लॉर्ड कर्ज़न | 20 Aug 2022

प्रिलिम्स के लिये:

कर्ज़न गेट, बिजय चंद महताब, बर्दवान एस्टेट, बंगाल विभाजन।

मेन्स के लिये:

कर्ज़न, उनकी विदेश नीति और सुधार।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने लॉर्ड कर्ज़न गेट के सामने बर्दवान के महाराजा बिजय चंद महताब और उनकी पत्नी राधारानी की मूर्ति लगाने का फैसला किया है।

  • कर्ज़न के वर्ष 1903 में शहर का दौरा करने के उपलक्ष्य में महताब ने गेट का निर्माण कराया था।
  • महाराजाधिराज बिजय चंद महताब वर्ष 1887 से 1941 में अपनी मृत्यु तक ब्रिटिश भारत में बर्दवान एस्टेट, बंगाल के शासक थे।

लॉर्ड कर्ज़न

  • जॉर्ज नथानिएल कर्ज़न (11 जनवरी, 1859- 20 मार्च, 1925) का जन्म केडलस्टन हॉल (Kedleston Hall) में हुआ, जो इंग्लैंड के एक ब्रिटिश राजनेता और विदेश सचिव थे, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान ब्रिटिश नीति निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • लॉर्ड कर्ज़न ने लॉर्ड एल्गिन के कार्यकाल के उपरांत पदभार ग्रहण किया तथा कर्ज़न वर्ष 1899 से 1905 तक ब्रिटिश भारत के वायसराय रहे।
      • वह 39 वर्ष की आयु में भारत के सबसे कम उम्र के वायसराय बने।
    • कर्ज़न वायसराय पद के सर्वाधिक विवादास्पद और परिणामी धारकों में से एक थे।
  • वायसराय के रूप में पदभार ग्रहण करने से पूर्व कर्ज़न ने भारत (चार बार), सीलोन, अफगानिस्तान, चीन, पर्शिया, तुर्किस्तान, जापान और कोरिया का दौरा किया था।

कर्ज़न की विदेश नीतियाँ:

  • उत्तर-पश्चिम सीमांत नीति:
    • कर्ज़न ने अपने पूर्ववर्तियों शासकों के विपरीत उत्तर-पश्चिम में ब्रिटिश कब्ज़े वाले क्षेत्रों के एकीकरण, शक्ति और सुरक्षा की नीति का अनुसरण करना शुरू कर दिया।
    • उन्होंने चित्राल को ब्रिटिश नियंत्रण में रखा और पेशावर और चित्राल को जोड़ने वाली एक सड़क का निर्माण किया, जिससे चित्राल की सुरक्षा की व्यवस्था की गई।
  • अफगान नीति:
    • मध्य एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में रूसी विस्तार के डर से लॉर्ड कर्ज़न की अफगान नीति को राजनीतिक और आर्थिक हितों से जोड़ा गया था।
    • शुरुआती दौर से ही अफगानों और अंग्रेज़ों के बीच संबंधों में दरार आ गई थी।
  • पर्शिया के प्रति नीति:
    • उस क्षेत्र में ब्रिटिश प्रभाव को सुरक्षित करने के लिये वर्ष 1903 में लॉर्ड कर्ज़न व्यक्तिगत रूप से फारस की खाड़ी क्षेत्र में गए और वहाँ ब्रिटिश हितों की रक्षा हेतु कड़े कदम उठाए।
  • तिब्बत के साथ संबंध:
    • लॉर्ड कर्ज़न की तिब्बत नीति भी इस क्षेत्र में रूसी प्रभुत्व के डर से प्रभावित थी।
    • लॉर्ड कर्ज़न के प्रयासों ने इन दोनों के बीच व्यापार संबंधों को पुनर्जीवित किया था जिसके तहत तिब्बत अंग्रेज़ों को भारी क्षतिपूर्ति देने के लिये सहमत हुआ।

विभिन्न क्षेत्रों में सुधार:

