पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति | 29 Apr 2019

चर्चा में क्यों?

हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी पर जीवन के उत्पत्ति की शुरुआत तालाबों में हुई। संभवतः महासागरों की अपेक्षा तालाब का वातावरण जीवन की उत्पत्ति के लिये अधिक उपयुक्त रहा होगा।

  • वैज्ञानिकों द्वारा ज़र्नल जियोकेमिस्ट्री, जियोफिजिक्स, जियोसिस्टम (The Journal Geochemistry, Geophysics, Geosystems) में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि उथले जल निकायों में जीवन की उत्पत्ति हेतु महत्त्वपूर्ण घटक ‘नाइट्रोजन’ की सांद्रता अधिक रही होगी।

नाइट्रोजन कारक
(Nitrogen factor)

  • कई शोधों एवं निष्कर्षों के अनुसार, वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि जीवन की उत्पत्ति के लिये निश्चित रूप से नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है।
  • विभिन्न तरीकों से नाइट्रोजन वायुमंडल से होते हुए समुद्र, तालाब तथा अन्य जल निकायों में जमा हुआ होगा।
  • पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 78 % नाइट्रोजन पाया जाता है।
  • वायुमंडलीय नाइट्रोजन में दो नाइट्रोजन अणु (N2) शामिल होते हैं, जो एक मज़बूत ट्रिपल बांड (N≡N) के माध्यम से जुड़े होते हैं, सामान्यतः यह मज़बूत ट्रिपल बांड आकाश में बिजली के चमकने और गरज़ने से ही टूटते हैं।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआती दौर में वायुमंडल में आकाशीय बिजली की पर्याप्त घटनाएँ होती रही होंगी, ताकि नाइट्रोजन के ऑक्साइड पर्याप्त मात्रा में उत्पन्न हो सकें और पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हो सके।
  • लेकिन नए अध्ययन के अनुसार, सूर्य के पराबैंगनी प्रकाश और प्राचीन महासागरीय चट्टानों से घुलित लोहे की वज़ह से समुद्र में पहुँचने वाले नाइट्रोजन के ऑक्साइड का ज़्यादातर हिस्सा नष्ट हो जाता है और यह पुनः नाइट्रोजन के रूप में वायुमंडल में पहुँच जाता है। अतः इसी कारण समुद्र में नाइट्रोजन के ऑक्साइड बहुत ही कम रह गए होंगे।
  • उथले तालाब में जीवन की उत्पत्ति हेतु बेहतर विकल्प रहे होंगे, क्योंकि तालाबों का आकार बहुत छोटा होता है जहाँ जीवन के लिये आवश्यक नाइट्रोजन के ऑक्साइड की सांद्रता अधिक रही होगी।
  • इस प्रकार जीवन की उत्पत्ति महासागर में होना कठिन है लेकिन तालाब इसके लिये उपयुक्त हैं।

पृष्ठभूमि

  • पृथ्वी की उत्पत्ति का अंतिम चरण जीवन के विकास से संबंधित है।
  • निःसंदेह पृथ्वी का आरंभिक वायुमंडल जीवन के विकास के लिये अनुकूल नहीं था।
  • आधुनिक वैज्ञानिक जीवन की उत्पत्ति को एक तरह की रासायनिक प्रक्रिया बताते हैं इसमें पहले जैव कार्बनिक अणु बने फिर इनका समूह बना, यह प्रक्रिया निरंतर चलती रही और अंत में यह निर्जीव पदार्थ जीवित तत्त्वों में परिवर्तित हुआ।
    पृथ्वी पर जीवन के प्रमाण अलग अलग समय में जीवाश्मों के अवशेष के रूप में प्राप्त हुए हैं।
  • वैज्ञानिकों द्वारा ऐसा माना जाता है कि शायद सबसे पहले शैवाल की उत्पत्ति हुई रही होगी।

स्रोत- द हिंदू