फार्मा उद्योग में सुधारों की कवायद | 10 Jul 2017

संदर्भ
यू.एस. खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा दवा उत्पादन के मानकों कों गहराई से लागू करने से भारतीय दवा उत्पादकों को अपनी गुणवत्ता एवं मानकों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ा है। 

प्रमुख बिंदु

  • ल्यूपिन भारत की दूसरी सबसे प्रमुख दवा निर्माता कंपनी है। 
  • भारत को “दुनिया की फार्मेसी” कहा जाता है। 
  • अमेरिका के बाहर सबसे अधिक एफडीए-अनुमोदित संयंत्र भारत में हैं और अमेरिका में बिकने वाली 70 अरब डॉलर की जेनेरिक दवाओं का 40% हिस्सा भारत में निर्मित होता है। 
  • लेकिन एफडीए  के प्रतिबंधों के कारण भारत की प्रतिष्ठा कम हुई है । 2008 में एफडीए के मानकों के गंभीर रूप से उल्लंघन के लिये भारत की सबसे बड़ी दवा उत्पादक फर्म रैनबैक्सी पर प्रतिबन्ध के बाद से, डेटा धोखाधड़ी से लेकर स्वच्छता के मुद्दों पर एफडीए 40 से अधिक संयंत्रों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 
  • भारतीय कंपनियाँ अपनी गुणवत्ता में सुधार के लिये लाखों डॉलर खर्च कर रही हैं।  अमेरिका जैसे एक बड़े बाज़ार में अपना कारोबार करने के लिये इतना करना ज़रूरी है।  
  • इस मामले में भारत का अपना मानक भी है।  
  • ल्यूपिन को मिली राहत से वह अब भारतीय फार्मा उद्योग की संकट मोचन बनकर उभरी है। एफडीए अगले महीने उसके गोवा स्थित संयंत्र को मंजूरी देने जा रहा है।
  • ल्यूपिन ओरल गर्भनिरोधक, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह की दवा बनती है।  

क्या है एफडीए ?

  • फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए  या यूएस एफडीए ) संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग की एक एजेंसी है। यह विभाग संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय कार्यपालिका विभागों में से एक है। 
  • यह खाद्य सुरक्षा, तम्बाकू उत्पादों, आहार अनुपूरकों, टीका, जैव-औषधिय, चिकित्सा उपकरण, विद्युत चुम्बकीय विकिरण करने वाले उपकरणों, पशु उत्पादों और सौंदर्य प्रसाधनों के विनियमन और पर्यवेक्षण के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिये ज़िम्मेदार है।
  • एफडीए का मुख्यालय सिल्वर स्प्रिंग, मैरीलैंड में है और इसके 50 राज्यों, वर्जिन द्वीप समूह व पुर्टोरीको में स्थित 223 फील्ड ऑफिस और 13 प्रयोगशालाएँ  हैं।