  • कलकत्ता कॉरपोरेशन एक्ट 1899:
    • इस अधिनियम ने निर्वाचित विधायिकाओं की संख्या को कम कर दिया और भारतीयों को स्वशासन से वंचित करने के लिये मनोनीत अधिकारियों की संख्या में वृद्धि की।
    • इसके विरोध में कॉरपोरेशन के 28 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया और बाद में यह अंग्रेज़ों और एंग्लो-इंडियन के बहुमत के साथ एक सरकारी विभाग बन गया।
  • आर्थिक:  
    • वर्ष 1899 में ब्रिटिश मुद्रा को भारत में कानूनी निविदा घोषित किया गया और एक पाउंड को 15 रुपए के बराबर घोषित किया गया था।
    • कर्ज़न द्वारा नमक-कर की दर को कम किया गया। जिसने नमक-कर की दर को  ढाई रुपए प्रति मन (एक मन लगभग 37 किलो के बराबर) से घटाकर एक-तिहाई रुपए प्रति मन (Maund) कर दिया।
    • 500 रुपए से अधिक की वार्षिक आय वाले लोगों ने टैक्स चुकाया। इसके अतिरिक्त आयकर दाताओं को भी छूट मिली।
  • अकाल:
    • कर्ज़न के भारत आगमन के दौरान भारत में भीषण अकाल की स्थिति थी जिसने दक्षिण, मध्य और पश्चिमी भारत के व्यापक क्षेत्रों को प्रभावित किया। कर्ज़न ने प्रभावित लोगों को यथासंभव राहत सुविधाएँ प्रदान कीं।
    • लोगों को भुगतान के आधार पर काम दिया जाता था और किसानों को राजस्व के भुगतान से छूट दी जाती थी।
    • 1900 तक जब अकाल समाप्त हो गया, कर्ज़न ने अकाल के कारणों की जाँच के लिये एक आयोग नियुक्त किया और आयोग ने निवारक उपायों का सुझाव दिया, जिन्हें बाद में संज्ञान में लाया गया।
  • कृषि:
    • वर्ष 1904 में सहकारी क्रेडिट सोसायटी अधिनियम पारित किया गया था जिसका उद्देश्य जमा और ऋण के माध्यम से लोगों को सोसायटी निर्माण के लिये प्रेरित करना था, जिसमें मुख्य रूप से कृषक वर्ग को साहूकारों (जो साहूकार आमतौर पर अत्यधिक ब्याज दर वसूलते थे) के चंगुल से बचाने के लिये अपनाया गया था।
    • वर्ष 1900 में पंजाब भूमि अलगाव अधिनियम पारित किया गया था, जिसमें किसानों द्वारा उनके ऋणों के भुगतान नहीं किये जाने पर साहूकारों को हस्तांतरित की जाने वाली भूमि पर रोक लगा दी थी।
  • रेलवे:
    • कर्ज़न ने भारत में रेलवे की सुविधाओं में सुधार करने और रेलवे को सरकार के लिये लाभदायक बनाने का भी फैसला किया।
    • रेलवे लाइनों का विस्तार किया गया, रेलवे विभाग को समाप्त कर दिया गया और रेलवे के प्रबंधन को लोक निर्माण विभाग से हटा कर तीन सदस्यों वाले रेलवे बोर्ड को सौंप दिया गया।
  • शिक्षा:
    • वर्ष 1901 में, कर्ज़न ने शिमला में एक शिक्षा सम्मेलन बुलाया जिसके बाद वर्ष 1902 में विश्वविद्यालय आयोग की नियुक्ति की गई।
    • आयोग की अनुशंसा पर वर्ष 1904 में भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित किया गया।
    • कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और आयोग के एक सदस्य, गुरुदास बनर्जी ने रिपोर्ट में अपनी असहमति व्यक्त करने के लिये नोट दिया था और भारतीय जनता ने इस अधिनियम का तिरस्कार किया लेकिन सब कुछ ज़्यादा प्रभावी नहीं रहा।

बंगाल विभाजन में कर्ज़न की भूमिका:

  • वर्ष 1905 में अविभाजित बंगाल प्रेसीडेंसी का विभाजन कर्ज़न के द्वारा लिये गए फैसलों में सबसे आलोचनात्मक था, जिसने न केवल बंगाल में बल्कि पूरे भारत में व्यापक विरोध को जन्म दिया और स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी।
  • लगभग 8 करोड़ लोगों के साथ बंगाल भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला प्रांत था।
  • इसमें वर्तमान में पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा और असम के कुछ हिस्सों तथा वर्तमान बांग्लादेश शामिल थे।
  • कर्ज़न ने जुलाई 1905 में बंगाल प्रेसीडेंसी के विभाजन की घोषणा की।
    • 3.1 करोड़ की आबादी के साथ 3:2 के अनुपात में हिंदू-मुस्लिम सहित पूर्वी बंगाल और असम के एक नए प्रांत की घोषणा की गई।
    • पश्चिमी बंगाल प्रांत में सर्वाधिक हिंदू थे।

विभाजन के परिणाम:

