आर्कटिक क्षेत्र में तेल रिसाव | 05 Jun 2020

प्रीलिम्स के लिये:

अंबरनाया नदी, पर्माफ्रॉस्ट तथा सक्रिय परत, तेल रिसाव 

मेन्स के लिये:

पर्माफ्रॉस्ट का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

रूस के 'आर्कटिक क्षेत्र' में स्थित अंबरनाया (Ambarnaya) नदी में बड़े पैमाने पर ‘तेल रिसाव’ (Oil Spill) की दुर्घटना के बाद रूसी राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की घोषणा की गई।

प्रमुख बिंदु:

  • अंबरनाया नदी, जिसमें तेल रिसाव हुआ है, पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में बहने वाली एक नदी है। 20,000 टन डीज़ल फैलने के बाद, नदी की सतह गहरी लाल रंग की हो गई।
  • नोरिल्स्क (Norilsk) नगर; जो आर्कटिक सर्किल के ऊपर स्थित है, के पास स्थित एक बिजली संयंत्र के ईंधन टैंक के गिर जाने के कारण यह घटना हुई है।
  • यह दुर्घटना आधुनिक रूसी इतिहास की दूसरी बड़ी ‘तेल रिसाव’ घटना है। इससे पूर्व ऐसी ही दुर्घटना वर्ष 1994 में हुई थी जिसमें कच्चे तेल का रिसाव कई महीनों तक चला था। 

तेल रिसाव का कारण:

  • नॉरिल्स्क में स्थित तापविद्युत गृह ‘पर्माफ्रॉस्ट’ (Permafrost) पर बनाया गया है। पर्माफ्रॉस्ट सतह जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार कमज़ोर हो रही है।
  • पर्माफ्रॉस्ट पिघलने के कारण वह आधार; जिस पर संयंत्र का ईंधन टैंक टिका हुआ था, कमज़ोर हो गया तथा 'तेल रिसाव' की दुर्घटना हो गई। यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि ईंधन टैंक 30 वर्षों से इसी पर्माफ्रॉस्ट पर टिका हुआ था।

दुर्घटना का प्रभाव:

  • पर्यावरणविदों के अनुसार, नदी की सफाई करना मुश्किल होगा क्योंकि नदी एकाकी निर्जन स्थान पर है तथा नदी की गहराई भी बहुत कम है। तेल रिसाव का आयतन भी बहुत अधिक है।
  • आर्कटिक जलमार्ग के अवरुद्ध हो जाने के कारण कम-से-कम 76 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। 
  • तेल रिसाव से वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि तथा मृदा प्रदूषण होगा। 

पर्माफ्रॉस्ट तथा सक्रिय परत:

Permafrost

  • पर्माफ्रॉस्ट (Permafrost) ऐसे स्थान को कहते हैं जो कम-से-कम लगातार दो वर्षों तक  कम तापमान पर होने के कारण जमा हुआ हो।
  • उत्तरी गोलार्द्ध में लगभग एक चौथाई भूमि क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट है। पर्माफ्रॉस्ट पर हमेशा हिमावरण नहीं पाया जाता है।
  • पर्माफ्रॉस्ट में मृदा, चट्टान और हिम एक साथ पाए जाते हैं। 
  • पर्माफ्रॉस्ट की ऊपरी मृदा परत जिसे ‘सक्रिय परत’ (Active Layer) कहा जाता है। ऊपरी सक्रिय परत में हिम ग्रीष्मकाल में पिघल जाती है जबकि शीतकाल में पिघल जाती है।

जलवायु परिवर्तन का पर्माफ्रॉस्ट पर प्रभाव:

  • वैश्विक तापन के कारण पर्माफ्रॉस्ट पिघलना शुरू हो जाता है। जिसके निम्नलिखित प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:
  • उत्तरी गोलार्द्ध में कई ग्राम पर्माफ्रॉस्ट पर बसे हुए हैं। पर्माफ्रॉस्ट जमी अवस्था में एक मज़बूत आधार के रूप में कार्य करता है परंतु वैश्विक तापन से इसके पिघलने के कारण घरों, सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढाँचे के नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • जब परमाफ्रॉस्ट जमी अवस्था में होता है तो मृदा में मौजूद जैविक कार्बन का विघटन नहीं हो पाता है परंतु जब परमाफ्रॉस्ट पिघलता है तो सूक्ष्म जीवाणु इस सामग्री को विघटित करना शुरू कर देते हैं। जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल में मुक्त होती हैं।

रूस द्वारा उठाए गए कदम:

  • क्षेत्र में आपातकाल की घोषणा की गई है ताकि नदी की सफाई के लिये अतिरिक्त सुरक्षा बलों तथा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
  • दुर्घटना के बाद विद्युत संयंत्र के प्रमुख को हिरासत में लिया गया है, तथा उसके खिलाफ तीन आपराधिक मामलों के तहत कार्यवाही शुरू की गई है।

निष्कर्ष:

  • यदि वैश्विक तापन को 2°C तक सीमित कर लिया जाता है तो वर्ष 2100 के अंत तक पर्माफ्रॉस्ट का एक चौथाई भाग समाप्त होगा। जिससे समुद्र जल स्तर में लगभग 1.1 मीटर तक वृद्धि हो सकती है।अत: पर्माफ्रॉस्ट  के संरक्षण के लिये ‘आर्कटिक परिषद’ के सदस्यों तथा अन्य देशों को एक साथ मिलकर कार्य करना चाहिये।

स्रोत: द हिंदू