लोकायुक्त | 04 Apr 2023

प्रिलिम्स के लिये:

लोकायुक्त, मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (CMDRF), लोकपाल, प्रशासनिक सुधार आयोग, लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013

मेन्स के लिये:

भारत में लोकायुक्त से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों? 

केरल लोकायुक्त ने मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (Chief Minister’s Distress Relief Fund- CMDRF) में कथित भाई-भतीजावाद और विसंगतियों से संबंधित एक मामले को जाँच हेतु तीन सदस्यीय पूर्ण न्यायपीठ को सौंप दिया है। 

लोकायुक्त:

  • परिचय:  
    • लोकायुक्त भारतीय संसदीय ओम्बुड्समैन है, जो भारत की प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है और उसके लिये काम करता है।
    • यह एक भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था है। किसी राज्य में लोकायुक्त व्यवस्था का उद्देश्य लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों, आरोपों की जाँच करना है।
  • उत्पत्ति:  
    • लोकायुक्त व्यवस्था की उत्पत्ति स्कैंडिनेवियाई देशों में हुई थी।
    • भारत में प्रशासनिक सुधार आयोग (1966-70) ने केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त के गठन की सिफारिश की थी।
    • वर्ष 2013 में लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम पारित होने से पहले भारत के कई राज्यों ने 'लोकायुक्त' संस्थान बनाने के लिये कानून पारित किये।
      • महाराष्ट्र पहला राज्य था जिसने वर्ष 1971 में लोकायुक्त निकाय स्थापित किया था।
  • नियुक्ति:  
    • लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है। नियुक्ति करते समय अधिकांश राज्यों में राज्यपाल (a) राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और (b) राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता से परामर्श करता है।
  • कार्यकाल:  
    • अधिकांश राज्यों में लोकायुक्त के लिये निर्धारित अवधि 5 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु ( जो भी पहले हो) होती है। वह दूसरे कार्यकाल के लिये पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं है।
  • लोकायुक्त से संबंधित मुद्दे:
    • कोई स्पष्ट कानून नहीं:
      • लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 में लोकायुक्त हेतु केवल एक धारा है, जो अनिवार्य करती है कि राज्यों को एक वर्ष के भीतर लोकायुक्त अधिनियम पारित करना होगा तथा उसकी संरचना, शक्तियों या अन्य विशेषताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है।  
      • वास्तव में राज्यों को इस बात की पूर्ण स्वायत्तता है कि उनके अपने लोकायुक्तों की नियुक्ति किस प्रकार की जाती है, वे किस प्रकार कार्य करते हैं और वे किन परिस्थितियों में सेवा करते हैं। 
    • समाधान में विलंब:
      • लोकायुक्त द्वारा सामना की जाने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक जाँच और शिकायतों के समाधान में देरी है।
      • लोकायुक्त वित्तपोषण और बुनियादी ढाँचे के लिये भी राज्य सरकार पर निर्भर रहता है, जिससे हस्तक्षेप और स्वतंत्रता की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

आगे की राह

  • लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम को मज़बूत करना: लोकायुक्त को अधिक शक्तियाँ प्रदान करने हेतु लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिये, जैसे कि मुख्यमंत्री एवं न्यायपालिका सहित सभी लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच तथा मुकदमा चलाने की शक्ति प्रदान करना। 
  • पर्याप्त संसाधन और कर्मचारियों की नियुक्ति: देश भर में लोकायुक्त कार्यालयों को पर्याप्त रूप से कर्मचारियों और संसाधनों की आवश्यकता है जिससे वे अपने जनादेश को प्रभावी ढंग से लागू करा सकें।
  • जवाबदेही और पारदर्शिता में वृद्धि: लोकायुक्त को अपने कामकाज़ में अधिक जवाबदेही के साथ  पारदर्शिता बनाई रखनी  चाहिये। उसे नियमित रूप से अपनी गतिविधियों, जाँच एवं परिणामों पर रिपोर्ट प्रकाशित करनी चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस