जल संकट का सामना कर रहे देशों में भारत 13वें स्थान पर | 08 Aug 2019

चर्चा में क्यों?

अमेरिका स्थित विश्व संसाधन संस्थान (World Resources Institute-WRI) द्वारा प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार जल संकट से सर्वाधिक ग्रसित विश्व के 17 देशों में भारत 13वें स्थान पर है। WRI द्वारा तैयार इस सूची में देशों की रैंकिंग एक्वेडक्ट टूल के आधार पर की गई है। WRI द्वारा प्रयुक्त एक्वेडक्ट टूल में देशों की रैंकिंग के लिये जल संकट के 13 संकेतकों का प्रयोग किया गया।

एक्वेडक्ट वाटर रिस्क एटलस

(Aqueduct Water Risk Atlas)

  • एक्वेडक्ट ग्लोबल वाटर रिस्क मैपिंग टूल कंपनियों, निवेशकों, सरकारों और अन्य उपयोगकर्त्ताओं को यह समझने में मदद करता है कि विश्व में कहाँ और कैसे जल संकट का विस्तार हो रहा है।
  • एक्वेडक्ट टूल उपयोगकर्त्ताओं को जल संकट को समझने तथा इसके प्रबंधन हेतु स्मार्ट तरीके अपनाने का अवसर प्रदान करता है।

वैश्विक निष्कर्ष

Extremely High Water Stress

  • आधारभूत जल संकट (Baseline Water Stress- BWS): विश्व की कुल जनसंख्या का एक तिहाई भाग चरम स्तर के आधारभूत जल संकट का सामना कर रहा है।
    • इसका तात्पर्य यह है कि सिंचित कृषि, उद्योगों और नगरपालिकाओं द्वारा हर साल औसतन अपनी उपलब्ध आपूर्ति का 80% उपयोग कर लिया जाता है।
    • BWS स्तर, जिसका विकास WRI के एक्वेडक्ट वाटर रिस्क एटलस के एक भाग के रूप में किया गया है, उपयोग किये गये कुल जल (सिंचित कृषि, उद्योग और नगरपालिकाएँ) और नवीकरणीय सतही जल आपूर्ति के मध्य अनुपात को दर्शाता है।
  • जल की मांग में वृद्धि: वर्ष 1960 से लेकर अभी तक जल आपूर्ति की मांग बढ़ने से जल की निकासी दोगुनी हो गई है।
  • जल संकट से ग्रसित देश: जल संकट से ग्रसित 17 में से 12 देश मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के हैं एवं इसका कारण इन देशों की भौगोलिक स्थिति (ऊष्ण तथा शुष्क) के कारण मांग और आपूर्ति में असंतुलन है।
    • विश्व बैंक के अनुसार, जलवायु से संबंधित जल की कमी से इन क्षेत्रों में अधिक आर्थिक नुकसान होने की संभावनाएँ हैं।
  • जल संकट से ग्रसित समुदाय: यहाँ तक कि कम जल तनाव वाले देशों जैसे- दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी केप के समुदाय और न्यू मक्सिको भी उच्च स्तर के जल संकट से ग्रसित हो सकते हैं।
  • जल संकट से सर्वाधिक ग्रसित 17 देश इस प्रकार है-क़तर, इजराइल, लेबनान, ईरान, जॉर्डन, लीबिया, कुवैत, सऊदी अरब, इरीट्रिया, संयुक्त अरब अमीरात, सैन मरीनो, बहरीन, भारत, पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ओमान, बोत्सवाना।

भारत के संदर्भ में

GroundWater Decline

उत्तरी भारत जिसे पहली बार जल संकट की गणना में शामिल किया गया है, भू-जल संकट से अत्यधिक ग्रसित है।

  • चंडीगढ़ सूची में प्रथम स्थान पर है तथा इसके बाद हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश और जम्मू-कश्मीर का स्थान आता है।
  • भारत में जल संकट की चुनौती केवल चेन्नई (जो गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है) ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों/राज्यों में भी व्याप्त है।
  • भारत एक्वेडक्ट की सूची में जल संकट से सर्वाधिक ग्रसित 17 देशों में से 13वें स्थान पर है।

परिणाम

  • खाद्य असुरक्षा: कृषि क्षेत्र में अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है तथा जल खाद्य सुरक्षा की कुंजी है।
  • जल संघर्ष और प्रवासन: जल की कमी से आजीविका का संकट उत्पन्न होगा जो प्रवासन को बढ़ावा देगा।
  • आर्थिक अस्थिरता: विश्व बैंक के अनुसार, जल की कमी के चलते कई देशों की GDP प्रभावित होगी और आर्थिक समस्याओं में भी वृद्धि हो सकती है।

सुझाव

  • दक्ष सिंचाई (Efficient Irrigation): आधारभूत जल संकट (उदाहरण के लिये भूजल का अत्यधिक दोहन या उपयोग) की समस्या के समाधान हेतु देशों को अधिक दक्ष सिंचाई पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता है।
  • जल संरक्षण (Water Conservation): भू जल स्तर को बढ़ने तथा भू जल संकट को दूर करने हेतु नहरों, तालाबों, बाढ़ के मैदानों आदि के द्वारा जल संग्रहण को बढ़ावा देना चाहिये।
  • जल संबंधित डाटा: भारत वर्षा जल, सतही जल और भू-जल स्तर से संबंधित विश्वसनीय और मज़बूत डाटा द्वारा जल संकट की समस्या का समाधान कर सकता है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