जनजातीय गौरव दिवस | 17 Nov 2022

प्रिलिम्स के लिये:

जनजातीय गौरव दिवस, खासी, भील, मिज़ो, सिद्धू और कान्हू मुर्मू, बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह

मेन्स के लिये:

जनजातीय नेता और स्वतंत्रता आंदोलन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के राष्ट्रपति ने जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर. 2022) के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

जनजातीय गौरव दिवस:

  • सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव, वीरता तथा आतिथ्य के भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने में आदिवासियों के प्रयासों को मान्यता देने हेतु प्रतिवर्ष ‘जनजातीय गौरव दिवस’ का आयोजन किया जाता है।
  • उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कई आदिवासी आंदोलन किये। इन आदिवासी समुदायों में तामार, संथाल, खासी, भील, मिज़ो और कोल शामिल हैं।

आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी:

  • बिरसा मुंडा:
    • बिरसा मुंडा जिनका जन्म 15 नवंबर, 1875 को हुआ, वे छोटा नागपुर पठार की मुंडा जनजाति से संबंधित थे।
    • वह भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक नेता और लोक नायक थे।
    • उन्होंने 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान आधुनिक झारखंड और बिहार के आदिवासी क्षेत्र में भारतीय जनजातीय धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया।
      • बिरसा वर्ष 1880 के दशक में इस क्षेत्र में सरदारी लड़ाई आंदोलन के करीबी पर्यवेक्षक थे, जिसने अहिंसक माध्यमों जैसे कि ब्रिटिश सरकार को याचिका देने के आदिवासियों के अधिकारों को बहाल करने की मांग की थी। हालाँकि इन मांगों को कठोर औपनिवेशिक सत्ता ने नज़रअंदाज कर दिया।
    • ज़मींदारी प्रथा के तहत आदिवासियों को ज़मींदारों से मज़दूरों में पदावनत कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप बिरसा ने आदिवासियों के मुद्दे को उठाया।
  • बिरसा मुंडा ने एक नया धर्म बिरसैत बनाया।
    • धर्म ने एक ही ईश्वर में विश्वास का प्रचार किया और लोगों से अपने पुराने धार्मिक विश्वासों पर लौटने का आग्रह किया। लोगों ने उन्हें प्रभावी धार्मिक उपासक, चमत्कारी कार्यकर्त्ता और एक उपदेशक के रूप में संदर्भित करना शुरू कर दिया।
    • उरांव और मुंडा के लोग बिरसा के प्रति आश्वस्त हो गए और कई लोगों ने उन्हें 'धरती अब्बा, जिसका अर्थ है पृथ्वी का पिता' कहना शुरू कर दिया। उन्होंने धार्मिक क्षेत्र में एक नए दृष्टिकोण का प्रवेश कराया।
    • बिरसा मुंडा ने विद्रोह का नेतृत्व किया जिसे ब्रिटिश सरकार द्वारा थोपी गई सामंती राज्यव्यवस्था के खिलाफ उल्गुलान (विद्रोह) या मुंडा विद्रोह के रूप में जाना जाने लगा।
    • उन्होंने जनता को जागृत किया और ज़मींदारों के साथ-साथ अंग्रेज़ों के खिलाफ उनमें विद्रोह के बीज बोए।
    • आदिवासियों के खिलाफ शोषण और भेदभाव के खिलाफ उनके संघर्ष के कारण 1908 में छोटानागपुर किरायेदारी अधिनियम पारित हुआ, जिसने आदिवासी लोगों से गैर-आदिवासियों को भूमि देने पर प्रतिबंध लगा दिया।

Birsa-Munda

  • शहीद वीर नारायण सिंह:
    • उन्हें छत्तीसगढ़ में सोनाखान का गौरव माना जाता है, उन्होंने व्यापारी के अनाज के स्टॉक को लूट लिया और उन्हें 1856 के अकाल के बाद गरीबों में वितरित कर दिया।
    • वीर नारायण सिंह के बलिदान ने उन्हें आदिवासी नेता बना दिया और वे 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद थे।

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  • श्री अल्लूरी सीता राम राजू:
    • उनका जन्म 4 जुलाई, 1897 को आंध्र प्रदेश में भीमावरम के पास मोगल्लू नामक गाँव में हुआ था।
    • अल्लूरी को अंग्रेज़ो के खिलाफ रम्पा विद्रोह का नेतृत्व करने के लिये याद किया जाता है जिसमें उन्होंने विदेशियों के खिलाफ विद्रोह करने के लिये विशाखापत्तनम और पूर्वी गोदावरी ज़िलों के आदिवासी लोगों को संगठित किया था।
    • वह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ने के लिये बंगाल के क्रांतिकारियों से प्रेरित थे।

Alluri-Sitarama-Raju

  • रानी गाइदिन्ल्यू:
    • वह एक नगा आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता थीं जिन्होंने भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। 13 साल की उम्र में वह अपने चचेरे भाई हैपो जादोनांग के हेराका धार्मिक आंदोलन में शामिल हो गईंं।
    • उनके लिये नगा लोगों की स्वतंत्रता की संघर्ष यात्रा भारत की स्वतंत्रता आंदोलन का एक व्यापक हिस्सा थी। उन्होंने गांधीजी के संदेश को मणिपुर में प्रचारित किया।

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  • सिद्धू और कान्हू मुर्मू:
    • 1857 के विद्रोह से दो साल पहले 30 जून, 1855 को दो संथाली भाइयों सिद्धू और कान्हू मुर्मू ने 10,000 संथालों को एकजुट किया और अंग्रेज़ों के खिलाफ विद्रोह की घोषणा की।
    • आदिवासियों ने अंग्रेज़ों को अपनी मातृभूमि से भगाने की शपथ ली। मुर्मू भाइयों की बहनों फुलो और झानो ने भी इस विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाई।सिद्धू और कान्हू मुर्मू:

sidhu-and-kanhu-murmu

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. भारत के इतिहास के संदर्भ में "उलगुलान" अथवा महान उपद्रव (ग्रेट ट्युमुल्ट) निम्नलिखित में से किस घटना का वर्णन है? (2020)

(a) 1857 का विद्रोह
(b) 1921 का मप्पिला विद्रोह
(c) 1859-60 का नील विद्रोह
(d) 1899-1900 का बिरसा मुंडा का विद्रोह

उत्तर: (d)

स्रोत: पी.आई.बी.