किर्गिज़स्तान-ताज़िकिस्तान संघर्ष | 23 Sep 2022

प्रिलिम्स के लिये: किर्गिज़स्तान- ताजिकिस्तान संघर्ष, मध्य एशिया, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC), यूपीएससी, आईएएस, विगत वर्ष के प्रश्न।

मेन्स के लिये: मध्य एशिया में भारत की भूमिका का महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में  किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान  के बीच हिंसक सीमा संघर्ष में लगभग 100 लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।

Kyrgyzstan

दोनों देशों के बीच संघर्ष का कारण:

  • ऐतिहासिक विरासत:
    • वर्तमान संघर्ष सोवियत काल से पहले और बाद की पुरानी विरासतों को दोहरा रहे हैं।
    • जोसेफ स्टालिन के नेतृत्व में दो गणराज्यों की सीमाओं का सीमांकन किया गया था।
    • प्राकृतिक संसाधनों पर सामान्य अधिकार: ऐतिहासिक रूप से किर्गिज़ और ताजिक आबादी को प्राकृतिक संसाधनों पर समान अधिकार प्राप्त थे।
    • सोवियत संघ के निर्माण ने सामूहिक और राज्य के खेतों में पशुधन के बड़े पैमाने पर पुनर्वितरण को देखा, जिसने मौजूदा यथास्थिति को अस्थिर किया।
  • वर्तमान विवाद:
    • हाल की घटनाओं में दोनों पक्षों के समूहों ने विवादित क्षेत्रों में पेड़ लगाए और कृषि उपकरणों के हथियार के रूप में इस्तेमाल के कारण संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई।
    • वर्तमान में फरगना घाटी संघर्ष और लगातार हिंसक विस्फोटों का स्थल बनी हुई है, जिसमें मुख्य रूप से ताजिक, किर्गिज़ और उज्बेक शामिल हैं, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से सामान्य सामाजिक विशिष्टताओं, आर्थिक गतिविधियों एवं धार्मिक प्रथाओं को साझा किया है।
    • दोनों देश लहरदार प्रक्षेपवक्र और प्रवाह के साथ कई जल चैनल साझा करते हैं, जो दोनों तरफ पानी तक समान पहुँच को बाधित करते हैं। नतीजतन, महत्त्वपूर्ण सिंचाई अवधि के दौरान व्यावहारिक रूप से प्रत्येक वर्ष छोटे पैमाने पर संघर्ष होते रहते हैं।
    • किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान 971 किलोमीटर सीमा साझा करते हैं, जिनमें से लगभग 471 किलोमीटर विवादित है।
    • दोनों देशों के नेताओं ने एक विशेष प्रकार की विकास परियोजना की कल्पना के माध्यम से संघर्ष को जारी रखने में योगदान दिया है, जिसके परिणामस्वरूप घुमंतू समुदायों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है, जो अपने संबंधित देशों की आंतरिक गतिशीलता को स्थिर करने और उनकी शक्ति को वैध बनाने की उम्मीद कर रहे हैं।

ताजिकिस्तान-भारत संबंध:

  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों में सहयोग:
  • विकास और सहायता साझेदारी:
    • विकास सहायता:
      • 6 मिलियन अमेरिकी डाॅलर के अनुदान के साथ 2006 में एक सूचना और प्रौद्योगिकी केंद्र (बेदिल केंद्र) शुरू किया गया था।
        • यह परियोजना 6 वर्षों के पूर्ण हार्डवेयर चक्र (Full Hardware Cycle) के लिये संचालित की गई जिसके तहत ताजिकिस्तान में सरकारी क्षेत्र में पहली पीढ़ी के लगभग सभी आईटी विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया गया।
      • ताजिकिस्तान में 37 स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित करने की एक परियोजना पूरी हुई जिसे अगस्त 2016 में शुरू किया गया था।
    • मानवीय सहायता:
      • जून 2009 में ताजिकिस्तान में बाढ़ से हुए नुकसान में मदद करने के लिये भारत द्वारा 200,000 अमेरिकी डाॅलर की नकद सहायता दी गई थी।
      • दक्षिण-पश्चिम ताजिकिस्तान में पोलियो के फैलने के बाद भारत ने नवंबर 2010 में यूनिसेफ के माध्यम से ओरल पोलियो वैक्सीन की 2 मिलियन खुराक प्रदान की।
  • मानव क्षमता निर्माण:
    • वर्ष 1994 में दुशांबे में भारतीय दूतावास की स्थापना के बाद से ताजिकिस्तान भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (Indian Technical & Economic Cooperation Programme- ITEC) का लाभार्थी रहा है।
    • वर्ष 2019 में भारत-मध्य एशिया संवाद प्रक्रिया के तहत कुछ ताजिकिस्तानी राजनयिकों को विदेश सेवा संस्थान, दिल्ली में प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।
  • व्यापार और आर्थिक संबंध:
    • भारत द्वारा ताजिकिस्तान को निर्यात में शामिल मुख्य वस्तुओं में फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा सामग्री, गन्ना या चुकंदर की चीनी, चाय, हस्तशिल्प और मशीनरी शामिल हैं।
      • ताजिकिस्तान के बाज़ार में भारतीय फार्मास्यूटिकल् उत्पाद की लगभग 25% की हिस्सेदारी है।
    • ताजिकिस्तान द्वारा विभिन्न प्रकार के अयस्क, स्लैग और राख, एल्युमीनियम, कार्बनिक रसायन, हर्बल तेल, सूखे मेवे और कपास भारत को निर्यात किये जाते हैं।
    • वर्ष 2018 में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा व कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्रों में आठ समझौता ज्ञापनों पर दोनों देशों के मध्य हस्ताक्षर किये गए।
  • सांस्कृतिक लगाव और लोगों के मध्य संबंध:
    • गहरे मज़बूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों ने दोनों देशों के मध्य संबंधों को नए स्तर पर  विस्तारित करने में मदद की है।
      • दोनों देशों के बीच सहयोग में सैन्य और रक्षा संबंधों पर विशेष ध्यान देने के साथ मानव प्रयास के सभी पहलू शामिल हैं।
    • दुशांबे में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा नियुक्त शिक्षकों के माध्यम से कथक और तबला पाठ्यक्रम में शिक्षा प्रदान करता है। केंद्र संस्कृत और हिंदी भाषा की कक्षाएंँ भी आयोजित करता है।
    • वर्ष 2020 में 'माई लाइफ माई योगा' वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता में ताजिकिस्तान के लोगों द्वारा उत्साह के साथ योग में भागीदारी की गई।
  • सामरिक:
    • दुशांबे (Dushanbe) से करीब तीस किलोमीटर दूर अयनी (Ayni) नामक जगह पर भारत का एयरबेस है। इन वर्षों में यह एक भारतीय वायु सेना (IAF) बेस के रूप में विकसित हुआ, जिसे गिस्सार मिलिट्री एरोड्रोम (Gissar Military Aerodrome- GMA) के रूप में जाना जाता है।

आगे की राह

  • संघर्ष के समाधान के लिये युद्धरत समूहों को एक सामान्य समझौते पर सहमत होने की आवश्यकता होगी।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुदायों को बड़े देशों को शामिल करके विवाद को सुलझाने के प्रयास करने की आवश्यकता है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से संघर्षों को हल करने के लिये बड़े देशों का उपयोग किया गया है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. SCO के लक्ष्य और उद्देश्यों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये। भारत के लिये इसका क्या महत्त्व है? (मुख्य परीक्षा, 2021)

स्रोत: द हिंदू