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लोकसभा में ट्रांसजेंडर विधेयक पास | 18 Dec 2018 | शासन व्यवस्था

चर्चा में क्यों?


17 दिसंबर, 2018 को लोकसभा द्वारा ट्रांसजेंडर विधेयक को 27 संशोधनों के साथ पारित किया गया। इस विधेयक को दो वर्ष पूर्व सदन के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।  विधेयक को परामर्श के लिये सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण विभाग की स्थायी समिति को भेजा गया, सरकार ने स्थायी समिति द्वारा प्रस्तुत 27 संशोधनों के साथ इसे स्वीकृति प्रदान की।

इस विधेयक को यह एक प्रगतिशील विधेयक है, क्योंकि इसके अंतर्गत एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को 'पुरुष', 'महिला' या 'ट्रांसजेंडर' के रूप में पहचानने का अधिकार प्रदान किया गया है। इस बिल के माध्यम से भारत सरकार की कोशिश एक ऐसी व्यवस्था लागू करने की है, जिससे किन्नरों को भी सामाजिक जीवन, शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में आज़ादी से जीने का अधिकार मिल सके।

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2016 [Transgender Persons (Protection of Rights) Bill 2016]

ट्रांसजेंडर व्यक्ति को परिभाषित करना।

विधेयक के संबंध में समिति की रिपोर्ट

अधिकार विहीन दृष्टिकोण

ट्रांसजेंडर कौन होता है?


ट्रांसजेंडर वह व्यक्ति होता है, जो अपने जन्म से निर्धारित लिंग के विपरीत लिंगी की तरह जीवन बिताता है। जब किसी व्यक्ति के जननांगों और मस्तिष्क का विकास उसके जन्म से निर्धारित लिंग के अनुरूप नहीं होता है, महिला यह महसूस करने लगती है कि वह पुरुष है और पुरुष यह महसूस करने लगता है कि वह महिला है।

भारत में ट्रांसजेंडर्स के समक्ष आने वाली परशानियाँ:

सामाजिक तौर पर बहिष्कृत

उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रांसजेंडर्स के पक्ष में दिये गए महत्त्वपूर्ण आदेश निम्नलिखित हैं-

निष्कर्ष


भारत में ऐसे लोगों को सामाजिक कलंक के तौर पर देखा जाता है। इनके लिये काफी कुछ किये जाने की आवश्यकता है। यह विधेयक भी इसी दिशा में एक प्रयास है। इस विधेयक के माध्यम से किन्नरों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिसके लिये वे लंबे समय से प्रयत्नशील हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और कानूनी अधिकारों की प्राप्ति आदि सभी मोर्चों पर ट्रांसजेंडर्स के लिये कारगर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।