नॉर्वेजियन प्रधानमंत्री की भारत यात्रा | 09 Jan 2019

चर्चा में क्यों?


नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोल्बर्ग (Erna Solberg) 7-9 जनवरी, 2019 तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री सोल्बर्ग के साथ उनकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है।

प्रमुख बिंदु

  • प्रधानमंत्री सोल्बर्ग की यह यात्रा निम्नलिखित 3 बिंदुओं पर केंद्रित है।

♦ प्रधानमंत्री सोल्बर्ग द्वारा रायसीना वार्ता में उद्घाटन भाषण।
♦ प्रधानमंत्री सोल्बर्ग द्वारा भारत-नॉर्वे व्यापार शिखर सम्मेलन 2019 का संबोधन।
♦ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहु-आयामी द्विपक्षीय पार्टनरशिप के विस्तार हेतु कई मुद्दों पर बातचीत।

  • दोनों देश वैश्विक सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने के लिये मिलकर काम करने पर सहमत हुए।
  • नॉर्वे ने परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिये भारत के आवेदन का समर्थन किया।
  • भारत-नॉर्वे महासागर वार्ता पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए और ब्लू इकॉनमी हेतु एक संयुक्त कार्यबल की स्थापना की गई।

भारत-नॉर्वे संबंध

  • भारत तथा नॉर्वे के करीबी और बहु-आयामी संबंध रहे हैं। आर्थिक और तकनीकी सहयोग द्विपक्षीय संबंध के महत्त्वपूर्ण पहलू हैं।
  • 100 से अधिक नॉर्वे कंपनियों ने भारत में जहाज़ निर्माण, पेट्रोलियम से संबंधित सेवाओं, जल विद्युत, स्वच्छ ऊर्जा और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है।
  • नॉर्वे में भी कई प्रमुख भारतीय कंपनियाँ मौजूद हैं। भारत और नॉर्वे ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि के लिये महासागरीय संसाधनों के सतत् उपयोग में रुचि दिखाई है।
  • प्रधानमंत्री सोल्बर्ग की यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति की समीक्षा करने और साझा हित के क्षेत्रों में बहुमुखी साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी।

रायसीना वार्ता (Raisina Dialogue)


उद्देश्य

  • एशियाई एकीकरण के साथ-साथ शेष विश्व के साथ एशिया के बेहतर समन्वय हेतु संभावनाओं एवं अवसरों की तलाश करना है।

इसका नाम रायसीना वार्ता क्यों है?

  • भारत के विदेश मंत्रालय का मुख्यालय रायसीना पहाड़ी (साउथ ब्लॉक), नई दिल्ली में स्थित है, इसी के नाम पर इसे रायसीना वार्ता का नाम दिया गया है।

रायसीना वार्ता क्या है?

  • यह भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करने वाला एक वार्षिक सम्मेलन है जिसका आयोजन भारत के विदेश मंत्रालय और ओआरएफ (Observer Research Foundation -ORF) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।
  • यह एक बहु-हितधारक, क्रॉस-सेक्टरल बैठक है जिसमें नीति-निर्माताओं एवं निर्णयकर्त्ताओं को शामिल किया गया है।
  • इसके अंतर्गत न केवल विभिन्न देशों के विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रियों को शामिल किया गया है, बल्कि उच्च स्तरीय सरकारी अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, व्यापार और उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों तथा सामरिक समुदायों, मीडिया एवं अकादमिक सदस्यों को भी शामिल किया जाता है।
  • ORF (Observer Research Foundation) नई दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है। यह भारतीय महासागरीय क्षेत्र में भारत की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर आधारित सम्मेलन है।
  • रायसीना वार्ता के 2019 संस्करण की थीम ‘ए वर्ल्ड रिऑर्डर: न्यू जियोमेट्री, फ्लुइड पार्टनरशिप एंड अनसर्टेन आउटकम्स’ है।

स्रोत- द हिंदू बिज़नेस लाइन, विदेश मंत्रालय की वेबसाइट