PMLA तथा सर्वोच्च न्यायालय | 28 Jul 2022

प्रिलिम्स के लिये:

विदेशी मुद्रा, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999, FEMA, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 FEOA, विदेशी मुद्रा का संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 COFEPOSA, ED, सर्वोच्च न्यायालय 

मेन्स के लिये:

मनी लॉन्ड्रिंग का मुद्दा, काले धन का महत्त्व, ईडी की शक्तियाँ न्यायिक समीक्षा 

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में एक याचिका कि सुनवाई में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। 

  • न्यायालय ने रेखांकित किया कि आरोपी/अपराधी की बेगुनाही के सिद्धांत को एक मानव अधिकार के रूप में माना जाता है, लेकिन इस अवधारणा को संसद/विधायिका द्वारा बनाए गए कानून द्वारा बाधित किया जा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: 

  • प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR): 
    • प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ECIR) की तुलना प्राथमिकी से नहीं की जा सकती। 
      • प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति को ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है और "यह पर्याप्त है यदि प्रवर्तन निदेशालय (ED), गिरफ्तारी के समय, ऐसी गिरफ्तारी के आधार का खुलासा करता है"। 
        • ECIR ईडी का एक आंतरिक दस्तावेज़ है और यह तथ्य कि अनुसूचित अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, ईडी अधिकारियों के जाँच/परीक्षण शुरू करने के मामले में दखल नहीं करता है। 
  • PMLA अधिनियम की धारा 3: 
    • PMLA अधिनियम 2002 की धारा 3 की व्यापक पहुँच है और यह दर्शाता है कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध आय से जुड़ी प्रक्रिया या गतिविधि के संबंध में एक स्वतंत्र अपराध है जो एक अनुसूचित अपराध से संबंधित या उसके संबंध में आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप प्राप्त किया गया था 
    • निर्णय ने यह भी स्पष्ट किया कि: 
      • धारा 3 के तहत अपराध "एक अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप संपत्ति के अवैध लाभ पर निर्भर है"। 
        • वर्ष 2002 के अधिनियम के तहत प्राधिकरण किसी भी व्यक्ति पर काल्पनिक आधार पर या इस धारणा के आधार पर मुकदमा नहीं चला सकते हैं कि अपराध हुआ है लेकिन यह पुलिस के अधिकार क्षेत्र में पंजीकृत नहीं है और सक्षम मंच के समक्ष आपराधिक शिकायत जाँच लंबित है। 
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED): 
    • पीठ ने अधिनियम की धारा 5 (अपराध की किसी भी आय की अस्थायी कुर्की का आदेश) के तहत ED की शक्ति को बरकरार रखा। 
      • न्यायालय ने कहा कि धारा 5 व्यक्ति के हितों को सुरक्षित करने के लिये एक संतुलन व्यवस्था प्रदान करती है और यह भी सुनिश्चित करती है कि अपराध अधिनियम, 2002 द्वारा प्रदान किए गए तरीके से निपटने के लिये उपलब्ध रहे। 
    • इसने इस तर्क को खारिज कर दिया कि ED अधिकारी पुलिस अधिकारी हं और इसलिये अधिनियम की धारा 50 के तहत उनके द्वारा दर्ज बयान संविधान के अनुच्छेद 20 (3) से प्रभावित होगा, जिसमें कहा गया है कि अपराध का आरोपी कोई भी व्यक्ति अपने खिलाफ गवाह बनने के लिये मज़बूर नहीं किया जाएगा। 

धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 

  • यह आपराधिक कानून है जो धन शोधन/मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित मामलों से प्राप्त या इसमें शामिल संपत्ति की जब्ती का प्रावधान करने के लिए बनाया गया है। 
  • यह मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिये भारत द्वारा स्थापित कानूनी ढाँचे का मूल है। 
  • इस अधिनियम के प्रावधान सभी वित्तीय संस्थानों, बैंकों (RBI सहित), म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और उनके वित्तीय मध्यस्थों पर लागू होते हैं। 
  • PMLA (संशोधन) अधिमियम, 2012: 
    • इसमें 'रिपोर्टिंग इकाई' की अवधारणा शामिल है जिसमें बैंकिंग कंपनी, वित्तीय संस्थान, मध्यस्थ आदि शामिल होंगे। 
    • PMLA, 2002 में 5 लाख रुपए तक का ज़ुर्माना लगाने का प्रावधान था, लेकिन संशोधन अधिनियम में इस ऊपरी सीमा को हटा दिया गया है। 
    • इसमें गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति की संपत्ति की अस्थायी कुर्की और ज़ब्ती का प्रावधान किया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय: 

  • संगठनात्मक इतिहास: 
    • प्रवर्तन निदेशालय या ED एक बहु-अनुशासनात्मक संगठन है जो आर्थिक अपराधों की जाँच और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के लिये अनिवार्य है। 
    • इस निदेशालय की उत्पत्ति 1 मई, 1956 को हुई, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (फेरा '47) के तहत विनिमय नियंत्रण कानून के उल्लंघन से निपटने के लिये आर्थिक मामलों के विभाग में एक 'प्रवर्तन इकाई' का गठन किया गया। 
    • समय बीतने के साथ, FERA'1947 कानून को FERA’1973 कानून द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। 04 साल की अवधि (1973-1977) के लिये निदेशालय कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में रहा। पुनः आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत के साथ, FERA’1973 (जो एक नियामक कानून था) निरस्त कर दिया गया और इसके स्थान पर 1 जून, 2000 से एक नया कानून-विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) लागू किया गया। 
    • हाल ही में विदेशों में शरण लेने वाले आर्थिक अपराधियों से संबंधित मामलों की संख्या में वृद्धि के साथ सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA) पारित किया है और ED को इसे लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। 
  • कार्य: 
    • मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम, 2002 (PMLA): 
      • इसके तहत धन शोधन के अपराधों की जाँच करना, संपत्ति की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई करना और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाना हैं। 
    • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA): 
      • इसके तहत निदेशालय नामित अधिकारियों द्वारा फेमा के उल्लंघन के दोषियों की जाँच की जाती है और इसमें शामिल राशि का तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। 
    • भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA): 
      • इस अधिनियम का उद्देश्य ऐसे भगोड़े आर्थिक अपराधियों को दंडित करना है जो भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कानून की प्रक्रिया से बचने के उपाय खोजते हैं। 
    • COFEPOSA के तहत प्रायोजक एजेंसी: 
      • FEMA के उल्लंघन के संबंध में विदेशी मुद्रा और संरक्षण गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 (COFEPOSA) के तहत निवारक निरोध के प्रायोजक मामले देखना।

विगत वर्ष के प्रश्न(PYQs) 

प्रारंभिक परीक्षा: 

भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि में निम्नलिखित में से कौन-सा एक मदसमूह सम्मिलित है? (2013)

(a) विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, विशेष आहरण अधिकार (SDR) तथा विदेशों से ऋण 
(b) विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा धारित स्वर्ण तथा विशेष आहरण अधिकार (SDR) 
(c) विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, विश्व बैंक से ऋण तथा विशेष आहरण अधिकार (SDR) 
(d) विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा धारित स्वर्ण तथा विश्व बैंक से ऋण 

उत्तर:B  

व्याख्या: 

  • विदेशी मुद्रा भंडार एक केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्राओं में आरक्षित परिसंपत्तियाँ  हैं। 
  • भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल हैं: 
  • विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 
  • स्वर्ण भंडार  
  • विशेष आहरण अधिकार 
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में रिज़र्व ट्रेंच की स्थिति 

अतः विकल्प B सही है। 


प्रश्न. चर्चा कीजिये कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ और वैश्वीकरण धन शोधन में कैसे योगदान करते हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर धन शोधन की समस्या से निपटने के लिये विस्तृत उपाय सुझाइए। (2021, मुख्य परीक्षा) 

प्रश्न. दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक राज्यों के साथ भारत की निकटता ने उसकी आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों जैसे- बंदूक रखना , मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के बीच संबंधों की व्याख्या कीजिये। इसे रोकने के लिये क्या उपाय किये जाने चाहिये? (2018, मुख्य परीक्षा)

स्रोत:इंडियन एक्सप्रेस