हरिकेन : क्या, कब, कहाँ और कैसे ? | 09 Sep 2017

हरिकेन क्या है?

हरिकेन एक प्रकार का तूफान है, जिसे “उष्णकटिबंधीय चक्रवात” (tropical cyclone) कहा जाता है| उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में हरिकेन सबसे अधिक शक्तिशाली एवं विनाशकारी तूफान होते हैं| उष्णकटिबंधीय चक्रवात उष्णकटिबंधीय अथवा उप-उष्णकटिबंधीय जल के ऊपर बनने वाली निम्न दाब युक्त मौसम प्रणाली में घूर्णन करते हैं| इनसे आँधियाँ तो आती हैं परन्तु वाताग्रों (भिन्न घनत्वों के दो भिन्न वायुभारों को पृथक करने वाली सीमा) का निर्माण नहीं होता है|

इनकी उत्पत्ति कहाँ होती है?

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति अटलांटिक बेसिन में होती है| अटलांटिक बेसिन के अंतर्गत अटलांटिक महासागर, कैरिबियाई समुद्र, मैक्सिको की खाड़ी, पूर्वी उत्तर प्रशांत महासागर और कभी-कभी केंद्रीय उत्तरी-प्रशांत महासागर को भी शामिल किया जाता है|

इनकी उत्पत्ति कैसे होती है?

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात ऐसे इंजनों के समान होते हैं जिनके संचालन के लिये ईंधन के रूप में गर्म, नमीयुक्त वायु की आवश्यकता होती है| 
  • इसका कारण यह है कि इनका निर्माण केवल ऐसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होता है जहाँ सतह से नीचे कम से कम 50 मीटर (165 फीट) की गहराई पर महासागर का तापमान 80 डिग्री फारेनहाइट (27 डिग्री सेल्सियस) होता है|
  • जब महासागर के ऊपर हवा पश्चिम दिशा की ओर चलती है तो जल वाष्पित होकर ऊपर उठने लगता है, जिससे क्यूम्यलोनिम्बस बादलों (cumulonimbus clouds) का निर्माण होता है| 
  • इसके पश्चात् उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती है|
  • यह प्रक्रिया निम्नलिखित चार चरणों से होकर गुजरती है- 

→ उष्णकटिबंधीय अवरोध से शुरुआत
→ उष्णकटिबंधीय अवसाद 
→ उष्णकटिबंधीय तूफान, जो कि अंततः चक्रवात में बदल जाता है| 

  • 25-38 मील/घंटा (40-60 km/h) की रफ्तार पर यह अवरोध अवसाद में बदल जाता है, जैसे ही इनकी गति 39 m/h से अधिक हो जाती है, यह तूफ़ान में परिवर्तित हो जाते है| जब इस तूफान की गति 74 m/h (120 km/h) हो जाती है तो इसे आधिकारिक रूप से “चक्रवात” (cyclone) का नाम दे दिया जाता है| 

श्रेणियाँ

  • जब किसी तूफान की अधिकतम गति 74 m/h होती है तो उसे “हरिकेन” कहा जाता है|
  • हरिकेन की तीव्रता को ‘सैफिर-सिंपसन हरिकेन विंड स्केल’ (saffir-simpson hurricane wind scale) से मापा जाता है| इस स्केल में हवा की अधिकतम टिकाऊ गति के आधार पर हरिकेनों को निम्नलिखित पाँच श्रेणियों में विभक्त किया गया है-

→ श्रेणी 1 : गति 74-95 m/h (120-153 km/h)
→ श्रेणी 2 : गति 96-110 m/h (155-177 km/h)
→ श्रेणी 3 : गति 111-129 m/h (179-208 km/h)
→ श्रेणी 4 : गति 130-156 m/h (209-251 km/h)
→ श्रेणी 5 : गति 157 m/h (253 km/h)

  • उत्तर-पूर्वी कैरिबियाई द्वीप का अब तक का सबसे शक्तिशाली हरिकेन “इरमा” था| ध्यातव्य है कि तकरीबन 24 घंटों तक इस तूफान की हवा की गति 185 m/h (तकरीबन 300 km/h) रही, जो इस विनाशकारी चक्रवात की गंभीरता का एक प्रमाण मात्र है| 

हरिकेन कब-कब आते हैं?

  • कैरिबियाई सागर में तथाकथित “हरिकेन मौसम” (hurricane season) की शुरुआत 1 जून से होती है और इसका अंत 30 नवंबर तक होता है| यद्यपि इस समय-सीमा के पूर्व और पश्चात् भी हरिकेन आ सकते हैं| 
  • अटलांटिक बेसिन में प्रतिवर्ष औसतन 12 हरिकेनों का विकास होता है| 
  • अमेरिका के वाणिज्य विभाग के राष्ट्रीय महासागर और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) विश्व की सबसे आधुनिकतम हरिकेन अन्वेषण प्रणाली (hurricane observation system) है, जिसके माध्यम से इन तूफानों के आने की भविष्यवाणी व इनकी जाँच की जाती है|

इनका नामकरण कैसे होता है?

  • हरिकेन को छोटे, विशिष्ट और आसानी से याद रखने योग्य नाम दिये जाते हैं| ऐसा इसलिये किया जाता है, क्योंकि इससे इनकी पहचान करना और इनका वर्णन करना तथा सैकड़ों स्टेशनों, तटीय बेसों और समुद्र में मौजूद जहाज़ों तक इनके आने की सूचना देना आसान हो जाता है| 
  • संयुक्त राष्ट्र के एक विशिष्ट संगठन ‘विश्व मौसम संगठन’ (world metereological organisation-WMO) द्वारा विश्व के प्रत्येक उष्णकटिबंधीय चक्रवात बेसिन में आने वाले चक्रवातों के लिये नामों की छह सूचियाँ तैयार की जाती हैं|
  • अतः वर्ष 2017-22 के मध्य प्रत्येक वर्ष आने वाले चक्रवातों के लिये 21 नामों का निर्धारण किया गया है| यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्ष 2017 की सूची का वर्ष 2023 में पुनः उपयोग किया जाएगा|
  • यदि कोई चक्रवात मृत (जैसे- 1992 में एंड्रू, 2005 में कैटरीना अथवा 2012 में सैंडी) हो चुका है तो इसके नाम को ‘सेवानिवृत्त’ कर इसे नया नाम दे दिया जाता है| 
  • यदि किसी एक मौसम में 21 से अधिक तूफान आते हैं तो इन तूफानों का नाम ग्रीक वर्णमाला के आधार पर रखा जाता है, जैसे- अल्फा, बीटा, गामा आदि| 
  • वर्ष 2017 के लिये विश्व मौसम संगठन द्वारा बनाई गई सूची के आधार पर कैरिबियाई सागर, मैक्सिको की खाड़ी और उत्तरी अटलांटिक में हार्वे और इरमा के पश्चात् आने वाले तूफानों को जोस (jose), केटिया (katia) और ली (lee) आदि नाम दिये गए हैं|