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गुजरात का आतंकवाद निरोधक अधिनियम (GCTOC) | 07 Dec 2019 | आंतरिक सुरक्षा

प्रीलिम्स के लिये:

गुजरात का आतंकवाद निरोधक अधिनियम, महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, आतंकवादी कृत्य की परिभाषा

मेन्स के लिये:

गुजरात का आतंकवाद निरोधक अधिनियम तथा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम में अंतर, आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से इस प्रकार के अधिनियमों की आवश्यकता एवं महत्त्व

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रपति की मंज़ूरी के साथ गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण (Gujarat Control of Terrorism and Organised Crime- GCTOC) अधिनियम 1 दिसंबर, 2019 से प्रवर्तित हो गया है।

MCOCA से अधिक व्यापक है यह अधिनियम

यह आतंकवाद निरोधक अधिनियम, जिसे तीन राष्ट्रपतियों ने राज्य को वापस भेज दिया था, दो उल्लेखनीय अंतरों के साथ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (Maharashtra Control of Organised Crime Act- MCOCA) से अत्यधिक प्रेरित है। GCTOC तथा MCOCA के बीच ये दो प्रमुख अंतर हैं:

ये दो अंतर GCTOCA को MCOCA की तुलना में अधिक कठोर और व्यापक बनाते हैं।

MCOCA में अवरोधन

(Interception in MCOCA)

कॉल का अवरोधन कौन कर सकता है?

GCTOCA अधिक शक्तिशाली कैसे है?

‘आतंकवादी कृत्य’ की परिभाषा

गुजरात के अधिनियम से संबंधित विभिन्न तर्क

  1. पहला नियंत्रण प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के रूप में है जिसे SP या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी द्वारा ही दर्ज किया जा सकता है। सामान्यतः यदि FIR दर्ज करने की शक्ति किसी उप-निरीक्षक या निरीक्षक-स्तर के अधिकारी को दी जाती है तो इसके दुरुपयोग की संभावना रहती है।
  2. दूसरा, यदि मान लिया जाए कि प्राथमिकी एक राजनीतिक मंशा के साथ दर्ज की गई है तब भी यह प्रावधान मौजूद है कि आरोप पत्र प्रस्तुत करने के बाद न्यायालय के संज्ञान लेने से पहले राज्य सरकार से मंज़ूरी प्राप्त करना आवश्यक है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस