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मारथोमैन जैकोबाइट सीरियन कैथेड्रल चर्च | 18 Aug 2020 | भारतीय विरासत और संस्कृति

प्रीलिम्स के लिये

मारथोमैन जैकोबाइट सीरियन कैथेड्रल चर्च,

गोथिक वास्तुकला

मेन्स के लिये:

धार्मिक स्थानों पर स्वामित्त्व से संबंधित मुद्दा

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केरल सरकार ने केरल के एर्नाकुलम ज़िले के मुलंथुरूथी (Mulanthuruthy) में मारथोमैन जैकोबाइट सीरियन कैथेड्रल चर्च (Marthoman Jacobite Syrian Cathedral Church) को अपने नियंत्रण में ले लिया है। जो एक प्रमुख गैर-कैथोलिक ईसाई समुदाय मलंकरा चर्च (Malankara Church) के जैकोबाइट एवं रूढ़िवादी गुटों के बीच विवाद के केंद्र में रहा है।

प्रमुख बिंदु:

चर्च के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी:

केरल के चर्च समूह:

मूलंथुरूथी चर्च/मारथोमैन जैकोबाइट सीरियन कैथेड्रल चर्च:

गोथिक वास्तुकला (Gothic Architecture):

  • यह 12वीं-16वीं शताब्दी में लोकप्रिय हुई वास्तुकला की एक यूरोपीय शैली है।
  • यह वास्तुकला मूल रूप से फ्राँस एवं इंग्लैंड से संबंधित है।
  • यह मध्ययुगीन यूरोपीय वास्तुकला की एक शैली है, जो संभवत: जर्मन गोथ जाति के प्रभाव से आविर्भूत हुई थी।
  • इसकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
    • इंगित मेहराब (Pointed Arches)
    • रिब वॉल्ट (Rib Vault)
    • फ्लाइंग बट्रेस (Flying Buttresses)
    • कॉलम एंड पियर्स (Columns and Piers)
    • टावर्स और स्पियर्स (Towers and Spires)
  • अंग्रेजों ने भारतीय वास्तुकला की कुछ विशेषताओं का गोथिक वास्तुकला में विलय कर दिया जिसके परिणामस्वरूप वास्तुकला की इंडो-गोथिक शैली (Indo-Gothic Style) का विकास हुआ।
  • वास्तुकला की इंडो-गोथिक शैली के कुछ उदाहरण: मद्रास उच्च न्यायालय, विक्टोरिया मेमोरियल, द छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (पूर्व में विक्टोरिया टर्मिनस) आदि।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस