प्रीलिम्स फैक्ट्स : 3 फरवरी, 2018 | 03 Feb 2018

विश्‍व आर्द्रभूमि दिवस

पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा असम सरकार के वन विभाग के सहयोग से 2 फरवरी को गुवाहाटी के दीपोर बील (रामसर स्‍थल) में राष्‍ट्रीय स्‍तरीय विश्‍व आर्द्रभूमि दिवस 2018 का आयोजन किया गया।

थीम

  • इसकी थीम “सतत् शहरी भविष्‍य के लिये आर्द्रभूमि” है। 

पृष्ठभूमि

  • प्रत्‍येक वर्ष 2 फरवरी को विश्‍व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है। इसी दिन 1971 में ईरान के रामसर शहर में आर्द्रभूमि रामसर समझौते (Ramsar Convention) को अपनाया गया था।
  • भारत 1982 से इस समझौते का सदस्‍य है और आर्द्रभूमि के उचित इस्‍तेमाल में रामसर दृष्टिकोण के प्रति संकल्‍पबद्ध है।
  • आर्द्रभूमि पर हुए अंतर्राष्ट्रीय समझौते को रामसर समझौता कहा जाता है। यह अंतर-सरकारी संधि है, जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और उचित उपयोग तथा उसके संसाधनों के लिये राष्‍ट्रीय कार्रवाई तथा अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग का ढाँचा प्रदान करती है।

भारतीय संदर्भ

  • पर्यावण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिये नोडल मंत्रालय है।
  • यह 1985 से रामसर स्‍थलों सहित आर्द्रभूमि के संरक्षण और प्रबंधन के लिये प्रबंधनकारी योजना के डिज़ाइन और कार्यान्‍वन में राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों को समर्थन दे रहा है।
  • 140 से अधिक आर्द्रभूमियों के लिये प्रबंधात्मक संबंधी कार्रवाई योजना लागू करने हेतु राज्‍य सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान की गई है।
  • राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 400 हेक्‍टेयर से अधिक ज़मीन यानी भारत की 12 प्रतिशत भूमि बाढ़ और नदी के कटाव की संभावना से घिरी हुई है। कुल भौगोलिक क्षेत्र में आर्द्रभूमि 4.7 प्रतिशत है।

कुसुम योजना

किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान अथवा कुसुम (Kisan Urja Surksha evam Utthaan Mahaabhiyan - KUSUM) योजना के तहत किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत किसानों को अपनी बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा परियोजना लगाने के उपरांत अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचने का विकल्प दिया जाएगा।

बजट

  • 1.4 लाख करोड़ रुपए (28,250 MW सौर ऊर्जा के निर्माण हेतु) 

उद्देश्य

  • विकेंद्रित सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन।
  • संप्रेषण नुकसान में कमी।
  • कृषि क्षेत्र के सब्सिडी भार को कम करके बिजली वितरण कंपनियों को वित्तीय समर्थन।
  • आरपीओ लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये राज्यों को समर्थन।
  • ऑफ ग्रिड और ग्रिड से जुड़े सौर जल पंपों के माध्यम से निश्चित जल संसाधन जुटाकर किसानों को जल सुरक्षा प्रदान करना।
  • राज्य के सिंचाई विभागों की सिंचाई क्षमता के उपयोग के लिये विश्वसनीय रूप से ऊर्जा प्रदान करना।
  • रूफ टफ तथा बड़े पार्कों के बीच माध्यमिक दायरे में सौर बिजली उत्पादन की रिक्तता को भरना।

लाई फाई प्रौद्योगिकी (LiFi technology)

हाल ही में एक पायलट परियोजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (ministry of electronics and IT) ने सफलतापूर्वक लाइट फिडेलिटी ((Light Fidelity- LiFi) नामक प्रौद्योगिकी का परीक्षण किया। 

  • इस प्रौद्योगिकी के अंतर्गत एलईडी बल्ब और हल्के स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करते हुए प्रति 1 किमी. तक के दायरे में 10 जीबी प्रति सेकंड की रफ़्तार से डेटा का संचार किया जा सकता है। 
  • स्पष्ट है कि जल्द ही भारत में वाणिज्यिक आधार पर भी इस प्रौद्योगिकी को लॉन्च किया जाएगा।
  • इस प्रौद्योगिकी के तहत देश के ऐसे इलाकों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा जहाँ बिजली तो है लेकिन फाइबर तक पहुँच नहीं है।
  • इस प्रौद्योगिकी का उपयोग अस्पतालों एवं पानी के भीतर मौजूद प्रणालियों की कनेक्टिविटी हेतु इंटरनेट व्यवस्था से संबद्ध करने के लिये किया जाएगा।

लाई-फाई क्या है?

  • जर्मन भौतिक विज्ञानी और प्रोफेसर हेराल्ड हास (Harald Haas) द्वारा लाई फाई का आविष्कार किया गया।
  • यह एक वायरलेस तकनीक है जो रेडियो तरंगों के स्थान पर दृश्यमान प्रकाश का उपयोग कर प्रति सेकंड की गति पर डेटा प्रसारित करती है।
  • यह वाई फ़ाई की तुलना में 100 गुना अधिक गति से कार्य करती है।
  • लाई फाई एक विज़ीबल लाइट कम्युनिकेशंस (Visible Light Communications -VLC) प्रणाली है। 
  • इसका मतलब यह है कि यह डेटा को 'स्ट्रीम-एबल कंटेंट’ (stream-able content) में परिवर्तित करने हेतु प्रकाश संकेतों और एक सिग्नल प्रोसेसिंग एलिमेंट (signal processing element) प्राप्त करने के लिये एक फोटो डिटेक्टर (photo-detector) का समायोजन करती है।
  • इसके विपरीत वाई फाई के अंतर्गत रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है, जबकि लाई फाई तकनीक दृश्य प्रकाश पर कार्य करती है।
  • इसकी छोटी रेंज के कारण लाई फाई प्रौद्योगिकी वाई फाई की तुलना में अधिक सुरक्षित है।

सेला पास (Sela Pass)

वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 13,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित सेला पास से सुरंग बनाने की घोषणा की गई है। इस सुरंग के माध्यम से चीन की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के रणनीतिक शहर के रूप में स्थित तवांग (Tawang) में सैनिकों की गति को तीव्र किया जा सकता है।

सेला पास 

  • सेला पास अरुणाचल प्रदेश के तवांग और पश्चिम कामेंग (West Kameng) ज़िलों के बीच स्थित है।
  • इस क्षेत्र को सामरिक दृष्टिकोण से बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
  • सेला पास के समीप सेला झील उस क्षेत्र में मौजूद लगभग 101 झीलों में से एक है जो तिब्बती बौद्ध धर्म में सबसे पवित्र स्थान रखती हैं।