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प्रीलिम्स फैक्ट्स : 06 अप्रैल, 2018 | 06 Apr 2018 | अंतर्राष्ट्रीय संबंध

उत्तम (UTTAM) एप

उत्तम एप की मुख्य विशेषताएँ

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच 

10 से 12 अप्रैल, 2018 तक नई दिल्ली में आयोजित किये जाने वाले 16वें अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा फोरम (IEF) की मंत्रिस्तरीय बैठक की मेजबानी भारत द्वारा की जाएगी। इसमें 42 देशों के पेट्रोलियम मंत्री हिस्सा लेंगे। IEF की मंत्रिस्तरीय बैठकों का आयोजन राजनीतिक और तकनीकी स्तर पर अनौपचारिक चर्चा के लिये किया जाता है  जिनका उद्देश्य बेहतर जानकारी और अनुभवों के आदान-प्रदान के ज़रिये नीतिगत और निवेश संबंधी फैसलों में सुधार लाना है। 

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच (International Energy Forum-IEF)

  • रियाद स्थित अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच (IEF) एक अंतर-सरकारी व्यवस्था है जिसकी स्थापना 1991 में की गई थी।
  • यह अपने सदस्यों के बीच अनौपचारिक, पारदर्शी, सूचनाओं के साथ और निरंतर वैश्विक ऊर्जा वार्ताओं के तटस्थ सहायक के रूप में कार्य करता है। यह ट्रांज़िट देशों सहित ऊर्जा उत्पादक और ऊर्जा उपभोग करने वाले देशों को मिलाकर बना है।
  • IEF के भारत सहित 72 सदस्य देश हैं, जिन्होंने इसके चार्टर पर हस्ताक्षर किये हैं। इसके सदस्य वैश्विक आपूर्ति तथा तेल और गैस मांग के 90% भाग का प्रतिनिधित्व करते है।
  • इसके कार्यकारी बोर्ड का गठन 2002 में किया गया था। इसके संचालन बोर्ड में सदस्य देशों के मंत्रियों के 31 मनोनीत प्रतिनिधि शामिल हैं।
  • इसकी बैठकें वर्ष में दो बार होती हैं। IEF मंत्रिस्तरीय सम्‍मेलन वैश्विक ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिये दुनिया के ऊर्जा मंत्रियों का सबसे बड़ा सम्‍मेलन है।
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) कार्यकारी बोर्ड के वोट नहीं करने वाले सदस्य हैं।
  • कार्यकारी बोर्ड की अध्यक्षता अगली मंत्रिस्तरीय द्विवार्षिक बैठक का मेज़बान देश करता है। इस समय IEF  के कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष भारत है।
  • तेल और गैस के 11 सबसे बड़े शीर्ष उपभोक्ताओं में शामिल होने के नाते (वर्तमान में भारत चौथा) भारत 2002 से कार्यकारी बोर्ड का स्थायी सदस्य है। भारत ने इससे पहले 1996 में गोवा में 5वीं IEF मंत्रिस्तरीय बैठक की मेज़बानी की थी।
  • सदस्य देशों के अलावा 20 अन्य देशों को आमंत्रित किया गया है जहाँ भारत के तेल और गैस से जुड़े हित हैं।

भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग की सदस्य संख्या में कटौती

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) में वर्तमान दो रिक्‍त स्‍थानों तथा एक अतिरिक्‍त रिक्‍त स्‍थान को नहीं भरकर CCI का आकार एक अध्‍यक्ष और छह सदस्‍य (कुल सात) से घटाकर एक अध्‍यक्ष और तीन सदस्‍य (कुल चार) करने की मंज़ूरी दे दी है।

प्रमुख बिंदु 

  • इस प्रस्‍ताव से आयोग के सदस्‍यों के तीन पदों में कटौती हो जाएगी, जो न्‍यूनतम सरकार-अधिकतम शासन के सरकार के उद्देश्‍य को पूरा करता है।
  • प्रतिस्पर्द्धा कानून, 2002 के अनुसार CCI में एक अध्‍यक्ष होगा तथा दो से कम और छह से अधिक सदस्‍य नहीं होंगे। इस समय पद पर अध्‍यक्ष और चार सदस्‍य आसीन हैं।
  • आयोग अपने अस्‍तित्‍व में आने के बाद से कोलेजियम के रूप में कार्य कर रहा है।

प्रतिस्‍पर्द्धा अधिनियम, 2002

  • प्रतिस्‍पर्द्धा रोधी प्रथाओं की रोकथाम, एक उद्यम द्वारा प्रभुत्‍व के दुर्व्‍यवहार तथा विलयन और अधिग्रहण जैसे संयोजनों के विनियमन के माध्‍यम से प्रतिस्‍पर्द्धा को प्रोत्‍साहन देने हेतु भारत सरकार द्वारा प्रतिस्‍पर्द्धा अधिनियम, 2002 निर्मित किया गया था जिसे 2003 से लागू किया गया था।
  • इस अधिनियम ने एकाधिकार और प्रतिबंधात्‍मक व्‍यापार प्रथा (MRTP) अधिनियम, 1969 का स्थान लिया था। 
  • प्रतिस्‍पर्द्धा अधिनियम, 2002 के स्‍थान पर प्रतिस्‍पर्द्धा (संशोधन) अधिनियम 2007 लाया गया।
  • अत: CCI एक सांविधिक निकाय है। यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर के अलावा संपूर्ण भारत में लागू होता है।
  • अधिनियम के मुख्‍य उद्देश्‍य इस प्रकार हैं-
    ♦ प्रतिस्‍पर्द्धा पर दुष्‍प्रभाव डालने वाली प्रथाओं की रोकथाम के लिये एक आयोग की स्‍थापना हेतु सहायता देना।
    ♦ भारत के बाज़ारों में प्रतिस्‍पर्द्धा को प्रोत्‍साहन और स्‍था‍यित्‍व प्रदान करना।
    ♦ उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा करना।
    ♦ भारत के बाज़ारों में प्रतिभागियों द्वारा किये जा रहे व्‍यापार की स्‍वतंत्रता और संबंधित मामलों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना।

आकाशगंगा के केंद्र में हो सकते हैं एक दर्जन से अधिक ब्लैक होल

प्रमुख बिंदु

  • खगोलविदों ने आकाशगंगा के केंद्र में एक दर्जन से अधिक ब्लैक होल खोजे हैं। उनके अनुसार आकाशगंगा में  लगभग 10,000 ब्लैक होल हो सकते हैं।
  • विज्ञान पत्रिका नेचर के अनुसार प्रत्येक बड़ी आकाशगंगा के मूल में बड़े पैमाने पर ब्लैक होल हो सकते हैं।
  • कोलंबिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार आकाशगंगा के केंद्र में एक दर्जन से अधिक ब्लैक होल खोजे गए हैं।  
  • वैज्ञानिकों ने धरती के करीब स्थित सैजिटेरीअस-ए (Sagittarius A) के आसपास ब्लैक होल की तलाश में व्यापक खोजबीन की।
  • सैजिटेरीअस-ए (Sagittarius A) गैस के प्रभामंडल और धूल से घिरा हुआ है और विशाल तारों की उत्पत्ति के अनुकूल माहौल बनाता है जो बाद में ब्लैक होल में परिवर्तित हो सकते हैं। 
  • ऐसा भी माना जाता है कि प्रभामंडल के बाहर के ब्लैक होल सैजिटेरीअस-ए के प्रभाव में नष्ट हो जाते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
  • पृथ्वी के करीब ब्लैक होल का अध्ययन करने से प्राप्त डेटा के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि हमारे आकाशगंगा के कोर में लगभग 500 बायनरी सिस्टम हो सकते हैं।
  • बाइनरी स्टार सिस्टम में दो तारे होते हैं जो अपने गुरुत्वाकर्षण संपर्क के कारण एक साझे द्रव्यमान केंद्र के चारों ओर गति करते हैं।
  • एक अनुमान के अनुसार 20 में से केवल 1 ब्लैक होल बायनरी सिस्टम बनाने हेतु आवश्यक साथी तारे की खोज कर पाता है। अतः 500 बाइनरी को 20 से गुणा करने पर 10000 पृथक ब्लैक होल प्राप्त होते हैं।