भारत में बढ़ती तेल की मांग | 11 Jan 2020

प्रीलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

मेन्स के लिये:

पेट्रोलियम और ऊर्जा क्षेत्र में चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency-IEA) के अनुसार, वर्ष 2020 के मध्य तक भारतीय बाज़ार में तेल की मांग चीन के बाज़ार से अधिक हो जाएगी। जिसे देखते हुए उन्होंने सरकार को विषम परिस्थितियों के लिये सुरक्षित सामरिक तेल भंडार को बढ़ने की सलाह दी है।

मुख्य बिंदु:

  • वर्तमान समय में कच्चे तेल की खपत के मामले में भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश है।
  • इसके अतिरिक्त भारत कच्चे तेल के परिशोधन में विश्व का चौथा सबसे बड़ा देश होने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक भी है।
  • IEA के अनुमान के अनुसार, भारत वर्ष 2020 के मध्य तक तेल की खपत के मामले में चीन को पीछे छोड़ते हुए खनिज तेल उद्योग के क्षेत्र में एक आकर्षक बाज़ार के रूप में उभरेगा।
  • वर्तमान में भारतीय तेल बाज़ार अमेरिका (USA) और चीन के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर है, परन्तु भविष्य में भारत में यातायात तथा घरेलू उपयोग आदि क्षेत्रों में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में भारी वृद्धि का अनुमान है।
  • IEA के अनुसार, भारत में वर्ष 2024 तक तेल की मांग बढ़कर 6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुँच जाएगी, ध्यातव्य हो कि वर्ष 2017 के आँकड़ों के अनुसार यह मांग 4.4 बैरल प्रतिदिन थी।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2025 तक भारत की प्रतिदिन तेल परिशोधन की क्षमता 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुँच जाएगी।
  • वर्तमान में भारत की विषम परिस्थितियों के लिये सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves-SPR) की क्षमता 10 दिनों के आयातित तेल के बराबर है।
  • भारत के आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम और कर्नाटक के पादुर (Padur) तथा मंगलौर में 5.33 मिलियन टन कच्चे तेल को सामरिक पेट्रोलियम भंडार के रूप में रखा जाता है।
  • पेट्रोलियम के सामरिक भंडारण की इस योजना के अगले चरण में सरकार द्वारा ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पदुर में 6.5 मिलियन टन क्षमता के नए भंडारण केंद्र स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है।
  • IEA निदेशक के अनुसार, भारत का वर्तमान सामरिक भंडार इस दिशा में एक अच्छी पहल है, परंतु विषम परिस्थितियों के लिये अपनी भंडारण क्षमता को बढ़ाना भारत के लिए बहुत ही आवश्यक है।

निष्कर्ष:

भारत अपनी आवश्यकता का 80% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसमें से 65% तेल होर्मुज़ की खाड़ी से होते हुए मध्यपूर्व के देशों से आता है। इस क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता तथा भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए भारत के लिये इस क्षेत्र में किसी भी चुनौती से निपटने के लिये तैयार रहना चाहिये।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency-IEA):

  • IEA एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन है, इसकी स्थापना वर्ष 1973 के तेल संकट पृष्ठभूमि में आर्थिक सहयोग व विकास संगठन (Organisation for Economic Co-operation and Development-OECD) फ्रेमवर्क के तहत वर्ष 1974 में की गई थी।
  • इसका मुख्यालय पेरिस (फ्राँस) में स्थित है, भारत इस संगठन का एक सहयोगी सदस्य (Associate Member) है।
  • यह संगठन उर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर काम करता है।
  • IEA के सदस्य देशों की सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves-SPR) की क्षमता 90 दिनों के आयातित तेल के बराबर होती है।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस