डॉ. ऐपगार की मृत्यु वर्ष 1974 में हो गई।

ग्‍वाटेमाला का फ्यूगो ज्‍वालामुखी

फ्यूगो ज्वालामुखी ग्वाटेमाला में चिमाल्टेंगो, एस्कुइंटाला और सैकटेपेक्यूज़ की सीमाओं पर अवस्थित एक सक्रिय स्ट्रैटोज्वालामुखी है। जब मेग्मा सतह तक पहुँच जाता है, तो वह एक तरह के ढाल ज्वालामुखी या स्ट्रैटोज्वालामुखी के रूप में एक ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण करता है।

  • फ्यूगो ज्‍वालामुखी ग्वाटेमाला के सबसे प्रसिद्ध शहरों और पर्यटक गंतव्य के तौर पर प्रसिद्ध है।
  • फ्यूगो ज्वालामुखी, राजधानी ग्वाटेमाला सिटी के लगभग 40 किमी दक्षिण-पश्चिम में अवस्थिति है।

ग्वाटेमाला

  • यह मध्य अमेरिका में स्थित एक देश है, जिसके उत्तर-पश्चिम में मेक्सिको, दक्षिण पश्चिम में प्रशांत महासागर, उत्तर-पूर्व में बेलीज़, पूर्व में कैरेबियन और दक्षिण पूर्व में होंडुरास और अल साल्वाडोर स्थित है।
  • इस देश की राजधानी ग्वाटेमाला सिटी है। ग्वाटेमाला की समृद्ध जैविकी और अद्वितीय पारिस्थितिकी इसे जैव विविधता के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण बनाती है।
  • ग्वाटेमाला नाम की व्युत्पत्ति ‘नहुआती’ या ‘नहुआटी’ भाषा के शब्द 'क्वाटेमल्लान' से हुई है जिसका अर्थ है अनेक वृक्षों का स्थान।