सूरीनाम में भारतीय औषधकोश मान्यता | 19 Aug 2023

प्रिलिम्स के लिये:

सूरीनाम में भारतीय औषधकोश मान्यता, भारतीय औषधकोश आयोग (IPC), भारतीय औषधकोश, बौद्धिक संपदा अधिकार, आत्मनिर्भर भारत

मेन्स के लिये:

सूरीनाम में भारतीय औषधकोश मान्यता

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय औषधकोश आयोग (IPC) और सूरीनाम के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किये गए हैं, जिसका उद्देश्य सूरीनाम में दवाओं के लिये एक मानक के रूप में भारतीय औषधकोश (IP) को मान्यता देना है।

  • हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन चिकित्सा विनियमन के क्षेत्र में निकट सहयोग के लिये भारत और सूरीनाम की पारस्परिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
  • यह सहयोग दोनों देशों में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करते समय संबंधित कानूनों और विनियमों के पालन के महत्त्व की मान्यता में निहित है।

भारतीय औषधकोश आयोग (IPC): 

  • IPC स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक स्वायत्त संस्था है।
  • IPC भारत में दवाओं के मानक तय करने के लिये बनाया गया है। इसका मूल कार्य इस क्षेत्र में प्रचलित रोगों के इलाज के लिये आमतौर पर आवश्यक दवाओं के मानकों को नियमित रूप से अद्यतन करना है।
  • यह भारतीय औषधकोश आयोग (IPC) के रूप में  जोड़ने और मौजूदा मोनोग्राफ को अद्यतन करने के माध्यम से दवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिये आधिकारिक दस्तावेज़ प्रकाशित करता है।
  • यह नेशनल फॉर्मूलरी ऑफ इंडिया को प्रकाशित करके जेनेरिक दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देता है।
  • भारतीय औषधकोश आयोग मनुष्यों और जानवरों के स्वास्थ्य देखभाल के दृष्टिकोण से आवश्यक दवाओं की पहचान, शुद्धता और शक्ति के लिये मानक निर्धारित करता है।
  • IPC, IP संदर्भ पदार्थ (IP Reference Substances- IPRS) भी प्रदान करता है जो परीक्षण के तहत किसी वस्तु की पहचान और IP में निर्धारित उसकी शुद्धता के लिये फिंगरप्रिंट के रूप में कार्य करता है।

समझौता ज्ञापन की मुख्य विशेषताएँ: 

  • भारतीय औषधकोश (IP) की स्वीकृति:
    • समझौता ज्ञापन सूरीनाम में दवाओं के लिये मानकों की एक व्यापक पुस्तक के रूप में IP की स्वीकृति को मज़बूत करता है।
  • सुव्यवस्थित गुणवत्ता नियंत्रण:
    • IP ​​मानकों का पालन करने वाले भारतीय निर्माताओं द्वारा जारी किये गए विश्लेषण प्रमाणपत्र की स्वीकृति के माध्यम से सूरीनाम में दवाओं के दोहरे परीक्षण की आवश्यकता समाप्त हो गई है।
    • यह व्यवस्था अतिरेक को कम करती है, समय और संसाधनों की बचत करती है।
  • लागत प्रभावी मानक:
    • समझौता ज्ञापन उचित लागत पर IPC से IP संदर्भ पदार्थों (IP Reference Substances- IPRS) और अशुद्धता मानकों तक पहुँच की सुविधा प्रदान करता है।
    • यह प्रावधान सूरीनाम की गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण प्रक्रियाओं को बढ़ाकर लाभान्वित करता है।

समझौता ज्ञापन का महत्त्व:

  • सस्ती दवाइयाँ: 
    • IP की मान्यता सूरीनाम में जेनेरिक दवाओं के विकास को संभव बनाती है। इससे सूरीनाम के नागरिकों के लिये लागत प्रभावी दवाओं की उपलब्धता में वृद्धि होगी, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
  • आर्थिक लाभ: 
    • भारत के लिये सूरीनाम में भारतीय फार्माकोपिया/औषधकोश की मान्यता 'आत्मनिर्भर भारत (Self-Reliant India)' की दिशा में एक कदम है। यह मान्यता भारतीय चिकित्सा उत्पादों के निर्यात को सुविधाजनक बनाती है, विदेशी मुद्रा अर्जित करती है तथा वैश्विक मंच पर भारत के फार्मास्यूटिकल उद्योग को मज़बूत करती है।
  • भारतीय फार्मास्यूटिकल निर्यात को बढ़ावा देना: 
    • सूरीनाम द्वारा IP की मान्यता से दोहरा परीक्षण और जाँच की आवश्यकता दूर हो जाती है, जिससे भारतीय दवा निर्यातकों को प्रतिस्पर्द्धा में बढ़त मिलती है। नियामक बाधाओं में कमी से भारतीय फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के लिये व्यापार अधिक लाभकारी होगा।
  • व्यापक अंतर्राष्ट्रीय मान्यता:
    • भारतीय औषधकोश की आधिकारिक मान्यता पहले ही अफगानिस्तान, घाना, नेपाल, मॉरीशस और सूरीनाम तक विस्तृत है। यह विस्तार वैश्विक फार्मास्यूटिकल परिदृश्य में अपने प्रभाव एवं सहयोग को बढ़ाने के भारत के प्रयासों को दर्शाता है।

सूरीनाम के विषय में मुख्य तथ्य:

  • परिचय: 
    • सूरीनाम दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित है। इसकी सीमा उत्तर में अटलांटिक महासागर, पूर्व में फ्रेंच गुयाना, दक्षिण में ब्राज़ील और पश्चिम में गुयाना से लगती है।
    • सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो है, जो सूरीनाम नदी के तट पर स्थित है।
    • सूरीनाम एक लोकतांत्रिक गणराज्य है जिसमें राज्य और सरकार का प्रमुख राष्ट्रपति होता है। देश में बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था है।

  • राजभाषा:
    • 25 नवंबर, 1975 को सूरीनाम, जिसे पहले डच गुयाना के नाम से जाना जाता था, ने नीदरलैंड से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
    • इसकी राजभाषा डच है, जो देश के औपनिवेशिक इतिहास को दर्शाती है। हालाँकि कई अन्य भाषाएँ बोली जाती हैं, जिनमें स्रानन टोंगो (सूरीनाम क्रियोल), हिंदुस्तानी, जावानीज़ और अंग्रेज़ी शामिल हैं।
  • अर्थव्यवस्था:
    • सूरीनाम की अर्थव्यवस्था विविध है, जिसमें खनन (सोना, बॉक्साइट, तेल), कृषि (चावल, केले, लकड़ी) और सेवाएँ शामिल हैं।
    • सूरीनाम प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से सोना, बॉक्साइट और हाल ही में खोजे गए तेल भंडार से समृद्ध है।

निष्कर्ष:

  • MoU भारत और सूरीनाम के बीच फार्मास्यूटिकल सहयोग, गुणवत्ता नियंत्रण और व्यापार की प्रगति को रेखांकित करता है।
  • यह रणनीतिक सहयोग न केवल दोनों देशों के फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों को लाभान्वित करता है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल बाज़ार में आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के लिये भारत की आकांक्षा के अनुरूप भी है।

स्रोत: पी.आई.बी.