भारत-नॉर्वे संबंध | 15 Nov 2022

प्रिलिम्स के लिये:

नॉर्वे की भौगोलिक स्थिति, भारत-नॉर्वे संबंध

मेन्स के लिये:

भारत-नॉर्वे संबंध का इतिहास, भारत-नॉर्वे संबंधों में सामयिक विकास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत में नॉर्वे के राजदूत ने बताया है कि भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय व्यापार विगत दो वर्षों में दोगुना होकर 2 बिलियन डॉलर हो गया है।

Norway

 भारत-नॉर्वे संबंधों में सहयोग के आगामी क्षेत्र:

  • नॉर्वे दुनिया भर में पाँच वर्षों में अपने जलवायु निवेश कोष से 1 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा, भारत में कितना धन निवेश किया जाएगा, इसका निर्धारण परियोजनाओं के आधार पर किया जाएगा।
  • नॉर्वे पवन ऊर्जा से संबंधित परियोजनाओं के लिये राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के साथ काम कर रहा है।
    • हालाँकि, भारत में समस्या यह है कि इस परियोजना को व्यवहार्य बनाने के लिये सबसे उपयुक्त राज्य तमिलनाडु और गुजरात हैं।
  • नॉर्वे भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि पर्याप्त देश हांगकांग कन्वेंशन की पुष्टि कर सकें। यह एक बाध्यकारी अन्तर्राष्ट्रीय कानूनी साधन होगा।

नॉर्वे-भारत संबंध का इतिहास:

  • इतिहास:
    • वर्ष 1947 में इन देशों में संबंध की स्थापना के बाद से भारत और नॉर्वे के बीच आपसी संबंध सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण रहे हैं।
    • भारत में नॉर्वे का पहला वाणिज्य दूतावास(कांसुलेट) कोलकाता और मुंबई में क्रमशः वर्ष 1845 और वर्ष 1857 में स्थापित हुआ।
    • मत्स्य पालन पर ज़ोर देने के साथ विकास सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 1952 में "इंडिया फंड" की स्थापना की गई थी।
    • उसी वर्ष नॉर्वे ने नई दिल्ली में अपना दूतावास स्थापित किया।
    • नॉर्वे ने मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR), वासेनर अरेंजमेंट (WA) और ऑस्ट्रेलिया समूह (AG) के निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं के लिये भारत की सदस्यता का समर्थन किया है।
    • भारत ने वर्ष 1986 में नॉर्वे के साथ दोहरा कराधान अपवंचन समझौता (DTAA) पर हस्ताक्षर किया, जिसे फरवरी 2011 में संशोधित किया गया।

घटनाक्रम:

  • नॉर्वे का महावाणिज्य दूतावास:
    • मुंबई में वर्ष 2015 में दोबारा महावाणिज्य दूतावास खोल दिया गया।
      • यह 1970 से बंद था।
      • यह नॉर्वे सरकार के आधिकारिक व्यापार प्रतिनिधि इनोवेशन नॉर्वे से जुड़ा था, जिसका कार्यालय अब मुंबई और नई दिल्ली दोनों जगह है।
  • भारत रणनीति:
    • दिसंबर 2018 में, नॉर्वे सरकार ने एक नई 'भारत रणनीति' शुरू की। यह रणनीति वर्ष 2030 तक नॉर्वे की स्पष्ट प्राथमिकताएँ निर्धारित करती है और द्विपक्षीय सहयोग को विकसित करने के लिये नये सिरे से प्रोत्साहन देती है।
      • भारत रणनीति पाँच विषयगत प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है:
        • लोकतंत्र और विधि आधारित विश्व व्यवस्था
        • महासागर
        • ऊर्जा
        • जलवायु और पर्यावरण
      • अनुसंधान, उच्च शिक्षा और वैश्विक स्वास्थ्य
      • इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये नॉर्वे अधिकारियों, व्यापार सहयोग और अनुसंधान सहयोग के बीच राजनीतिक संपर्क तथा सहयोग पर केंद्रित है।
      • इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये, नॉर्वे राजनीतिक संपर्क और अधिकारियों के बीच सहयोग, व्यावसायिक सहयोग तथा अनुसंधान सहयोग पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • ब्लू इकोनॉमी पर टास्क फोर्स:
    • वर्ष 2020 में, सतत् विकास के लिये ब्लू इकोनॉमी पर भारत-नॉर्वे टास्क फोर्स को दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से शामिल किया गया था। इस टास्क फोर्स को वर्ष 2019 की शुरुआत में नॉर्वे के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान लॉन्च किया गया था।
    • टास्क फोर्स का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संयुक्त पहल को विकसित करना और उनका पालन करना है
    • यह नॉर्वे और भारत दोनों से उच्चतम स्तर पर प्रासंगिक हितधारकों को जुटाने और मंत्रालयों तथा एजेंसियों के बीच निरंतर प्रतिबद्धता एवं प्रगति सुनिश्चित करने का भी इरादा रखता है।
  • नॉर्वे के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा:
    • 2019 में, नॉर्वे के प्रधान मंत्री ने भारत का दौरा किया और कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गए।
    • प्रधानमंत्री ने रायसीना डायलॉग में उद्घाटन भाषण दिया और भारत-नॉर्वे व्यापार शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।
  • आर्थिक संबंध:
    • वर्ष 2019 तक, 100 से अधिक नॉर्वे की कंपनियों ने भारत में स्वयं को स्थापित किया।
      • अन्य 50 का प्रतिनिधित्व एजेंटों द्वारा किया जाता है।
      • नॉर्वेजियन पेंशन फंड ग्लोबल संभवतः भारत के सबसे बड़े एकल विदेशी निवेशकों में से एक है। वर्ष 2019 में, इसका निवेश 9.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
    • नॉर्वे से भारत में निर्यात जिसमें अलौह धातु, गैस प्राकृतिक निर्मित, प्राथमिक रूप में प्लास्टिक, कच्चे खनिज, रासायनिक सामग्री और उत्पाद शामिल हैं।
    • भारत से नॉर्वे को निर्यात की मुख्य वस्तुओं में परिधान और सहायक उपकरण, कपड़ा धागे, धातु, चावल और विविध विनिर्मित वस्तुएँ शामिल हैं।
  • विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग:
    • नॉर्वे के पास दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा वाणिज्यिक जहाज़ बेड़ा है और पर्यावरण के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी कारणों से आधुनिक बेड़े को बनाए रखने के लिये जहाज़ का पुनर्चक्रण महत्वपूर्ण था। नॉर्वे "जहाज़ पुनर्चक्रण और जहाज़ निर्माण" गतिविधियों में भारत के साथ घनिष्ठ रूप से सहयोग कर रहा है।
    • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास और चेन्नई में पवन ऊर्जा संस्थान तथा नॉर्वे के संस्थानों के बीच अकादमिक सहयोग मौजूद है।
    • नॉर्वे की कंपनी पिकल ताजमहल जैसे भारतीय स्मारकों के लिये डिजिटल संग्रह बनाने में शामिल थी। कंपनी ऐतिहासिक स्मारकों गुजरात में धौलावीरा और मध्य प्रदेश में भीमबेटका गुफाओं के डिजिटलीकरण में भी शामिल थी

स्रोत: द हिंदू