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पश्चिमी घाट पर याचिका | 15 Sep 2022 | जैव विविधता और पर्यावरण

प्रिलिम्स के लिये: 

पश्चिमी घाट, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए), गाडगिल समिति, पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (डब्ल्यूजीईईपी), कस्तूरीरंगन समिति।

मेन्स के लिये:

पश्चिमी घाटों का महत्त्व, पश्चिमी घाटों के समक्ष आने वाले खतरे।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation-PIL) को खारिज कर दिया है, जिसने पश्चिमी घाट पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Areas-ESA) पर गाडगिल और कस्तूरीरंगन समितियों को चुनौती दी थी।

पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA):

जनहित याचिका द्वारा की गई मांग:

सर्वोच्च न्यायालय का पक्ष:

समितियों के अनुसार

पश्चिमी घाट

पश्चिमी घाट के लिये खतरा:

आगे की राह

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न:

Q कभी-कभी सामाचारों में आने वाली 'गाडमिल समिति रिपोर्ट' और 'कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट' संबंधित हैं (2016):

(a) संवैधानिक सुधारों से
(b) गंगा कार्य-योजना
(c) नदियों को जोड़ने से
(d) पश्चिमी घाटों के संरक्षण से

उत्तर: (d)

  • पश्चिमी घाट पर जनसंख्या दबाव, जलवायु परिवर्तन और विकास गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिये वर्ष 2010 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गाडगिल समिति का गठन किया गया था।
  • पश्चिमी घाट के सतत् एवं समावेशी विकास को बरकरार रखते हुए पश्चिमी घाट की जैवविविधता के संरक्षण एवं सुरक्षा हेतु भारत सरकार ने वर्ष 2012 में डॉ. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कार्यदल का गठन किया था।
  • अतः विकल्प (d) सही उत्तर है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