भारत-अमेरिका व्यापार संबंध | 24 Feb 2020

प्रीलिम्स के लिये:

GSP, FTA, RCEP

मेन्स के लिये:

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

24 फरवरी, 2020 को अमेरिकी राष्ट्रपति अपने पहले दो दिवसीय भारतीय दौरे पर आए हैं। भारत एवं अमेरिका विभिन्न मौकों पर आपसी व्यापार संबंधों को मज़बूत बनाने का संकल्प लेते रहे हैं।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • अमेरिका के टेक्सास में ‘हाउडी मोदी कार्यक्रम’ के बाद यह दूसरा मौका है जब भारत के मोटेरा स्टेडियम में ‘नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम’ के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति एवं भारतीय प्रधानमंत्री एक मंच पर साथ दिखाई देंगे।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति की इस यात्रा को भारत-अमेरिका के मज़बूत कूटनीतिक रिश्तों से जोड़कर देखा जा रहा है तथा इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न प्रकार के द्विपक्षीय समझौतों के संपन्न होने की भी संभावना है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध

  • भारत अपने उद्योग और सेवा क्षेत्रों के विकास हेतु विकसित बाज़ारों में अपनी बेहतर पहुँच बना रहा है। इनमें अमेरिका भी शामिल है जो पिछले दो दशकों से वस्तु और सेवाओं दोनों मामलों में भारत का एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है।
  • भारत, अमेरिका के साथ व्यापार आधिक्य की स्थिति में है। ध्यातव्य है कि वर्ष 2017-18 में भारत का व्यापार आधिक्य 21 बिलियन डॉलर का रहा। हालाँकि अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा, अमेरिका के चीन के साथ व्यापार घाटे (वर्ष 2019 में लगभग 340 बिलियन डॉलर) का केवल 1 प्रतिशत है।

India-trade

  • चीन के बाद अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है तथा भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार वर्ष 2018 में 142.6 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर रहा। वर्ष 2019 में भारत का संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार आधिक्य 16.9 बिलियन डॉलर का था तथा संयुक्त राज्य अमेरिका वस्तु व्यापार के संदर्भ में के लिए भारत के शीर्ष व्यापार भागीदारों में से है एवं भारत इसका आठवाँ सबसे बड़ा भागीदार है।
  • भारत-अमेरिका के बीच सैन्य व्यापार दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में अहम भूमिका निभा रहा है। ध्यातव्य है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की निर्भरता इस क्षेत्र में रूस से कम होकर अमेरिका पर बढ़ गई है।

भारत-अमेरिका के मध्य व्यापार से संबंधित महत्त्वपूर्ण मुद्दे

  • भारत-अमेरिकी व्यापार सौदे पर बातचीत वर्ष 2018 से चल रही है, लेकिन टैरिफ (आयातों पर कर या शुल्क), सब्सिडी, बौद्धिक संपदा, डेटा संरक्षण और कृषि एवं डेयरी उत्पादों तक पहुँच इत्यादि बिंदुओं पर असहमति के कारण यह अभी तक सफल नहीं हो सकी।
  • हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल का उदाहरण देते हुए अमेरिका सदैव यह शिकायत करता रहा है कि भारत एक टैक्स किंग है जो अत्यधिक मात्रा में वस्तुओं के आयात पर टैरिफ लगाता है। अतः भारत-अमेरिका के बीच व्यापार में भारत द्वारा टैरिफ में वृद्धि एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है।
  • वर्ष 2018 में अमेरिका ने भारत सहित विभिन्न देशों से स्टील आयात पर 25% और एल्युमीनियम आयात पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया था जिसके कारण भारत के इस्पात निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी वर्ष 2017-18 के 3.3% से कम होकर वर्ष 2018-19 में 2.5% रह गई है। भारत ने मार्च 2018 में WTO में अमेरिकी फैसले को चुनौती भी दी थी। अतः अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाया जाने वाला कर भी दोनों देशों के बीच अहम मुद्दा है।
  • अमेरिका ने जून 2019 में सामान्‍य प्राथमिकता प्रणाली (Generalized System of Preferences- GSP) के तहत भारतीय उत्पादों को शुल्क में मिलने वाली छूट को समाप्त करने का निर्णय लिया। इस प्रकार GSP भी भारत और अमेरिकी व्यापार संबंधों में एक बड़ा मुद्दा है। ध्यातव्य है कि हाल ही में अमेरिका ने भारत को विकासशील देशों की श्रेणी से भी हटा दिया है जो कि GSP विवाद को एक नया आयाम प्रदान करता है क्योंकि GSP का फायदा केवल विकासशील देशों को प्रदान किया जाता है।
  • अमेरिका लंबे समय से अपने कृषि और डेयरी उत्पादों एवं चिकित्सा उपकरणों की भारत में अधिक पहुँच की माँग करता रहा है। भारत द्वारा अपने घरेलू कृषि और डेयरी उद्योगों के हितों की रक्षा हेतु RCEP समझौते से बाहर निकलने का एक प्रमुख कारण था, साथ ही भारत अपने बाज़ार एवं देशवासियों के हितों की रक्षा हेतु अमेरिकी वस्तुओं के व्यापक आयात का विरोध करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे से द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित प्रभाव

  • अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे से भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न मुद्दों, जैसे- मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement- FTA), GSP, निवेश संवर्द्धन, IPR इत्यादि के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण परिणाम प्राप्त होने की उम्मीद है।
  • इसके अतिरिक्त आतंकवाद जैसी वैश्विक समस्या के समाधान को लेकर दोनों देशों के बीच संयुक्त प्रयास किया सकता है। इसके अतिरिक्त अमेरिकी वीज़ा नियमों में ढील देने संबंधी वार्ता भी हो सकती है जो भारत-अमेरिका संबंधों को एक अलग आयाम प्रदान करेगा।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा न केवल व्यापारिक या कूटनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है बल्कि दोनों देशों के सांस्कृतिक, सामरिक एवं लोकतांत्रिक संबंधों की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। गौरतलब है कि भारत द्वारा ईरान एवं रूस के संदर्भ में अमेरिकी प्रतिबंधों को नज़रअंदाज़ किये जाने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत दौरा अमेरिका और भारत के मज़बूत कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
  • इसके अतिरिक्त अमेरिका का साथ भारत को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों जैसे- NSG, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता प्राप्त करने इत्यादि में अहम साबित हो सकता है।
  • साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के विकास एवं हस्तक्षेप के संदर्भ आपसी समझौतों की उम्मीद है।]
  • वैश्विक आर्थिक मंदी के समय जहाँ भारत का वैश्विक निर्यात लगातार गिर रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दौरा देश के लिये अन्य बाज़ारों के साथ द्विपक्षीय संबंधों में विविधता लाने और उन्हें मज़बूत करने के लिये महत्त्वपूर्ण है।

आगे की राह

  • भारत एवं अमेरिका को अपने कूटनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने की आवश्यकता है तथा दोनों देशों के बीच उत्पन्न व्यापार मुद्दों को आपसी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिये।
  • भारत को अमेरिका एवं अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों में प्रैगमैटिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस