IMD ग्रीष्मकालीन पूर्वानुमान 2026 | 01 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी ग्रीष्मकालीन भविष्यवाणी (अप्रैल से जून 2026) जारी की है। इस पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वी, मध्य, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप के अधिकांश हिस्सों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है, साथ ही देश भर में न्यूनतम (रात के समय) तापमान में भी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
IMD के ग्रीष्मकालीन पूर्वानुमान 2026 की मुख्य बातें क्या हैं?
- हीटवेव प्रवृत्ति: भारत में सामान्य से अधिक हीटवेव (लू) के दिनों की संभावना है, विशेषकर पूर्वी, मध्य, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप में।
- तापमान का पैटर्न: पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत, मध्य भारत के पूर्वी हिस्सों और उससे सटे प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जबकि अधिकांश अन्य क्षेत्रों में तापमान सामान्य से लेकर सामान्य से कम रह सकता है।
- उत्तर भारत अपवाद: अन्य क्षेत्रों की तुलना में इस बार उत्तर भारत में सामान्य से कम गर्मी रहने की संभावना है, जो तापमान पैटर्न में क्षेत्रीय अंतर को दर्शाता है।
- हीटवेव संभावित क्षेत्र: ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी, आंध्र प्रदेश तथा गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में विशेष रूप से अप्रैल महीने में हीटवेव (लू) आने की संभावना है।
- पश्चिमी विक्षोभ: बढ़े हुए पश्चिमी विक्षोभों के कारण भारत में अप्रैल माह में सामान्य से लगभग 12% अधिक वर्षा होने की संभावना है।
- पश्चिमी विक्षोभों की अधिक आवृत्ति ने वर्षा में वृद्धि करने तथा तापमान को नियंत्रित/संतुलित रखने में योगदान दिया है।
- अल नीनो की चिंता: जुलाई तक 'अल नीनो' विकसित होने की संभावना है, जिसका मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- तुलनात्मक रूप से कम गर्मी की स्थिति में का तापमान कम रह सकता है, जिससे मानसून के आगमन और उसकी शुरुआती प्रगति पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है।
- सामान्य से कम गर्मी होने पर भूमि का तापमान कम रह सकता है, जिससे मानसून के आने और उसकी शुरुआती प्रगति पर असर पड़ने की संभावना होती है।
हीटवेव क्या है?
- परिचय: हीटवेव वह स्थिति होती है, जब किसी क्षेत्र में सामान्य मौसम की तुलना में तापमान असामान्य रूप से अधिक हो जाता है।
- भारत में ये घटनाएँ मुख्य रूप से मार्च और जून के बीच (जिनका चरम मई में होता है) होती हैं।
- अपने गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों के बावजूद, आपदा प्रबंधन (DM) अधिनियम, 2005 के तहत हीटवेव को आधिकारिक तौर पर प्राकृतिक आपदा के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है।
- हीटवेव की तीव्रता और आवृत्ति भौगोलिक और जलवायु संबंधी कारकों के अनूठे संयोजन से प्रभावित होती है।
- हीटवेव घोषित करने के लिये IMD के मापदंड:
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क्षेत्र/स्थिति |
हीटवेव |
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मैदान |
अधिकतम तापमान ≥ 40°C |
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पहाड़ी क्षेत्र |
अधिकतम तापमान ≥ 30°C |
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तटीय स्टेशन |
जब अधिकतम तापमान में सामान्य से 4.5°C या उससे अधिक का अंतर हो और साथ ही वास्तविक अधिकतम तापमान 37°C या उससे अधिक हो। |
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सामान्य से विचलन पर आधारित |
हीटवेव: सामान्य से विचलन 4.5°C से 6.4°C है। गंभीर हीटवेव: सामान्य से विचलन > 6.4°C है। |
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वास्तविक अधिकतम तापमान पर आधारित |
हीटवेव: जब वास्तविक अधिकतम तापमान ≥ 45°C हो। गंभीर हीटवेव: जब वास्तविक अधिकतम तापमान ≥ 47°C हो। |
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स्थानिक एवं कालिक स्थिति |
किसी क्षेत्र को हीटवेव की स्थिति घोषित करने के लिये आवश्यक है कि किसी मौसमीय उपखंड में कम-से-कम दो केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक निर्धारित मानदंड पूरे हों। |
- भौगोलिक कारक:
- अक्षांश और सौर आपतन: कर्क रेखा के निकट के क्षेत्रों (जैसे– तेलंगाना और आंध्र प्रदेश) में गर्मियों के दौरान तीव्र, लगभग ऊर्ध्वाधर सौर विकिरण होता है, जिससे तापमान में तीव्र वृद्धि होती है।
- भूभाग और मृदा के प्रकार: चट्टानी परिदृश्य (जैसे– दक्कन का पठार) और काली मृदा अन्य सतहों की तुलना में अधिक समय तक ऊष्मा को अवशोषित और बनाए रखती हैं। इसके विपरीत, सघन वनस्पति या सिंचाई वाले क्षेत्र वाष्पोत्सर्जन के कारण ठंडे रहते हैं।
- जल निकाय से निकटता: स्थलरुद्ध क्षेत्र अधिक लू के जोखिम का सामना करते हैं क्योंकि उनमें बड़े जल निकायों (जो तटीय क्षेत्रों की रक्षा करते हैं) द्वारा प्रदान किये जाने वाले मध्यम, वाष्पीकरणीय शीतलन प्रभाव का अभाव होता है।
- शहरी ऊष्मा द्वीप: शहरों में सघन आबादी, कंक्रीट/डामर की सतहों और हरियाली की कमी के कारण गर्मी बनी रहती है, जिससे शहर चरम तापमान के स्थानीय केंद्र बन जाते हैं।
- जलवायु संबंधी कारक:
- आर्द्रता और मेघों का आवरण: पूर्व-मानसूनी वर्षा की कमी मृदा को शुष्क करती है, जिससे वाष्पोत्सर्जन से होने वाली ठंडक काफी कम हो जाती है।
- न्यूनतम मेघ आवरण अनियंत्रित सौर विकिरण को सतह तक पहुँचने देता है। इसके अतिरिक्त उच्च आर्द्रता मानव पसीने के वाष्पीकरण को कठिन बना देती है, जिससे "हीट इंडेक्स" खतरनाक रूप से बढ़ जाता है।
- पवन और दाब: कमज़ोर पवनें और स्थिर वायुमंडलीय स्थितियाँ (जैसे– तापमान व्युत्क्रमण) गर्मी को ज़मीन के पास रोके रखती हैं।
- उच्च दाब प्रणालियाँ (प्रति-चक्रवाती प्रवाह) शुष्क पवन और स्वच्छ आसमान का कारण बनती हैं, जो सतह के तापन को बढ़ाती हैं।
- वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाएँ: अल नीनो मानसूनी पवनों को कमज़ोर करता है, जिससे मेघों का आवरण और वर्षा कम हो जाती है, जो मृदा को शुष्क कर देता है और लू के लिये वातावरण तैयार करता है।
- क्षेत्रीय रूप से "लू" - एक प्रचंड, गर्म और धूल भरी ग्रीष्मकालीन पवन - सीधे तापमान को बढ़ा देती है।
- आर्द्रता और मेघों का आवरण: पूर्व-मानसूनी वर्षा की कमी मृदा को शुष्क करती है, जिससे वाष्पोत्सर्जन से होने वाली ठंडक काफी कम हो जाती है।
लू और न्यूनतम तापमान में वृद्धि के प्रभाव:
- सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट: गर्म रातें और लंबे समय तक दिन का तापमान, विशेष रूप से कमज़ोर आबादी (बुज़ुर्ग, बच्चे और बाहर काम करने वाले गिग वर्कर) के बीच, हीट एक्सहॉशन, हीटस्ट्रोक और हृदय संबंधी तनाव के जोखिम को बढ़ाते हैं।
- "हीट वॉच 2024" रिपोर्ट के अनुसार, मार्च और जून के बीच 17 भारतीय राज्यों में 733 हीटस्ट्रोक से मौतें दर्ज की गईं।
- कृषि संबंधी तनाव: अत्यधिक गर्मी फसलों की परिपक्वता को तेज़ कर सकती है जिससे विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में रबी फसलों (जैसे– गेहूँ) की उपज कम हो जाती है।
- जल की कमी: त्वरित वाष्पीकरण दर और बढ़ी हुई जल की खपत जलाशयों और भूजल स्तरों को कम कर सकती है।
- आर्थिक क्षति: अत्यधिक गर्मी विशेष रूप से निर्माण और कृषि क्षेत्रों में श्रम उत्पादकता को प्रभावित करती है। ठंडक के लिये बढ़ती ऊर्जा की मांग ऊर्जा ग्रिड पर भी दबाव डालती है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: भारत वन सर्वेक्षण के अनुसार, देश के वन आवरण के 36% से अधिक भाग में बार-बार वनों में आग लगने की आशंका है। बढ़ती गर्मी से अग्नि की घटनाएँ बढ़ती हैं, जिससे पारिस्थितिक तंत्र और आस-पास की बस्तियों को नुकसान पहुँचता है।
लू से निपटने के लिये भारतीय पहलें
- हीट एक्शन प्लान (HAP): डेटा, भेद्यता मानचित्रण और समन्वित प्रतिक्रिया रणनीतियों का उपयोग करने वाली राज्य-स्तरीय योजनाएँ।
- IMD चेतावनी प्रणाली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) शीघ्र कार्रवाई के लिये कलर-कोडेड हीट अलर्ट जारी करते हैं।
- जलशक्ति अभियान: गर्मी के तनाव से निपटने के लिये जल संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना।
- स्मार्ट सिटी मिशन: हरित आवरण, जलवायु-लचीली योजना और शहरी शीतलन स्थानों को बढ़ावा देना।
- कूल रूफ पहलें: इन पहलों में इनडोर हीट को कम करने के लिये परावर्तक सामग्री का उपयोग होता है; कई राज्यों में इन पहलों को अपनाया गया।
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कलर कोड |
अलर्ट |
चेतावनी |
प्रभाव |