  • विभाजन ने पूरे भारत में भारी आक्रोश और शत्रुता को जन्म दिया तथा कॉन्ग्रेस के सभी वर्गों (नरमपंथियों और कट्टरपंथियों) ने इसका विरोध किया।
  • इस घटना ने एक संघर्ष को जन्म दिया जिसे स्वदेशी आंदोलन के रूप में जाना जाने लगा जिसका सर्वाधिक प्रभाव बंगाल में था, लेकिन अन्य जगहों पर भी इसका प्रभाव था, उदाहरण के लिये डेल्टाई आंध्र में इसे वंदेमातरम आंदोलन के रूप में जाना जाता था।
    • यह विरोध ब्रिटिश वस्तुओं (विशेष रूप से वस्त्रों) का बहिष्कार करने और स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिये किया गया था।
  • अपनी देशभक्ति को रेखांकित करने और उपनिवेशवादियों को चुनौती देने के लिये वंदे मातरम गाते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया।
  • रवींद्रनाथ टैगोर ने कई स्थानों पर प्रदर्शन का नेतृत्त्व किया और उन्होंने कई देशभक्ति के गीतों की रचना की जिसमें सबसे प्रसिद्ध 'अमर सोनार बांग्ला' (माई गोल्डन बंगाल) था, जो अब बांग्लादेश का राष्ट्रगान है।

विरोध प्रदर्शनों का प्रभाव:

  • वर्ष 1905 में कर्ज़न भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए, लेकिन यह आंदोलन कई वर्षों तक चलता रहा।
  • किंग जॉर्ज पंचम ने अपने राज्याभिषेक दरबार में वर्ष 1911 में बंगाल के विभाजन को निरस्त कर दिया।
    • वर्ष 1911 में लॉर्ड हार्डिंग भारत के वायसराय थे।
  • आंदोलन के दौरान स्वदेशी आंदोलन का महत्त्व काफी बढ़ गया था, बाद में यह आंदोलन राष्ट्रव्यापी स्तर पर पहुँच गया।
  • बंगाल विभाजन और कर्ज़न के क्रूर व्यवहार ने राष्ट्रीय आंदोलन और कांग्रेस को एक ज्वलंत आंदोलन की ओर मोड़ दिया।

प्रिलिम्स

स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2019)

  1. इसने स्वदेशी कारीगर शिल्प और उद्योगों के पुनरुद्धार में योगदान दिया।
  2. स्वदेशी आंदोलन के एक भाग के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c)


Q. 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' को पहली बार संघर्ष के तरीकों के रूप में किसके दौरान अपनाया गया था? (2016)

(a) बंगाल विभाजन के खिलाफ आंदोलन
(b) होम रूल आंदोलन
(c) असहयोग आंदोलन
(d) साइमन कमीशन की भारत यात्रा

उत्तर: (a)


Q. वर्ष 1905 में लॉर्ड कर्ज़न द्वारा किया गया बंगाल का विभाजन कब तक बना रहा? (2014)

(a) प्रथम विश्व युद्ध तक, जिमें अंग्रेजों को भारतीय सैनिकों की आवश्यकता पड़ी और विभाजन समाप्त किया गया
(b) सम्राट जॉर्ज पंचम द्वारा दिल्ली में 1911 के शाही दरबार में कर्ज़न के अधिनियम को निराकृत किये जाने तक
(c) महात्मा गांधी द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ करने तक
(d) भारत  के 1947 में हुए विभाजन तक, जब पूर्वी बंगाल पूर्वी पाकिस्तान बन गया

उत्तर: (b)

व्याख्या:

  • वर्ष 1905 में भारत के वायसराय लॉर्ड कर्ज़न ने प्रशासनिक बोझ को कम करने और बंगाल के पूर्वी क्षेत्र की उपेक्षा के समाधान के बहाने बंगाल को दो भागों पश्चिमी (पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा को मिलाकर) और पूर्वी (पूर्वी बंगाल और असम) में विभाजित किया।
  • 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने अपने राज्याभिषेक दरबार में बंगाल विभाजन को निरस्त कर दिया और इसे भाषाई आधार पर विभाजित करने का निर्णय लिया। इसलिये ओडिशा और बिहार और असम के प्रांत फिर से अस्तित्त्व में आए। उन्होंने राजधानी को भी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया।

अतः विकल्प (b) सही है।


मेन्स:

Q. लॉर्ड कर्ज़न की नीतियों और राष्ट्रीय आंदोलन पर उनके दीर्घकालिक प्रभाव का मूल्यांकन कीजिये। (2020)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस