प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षाविद् प्रोफेसर यशपाल का निधन | 26 Jul 2017

संदर्भ
सोमवार सायं नोयडा के एक अस्पताल में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक और एक महान शिक्षाविद् प्रोफेसर यशपाल का निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रोफेसर यशपाल एक वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद् होने के साथ-साथ एक संप्रेषक एवं संस्था निर्माता भी थे। 

जन्म

  • प्रोफेसर यशपाल का जन्म 26 नवंबर 1926 को  झांग (पूर्व अविभाजित पंजाब में) में हुआ था।
  • उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि प्राप्त की थी।    

आत्मनिर्भरता 

  • प्रोफेसर यशपाल वैज्ञानिकों के एक ऐसे युग से थे, जिन्होंने दशकों पहले ‘मेक इन इंडिया’ का समर्थन किया था। 
  • वे वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण के लिये उन्हें अमेरिका भेजने की सलाह से असहमत थे। उनका कहना था कि जिस तरह अमेरिका के वैज्ञानिक स्वयं परिश्रम करके सीखते हैं, उसी तरह भारत के वैज्ञानिकों को भी स्वयं प्रयास करके सीखना चाहिये।  
  • इसी के मद्देनज़र उन्होंने रिमोट सेंसेसिंग टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिये टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ( TIFR ) के युवा वैज्ञानिकों की एक टीम को साथ लेकर इस पर कार्य किया।

विज्ञान में योगदान 

  • उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में एवं कॉस्मिक किरणों, उच्च ऊर्जा भौतिकी, खगोल भौतिकी के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था।
  • उन्होंने ब्रह्मांडीय विकिरणों पर विशेष अध्ययन किया, जिससे उन्हें पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त हुई।
  • 1973 में वे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक बने और संचार एवं प्रौद्योगिकी में अहम् भूमिका निभाई।
  • उन्होंने सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविज़न एक्सपेरिमेंट की नींव रखी। शिक्षा के लिये उपग्रह आधारित प्रणाली के विकास में यह महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

शिक्षा में योगदान  

  • वे 1986 से 1991 तक विश्वविद्यालय अनुसंधान आयोग के अध्यक्ष रहे। 
  • 1993 में उन्हें बोझ बनती बच्चों की शिक्षा विषय पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित पैनल का अध्यक्ष बनाया गया। इस समिति ने ‘बिना बोझ के सीखना’ ( Learning Without Burden) नाम से एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जो आज भी भारतीय शिक्षा पर एक मौलिक दस्तावेज़ है।
  • उसके बाद वे एनसीईआरटी द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा ( 2005 ) के लिये गठित स्टीयरिंग समिति के अध्यक्ष भी रहे।
  • 2009 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के पद पर रहते हुए, भारत में उच्च शिक्षा में सुधार के लिये सुझाव देने के लिये गठित समिति के भी अध्यक्ष रहे।

विज्ञान संप्रेषक 

  • प्रोफेसर यशपाल  आम लोगों के बीच अपने विशेष अंदाज़ के लिये मशहूर थे। वे विज्ञान की बातों को सहज शब्दों में समझाया करते थे। 
  • उन्होंने दूरदर्शन पर एक अत्यंत लोकप्रिय विज्ञान कार्यक्रम “टर्निंग प्वाइंट” (Turning Point) चलाया, जिसमें आकाशगंगाओं और ब्रह्मांडीय किरणों की जानकारी दी जाती थी। इस कार्यक्रम ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। 

सम्मान 

  • विज्ञान एवं शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के कारण भारत सरकार ने उन्हें 1976 में पद्मभूषण से तथा 2013 में भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया। 
  • विज्ञान को बढ़ावा देने एवं लोकप्रिय बनाने के लिये 2009 में उन्हें यूनेस्को (UNESCO) द्वारा कलिंग पुरस्कार से भी नवाज़ा गया।