सुझाए गए उपाय |
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ग्रीन (कोई कार्रवाई नहीं) |
सामान्य दिन |
अधिकतम तापमान सामान्य के करीब रहता है। |
आरामदायक तापमान। किसी विशेष सावधानी की आवश्यकता नहीं है। |
कोई नहीं |
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येलो अलर्ट (अपडेट रहें) |
हीटवेव का अलर्ट |
अलग-अलग क्षेत्रों में हीटवेव की स्थिति 2 दिनों तक बनी रहती है। |
मध्यम तापमान। आम जनता हेतु गर्मी सहनीय है, लेकिन कमज़ोर लोगों (जैसे– शिशु, बुज़ुर्ग, बीमार) के लिये मध्यम स्वास्थ्य चिंता का विषय है। |
(क) धूप के सीधे संपर्क से बचें। (ख) हल्के वज़न के, हल्के रंग के, ढीले सूती कपड़े पहनें। (ग) अपना सिर ढकें: कपड़े, टोपी या छाते का प्रयोग करें। |
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ऑरेंज अलर्ट (तैयार रहें) |
दिन के लिये गंभीर हीटवेव का अलर्ट |
(i) गंभीर लू की स्थिति 2 दिनों तक बनी रहती है। (ii) भले ही गंभीर न हो, लेकिन हीटवेव की स्थिति 4 दिन या उससे अधिक समय तक बनी रहती है। |
उच्च तापमान। उन लोगों में गर्मी से होने वाली बीमारियों के लक्षण बढ़ने की संभावना, जो लंबे समय तक धूप में रहते हैं या भारी काम करते हैं। कमज़ोर लोगों के लिये उच्च स्वास्थ्य चिंता। |
(क) धूप से बचें– ठंडा रहें। निर्जलीकरण से पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें- भले ही प्यास न लगी हो। (ग) खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिये ORS और घर के बने पेय, जैसे– लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें। |
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रेड अलर्ट (कार्रवाई करें) |
दिन के लिये अत्यधिक गंभीर हीटवेव का अलर्ट |
(i) गंभीर हीटवेव की स्थिति 2 दिनों से अधिक समय तक बनी रहती है। (ii) लू/गंभीर हीटवेव के दिनों की कुल संख्या 6 दिनों से अधिक हो जाती है। |
सभी उम्र के लोगों में गर्मी से होने वाली बीमारी और 'हीटस्ट्रोक' विकसित होने की बहुत अधिक संभावना। |
कमज़ोर लोगों के लिये अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता है। |
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: हीटवेव्स को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत आपदा के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। इसके निर्देशों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. IMD के अनुसार हीटवेव क्या है?
हीटवेव असामान्य रूप से उच्च तापमान की अवधि होती है, जिसे निर्धारित मानकों के आधार पर घोषित किया जाता है, जैसे– मैदानी क्षेत्रों में तापमान ≥40°C या सामान्य से +4.5°C या उससे अधिक विचलन।
2. क्या भारत में हीटवेव को आपदा के रूप में वर्गीकृत किया गया है?
नहीं, हीटवेव को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आधिकारिक रूप से अधिसूचित आपदा के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है।
3. भारतीय जलवायु में अल नीनो की क्या भूमिका है?
अल नीनो मानसूनी पवनों को प्रभावित करता है, जिससे प्रायः वर्षा में कमी और हीटवेव की स्थितियों में वृद्धि होती है।
4. हीट एक्शन प्लान (HAP) क्या हैं?
HAP राज्य/शहर स्तर की रणनीतियाँ हैं, जिनमें प्रारंभिक चेतावनी, तैयारी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय शामिल होता है, ताकि हीटवेव के प्रभाव को कम किया जा सके।
5. रात का बढ़ता तापमान चिंता का विषय क्यों है?
जब रातें अधिक उष्ण होती हैं, तो शरीर दिन भर के तापीय तनाव से राहत नहीं पा पाता, जिससे स्वास्थ्य जोखिम, मृत्यु दर और ऊर्जा मांग (जैसे– कूलिंग) में वृद्धि होती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न. वर्तमान में और निकट भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में भारत की संभावित सीमाएँ क्या हैं? (2010)
- उपयुक्त वैकल्पिक प्रौद्योगिकियाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
- भारत अनुसंधान एवं विकास में अधिक धन का निवेश नहीं कर सकता है।
- भारत में अनेक विकसित देशों ने पहले ही प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग स्थापित कर लिये हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
मेन्स
प्रश्न. संसार के शहरी निवास-स्थानों में ताप द्वीपों के बनने के कारण बताइये। (2013)