भारत में कृषि ऋण माफी | 13 Mar 2026
प्रिलिम्स के लिये: भारतीय रिज़र्व बैंक, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA), प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना।
मेन्स के लिये: भारत में कृषि संकट और किसानों की ऋणग्रस्तता, कृषि ऋण माफी का राज्य वित्त पर राजकोषीय प्रभाव, बैंकिंग क्षेत्र और ऋण संस्कृति पर ऋण माफी का प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
महाराष्ट्र सरकार ने ₹35,000 करोड़ की ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान ऋण माफी योजना’ की घोषणा की है, जिससे ऋण अनुशासन, राजकोषीय स्थिरता तथा कृषि वित्त की दीर्घकालिक सेहत पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
- यह पिछले एक दशक में महाराष्ट्र की तीसरी कृषि ऋण माफी है, जिसके अंतर्गत 30 सितंबर, 2025 तक बकाया फसल ऋणों में ₹2 लाख तक की छूट दी जाएगी तथा नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को ₹50,000 तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
- यह कदम भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और विशेषज्ञ समितियों द्वारा दी गई बार-बार की चेतावनियों के बावजूद उठाया गया है कि बार-बार ऋण माफी से ग्रामीण ऋण संस्कृति प्रभावित हो सकती है।
सारांश
- कृषि ऋण माफी संकटग्रस्त किसानों को अल्पकालिक राहत प्रदान करती है, जिससे वे ऋण जाल से निकलने में सक्षम होते हैं और ग्रामीण मांग को भी बढ़ावा मिलता है; किंतु बार-बार दी जाने वाली ऋण माफी ऋण अनुशासन को कमज़ोर करती है, बैंकों के NPA को बढ़ाती है और राज्य के वित्त पर दबाव डालती है।
- दीर्घकालिक समाधान संरचनात्मक सुधारों में निहित हैं, जैसे– प्रत्यक्ष आय सहायता, सशक्त फसल बीमा, बेहतर कृषि अवसंरचना, उन्नत बाज़ार पहुँच तथा किफायती संस्थागत ऋण व्यवस्था, न कि बार-बार दी जाने वाली ऋण माफी।
भारत में कृषि ऋण माफी का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
- कृषि ऋण माफी: कृषि ऋण माफी वह सरकारी उपाय है जिसमें राज्य सरकार किसानों के कृषि ऋणों का भुगतान बैंकों और वित्तीय संस्थानों को कर देती है।
- इसे फसल विफलता, प्राकृतिक आपदाओं या कीमतों में गिरावट के कारण उत्पन्न कृषि संकट के समय राहत के उपाय के रूप में उपयोग किया जाता है।
- कृषि ऋण माफी के प्रकार:
- पूर्ण (ब्लैंकेट) छूट: सरकार सभी किसानों के लिये बकाया ऋण की पूरी राशि को समाप्त कर देती है, चाहे ऋण की राशि या भूमिधारण (लैंड होल्डिंग) का आकार कुछ भी हो। भारी राजकोषीय बोझ के कारण इसका उपयोग बहुत कम किया
- आंशिक ऋण माफी: ऋण केवल एक निश्चित सीमा तक ही माफ किया जाता है (उदाहरण के लिये, प्रति किसान ₹1-2 लाख)। इस सीमा से अधिक की राशि किसान को चुकानी होगी।
- लक्षित माफी: राहत केवल विशिष्ट वर्गों तक सीमित होती है, जैसे– लघु एवं सीमांत किसान, आपदा-प्रभावित क्षेत्रों के किसान या केवल कुछ विशेष प्रकार के ऋण, मुख्यतः– अल्पकालिक फसल ऋण।
- ब्याज माफी: केवल ऋण पर लगने वाले ब्याज या दंडात्मक ब्याज को माफ किया जाता है जबकि मूलधन राशि का भुगतान किसान को करना पड़ता है।
- केंद्रीय पहल: पहली बड़ी राष्ट्रव्यापी ऋण माफी कृषि और ग्रामीण ऋण राहत योजना (ARDRS), 1990 थी, जिसमें प्रति किसान 10,000 रुपये तक की राहत प्रदान की गई थी (उस समय इसकी लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये थी)।
- इसके बाद कृषि ऋण माफी एवं ऋण राहत योजना (ADWDRS), 2008 लागू की गई, जिसकी लागत लगभग 52,500 करोड़ रुपये थी और जिसका उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों (5 एकड़ तक भूमि रखने वाले) को अधिक राहत प्रदान करना था।
- राज्य के नेतृत्व में वृद्धि: वर्ष 2014-15 के बाद से यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से राज्य सरकारों की ओर स्थानांतरित हो गई है।
- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्य सरकारों ने कुल मिलाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये (2016-17 की GDP का लगभग 1.4%) के ऋण माफी की घोषणा की है।
- कुल व्यय: विगत 35 वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर विभिन्न कृषि ऋण माफी योजनाओं पर लगभग 3 लाख करोड़ रुपये की राशि व्यय की है।
बढ़ती कृषि ऋण माफी के क्या निहितार्थ हैं?
सकारात्मक पक्ष
- त्वरित वित्तीय राहत: फसल खराब होने, सूखे या अचानक कीमतों में गिरावट के कारण संकट का सामना कर रहे किसानों को त्वरित सहायता प्रदान करती है।
- ऋण जाल से उन्मुक्ति: संस्थागत ऋणों के बकाए का निपटान किसानों को अगले फसल चक्र के लिये पुनः नया ऋण प्राप्त करने की पात्रता प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।
- ग्रामीण मांग को बढ़ावा: ऋण भुगतान में कमी से अस्थायी रूप से प्रयोज्य आय और ग्रामीण उपभोग में वृद्धि होती है।
- मनोवैज्ञानिक राहत: वर्ष 2023 में, कृषि क्षेत्र से संबद्ध 10,700 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की, जिसका मुख्य कारण वित्तीय संकट और संबंधित दबाव थे।
- कृषि ऋण माफी से ऋण के मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलती है, जो गंभीर कृषि संकटों में ऋण से जुड़ी कृषक आत्महत्याओं को कम करने में सहायक हो सकती है।
नकारात्मक पक्ष
- ऋण संस्कृति पर दुष्प्रभाव: जब ऋण माफी की घोषणा की जाती है या उसकी संभावना बनती है, तब ईमानदार किसान भी अपने ऋण का पुनर्भुगतान रोक देते हैं, इस आशा में कि उनका ऋण भी माफ कर दिया जाएगा।
- इससे ऋण अनुशासन कमज़ोर होता है तथा रणनीतिक, जानबूझकर की गई चूक को बढ़ावा मिलता है।
- अनर्जक आस्तियों (NPA) में वृद्धि: जैसे-जैसे ऋणों का पुनर्भुगतान रुकता है, बैंकों पर खराब ऋणों का बोझ बढ़ता जाता है।
- मार्च 2019 तक कृषि क्षेत्र से संबंधित सकल अनर्जक आस्तियाँ (Gross NPAs) चिंताजनक स्तर 8.44% तक पहुँच गई थीं। आँकड़े दर्शाते हैं कि जिन राज्यों ने वर्ष 2017–18 और 2018–19 में ऋण माफी की घोषणा की, वहाँ लगभग सभी में NPAs में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- परिणामस्वरूप, बैंक अत्यधिक जोखिम से बचने लगते हैं और किसानों को उनकी अगली फसल के लिये नए ऋण जारी करने में संकोच करते हैं।
- राजकोषीय संकट: RBI के आंतरिक कार्यसमूह (2019) ने पाया कि ऋण माफी हेतु राज्य सरकारों को अपने बजट से एक बड़ा हिस्सा (GSDP का 0.1% से 1.8% तक) व्यय करना पड़ता है।
- इससे कृषि अवसंरचना (जैसे–सिंचाई, शीत भंडारण और ग्रामीण सड़कें) में उत्पादक पूंजीगत व्यय के लिये उपलब्ध राजकोषीय संसाधन सीमित हो जाते हैं, जो कि दीर्घकाल में किसानों की आय में स्थायी वृद्धि की संभावना रखते हैं।
- कमज़ोर लक्ष्यीकरण और कार्यान्वयन: SBI के शोध के अनुसार वर्ष 2014 और 2022 के बीच 50% पात्र किसानों को ही घोषित ऋण माफी का वास्तविक लाभ प्राप्त हुआ।
- इसके अतिरिक्त, पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन जैसे विशेषज्ञों ने इंगित किया है कि इन योजनाओं का लाभ प्रायः उन किसानों को मिलता है जो औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तक पहुँच रखते हैं, जबकि भूमिहीन श्रमिक तथा अत्यंत गरीब किसान, जो सामान्यतः अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भर रहते हैं, इससे वंचित रह जाते हैं।
- राजनीतिक साधन, स्थायी समाधान नहीं: ऋण माफी केवल एक अल्पकालिक राहत प्रदान करती है। यह एक मौसम के लिये किसानों को राहत दे सकती है, परंतु अगले वर्ष वे पुनः उन्हीं बाज़ार तथा जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशील बने रहते हैं।
- चूँकि अधिकांश ऋण माफी योजनाएँ चुनावों के आसपास घोषित की जाती हैं (वर्ष 2014 के बाद घोषित राज्य स्तरीय ऋण माफी योजनाओं में से 10 में से 8 योजनाएँ चुनाव परिणामों की घोषणा के 90 दिनों के भीतर घोषित की गईं), इसलिये इन्हें प्रायः राजनीतिक उपकरण के रूप में देखा जाता है, न कि वास्तविक आर्थिक समाधान के रूप में।
- निजी निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव: सरकार द्वारा अधिक उधारी लेने से ब्याज दरों में वृद्धि होती है, जिसके परिणामस्वरूप निजी क्षेत्र के लिये उपलब्ध ऋण तथा निवेश के अवसर सीमित हो जाते हैं।
कृषि ऋण माफी के विकल्प क्या हैं?
- किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता: एकमुश्त ऋण माफी के स्थान पर किसानों को नियमित आय हस्तांतरण प्रदान किया जाए।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएँ पूर्वानुमेय आय सहायता सुनिश्चित करती हैं और किसानों के व्यापक वर्ग तक पहुँच बनाती हैं।
- फसल बीमा को सुदृढ़ बनाना: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत कवरेज और समय पर भुगतान में सुधार किया जाए। बीमा किसानों को सूखा, बाढ़, कीट या अत्यधिक मौसमीय घटनाओं के कारण होने वाली फसल क्षति से सुरक्षा प्रदान करता है।
- कृषि अवसंरचना में निवेश: सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग और ग्रामीण रसद/लॉजिस्टिक्स में सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाए। बेहतर अवसंरचना से कटाई के बाद होने वाले नुकसान कम होते हैं और कृषि उत्पादकता में सुधार होता है।
- बाज़ार तक पहुँच और मूल्य प्राप्ति में सुधार: पारदर्शी बाज़ार पहुँच के माध्यम से किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने हेतु e-NAM जैसे प्लेटफॉर्म को सुदृढ़ किया जाए। किसानों की आय बढ़ाने के लिये मूल्य शृंखलाओं और खाद्य प्रसंस्करण का विस्तार किया जाए।
- सुलभ तथा किफायती संस्थागत ऋण: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं के माध्यम से कम ब्याज दर पर कृषि ऋण की उपलब्धता का विस्तार किया जाना चाहिये। इससे किसानों की उच्च ब्याज दर वाले अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता कम होगी।
- जलवायु-अनुकूल कृषि: सूखा-प्रतिरोधी बीज, सूक्ष्म सिंचाई तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना चाहिये, जिससे किसानों की मौसमी आघातों के प्रति सुभेद्यता कम हो सके।
- ग्रामीण आय का विविधीकरण: डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी तथा कृषि-आधारित प्रसंस्करण गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये, ताकि किसानों की आय केवल एक फसल पर निर्भर न रहे।
- कृषि ऋण संबंधी छूट अल्पकालिक राहत तो प्रदान करती है, लेकिन यह ऋण अनुशासन को कमज़ोर करती है और सार्वजनिक वित्त पर दबाव डालती है। स्थायी समाधानों के लिये ऋण संबंधी छूट के बजाय संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है, जो बेहतर बुनियादी ढाँचे, मज़बूत जोखिम सुरक्षा और बेहतर बाज़ार पहुँच के माध्यम से कृषि आय को बढ़ा सके।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. किसानों को ऋण संबंधी छूट से तत्काल राहत तो मिलती है, किंतु इससे ऋण अनुशासन और राजकोषीय स्थिरता कमज़ोर हो सकती है। समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. कृषि एवं ग्रामीण ऋण राहत योजना (ARDRS), 1990 क्या थी?
कृषि एवं ग्रामीण ऋण राहत योजना सर्वप्रथम राष्ट्रव्यापी कृषि ऋण संबंधी छूट से संबंधित वह योजना थी, जिसने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से लिये गए ऋणों पर प्रति किसान 10,000 रुपये तक की राहत प्रदान की।
2. कृषि ऋण संबंधी छूट एवं ऋण राहत योजना (ADWDRS), 2008 क्या थी?
कृषि ऋण संबंधी छूट एवं ऋण राहत योजना ने कई बैंकिंग संस्थानों से लिये गए कृषि ऋणों में छूट या राहत प्रदान की, जिसमें लघु और सीमांत किसानों के लिये उच्च राहत प्रदान की गई थी।
3. RBI बार-बार कृषि ऋण संबंधी छूट के खिलाफ क्यों आगाह करता है?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने चेतावनी दी है कि बार-बार छूट से ऋण अनुशासन कमज़ोर होता है, कृषि NPA बढ़ता है और बैंक किसानों को नया ऋण देने से हतोत्साहित होते हैं।
4. PM-किसान योजना का उद्देश्य क्या है?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि किसानों की आय को मज़बूत करने के लिये आवधिक नकद हस्तांतरण के माध्यम से प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करती है।
5. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों की कैसे मदद करती है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सूखा, बाढ़, कीट और चरम मौसमी घटनाओं जैसे जोखिमों के खिलाफ फसल बीमा प्रदान करती है, जिससे किसानों को आय के नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न 1. ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ योजना के अंतर्गत, निम्नलिखित में से किन-किन उद्देश्यों के लिये कृषकों को अल्पकालीन ऋण समर्थन उपलब्ध कराया जाता है? (2020)
- फार्म परिसंपत्तियों के रख-रखाव हेतु कार्यशील पूंजी के लिये
- कंबाइन कटाई मशीनों, ट्रैक्टरों एवं मिनी ट्रकों के क्रय के लिये
- फार्म परिवारों की उपभोग आवश्यकताओं के लिये
- फसल कटाई के बाद खर्चों के लिये परिवार के लिये
- घर निर्माण तथा गाँव में शीतागार सुविधा की स्थापना के लिये।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1, 2 और 5
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 3, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. भारतीय कृषि की प्रकृति की अनिश्चितताओं पर निर्भरता के मद्देनज़र, फसल बीमा की आवश्यकता की विवेचना कीजिये और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिये। (2016)