वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र पर COVID- 19 महामारी का प्रभाव | 01 May 2020

प्रीलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

मेन्स के लिये:

COVID- 19 और ऊर्जा क्षेत्र 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 'अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी' (International Energy Agency- IEA) ने वैश्विक ऊर्जा मांग और CO2 उत्सर्जन पर ‘वन्स-इन-ए-सेंचुरी क्राइसिस’ (Once-in-a-Century Crisis) नामक रिपोर्ट जारी की है। 

मुख्य बिंदु:

  • रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के कारण प्रति सप्ताह ऊर्जा की मांग में औसतन 25% तक गिरावट देखी जा रही है।
  • भारत में लॉकडाउन के परिणामस्वरूप ऊर्जा मांग में 30% से अधिक की कमी देखी गई।
  • वर्ष 2020 में COVID- 19 महामारी के कारण वैश्विक ऊर्जा की मांग में वर्ष 2008 के वित्तीय संकट की तुलना में सात गुना अधिक तक कमी देखी जा सकती है।

वैश्विक ईंधन मांग पर प्रभाव:

  • तेल की मांग:
    • वर्ष 2020 में तेल की कीमतों में औसतन 9% या इससे अधिक की गिरावट हुई है तथा तेल की खपत वर्ष 2012 के स्तर पर पहुँच सकती है।
  • कोयले की मांग:
    • कोयले की मांग में 8% तक की कमी हो सकती है, क्योंकि बिजली की मांग में लगभग 5% कमी देखी जा सकती है।
  • गैस की मांग:
    • बिजली और औद्योगिक कार्यों में गैस की मांग कम होने से वर्ष 2020 की पहली तिमाही की तुलना में आने वाली तिमाही में और अधिक गिरावट देखी जा सकती है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा मांग:
    • परिचालन लागत कम होने तथा बिजली की आसान पहुँच को लॉकडाउन के दौरान तरजीह देने के कारण नवीकरणीय ऊर्जा मांग बढ़ने की उम्मीद है।

COVID-19 का CO2 उत्सर्जन पर प्रभाव:

  • द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से पहली बार वर्ष 2020 में CO2 उत्सर्जन में सर्वाधिक गिरावट देखी गई है। क्योंकि वर्ष 2020 की पहली तिमाही में कार्बन-गहन ईंधन की मांग में बहुत अधिक गिरावट देखी गई है। 
  • वैश्विक CO2 उत्सर्जन में, वैश्विक ऊर्जा मांग की तुलना में अधिक गिरावट हुई। वर्ष 2020 की पहली तिमाही में कार्बन उत्सर्जन वर्ष 2019 की तुलना में पाँच प्रतिशत कम रहा।

भारत की ऊर्जा मांग:

  • भारत की ऊर्जा मांग में 30% से अधिक की कमी देखी है। तथा लॉकडाउन को आगे बढ़ाने पर, प्रति सप्ताह के साथ ऊर्जा मांग में 0.6% की गिरावट हो सकती है।

ऊर्जा मांग में कमी के निहितार्थ:

  • ऊर्जा उद्योग:
    • ऊर्जा उद्योग की मूल्य श्रृंखलाएँ (Value Chains) वित्तीय रूप से प्रभावित हो सकती हैं। अधिकांश ऊर्जा कंपनियों के राजस्व में कमी देखी जा सकती है क्योंकि एक तरफ तो ऊर्जा उत्पादों यथा- तेल, गैस, कोयला और बिजली आदि की मांग में कमी हुई है दूसरी तरफ इन उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है।
  • ऊर्जा सुरक्षा:
    • तेल की आपूर्ति और मांग में व्यापक बदलाव के कारण उत्पन्न होने वाले आर्थिक और वित्तीय व्यवधान के कारण उद्योगों की उत्पादन क्षमता मे बहुत कमी आ सकती है तथा इससे देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

(International Energy Agency- IEA):

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) एक स्वायत्त संगठन है जिसके वर्तमान में 30 सदस्य देश तथा 8 सहयोगी देश है। इसकी स्थापना (वर्ष 1974 में) वर्ष 1973 के तेल संकट के बाद हुई थी

मिशन:

  • सभी के लिये भविष्य में सुरक्षित और स्थायी ऊर्जा की उपलब्धता हो। 

सदस्यता:

  • IEA की सदस्यता के लिये उम्मीदवार देश को OECD का सदस्य होना आवश्यक है। इसके अलावा देश को अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति करना करना आवश्यक है।
  • भारत को वर्तमान में सहयोगी सदस्य के रूप में मान्यता दी गई है।
  • वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक’ (World Energy Outlook- WEO) रिपोर्ट ‘अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ द्वारा जारी की जाती है। 

स्रोत: इंडियन एक्स्प्रेस