चीन ने सीमा पर घुसपैठ का विरोध किया। | 28 Jun 2017

संदर्भ
चीन ने भारतीय सैनिकों द्वारा उसकी सीमा में घुसपैठ के कथित आरोपों के कारण नाथुला के रास्ते कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा पर रोक लगा दिया है। उसने भारतीय सैनिकों की घुसपैठ की औपचारिक शिकायत नई दिल्ली से भी की है। 

प्रमुख घटनाक्रम 

  • सैन्य स्रोतों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से सिक्किम सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों  के बीच गतिरोध चल रहा है।  चीन के सैनिकों ने सिक्किम, भूटान एवं तिब्बत के बीच स्थित डोका ला क्षेत्र में स्थित भारतीय सैन्य बंकरों को नष्ट कर दिया है। दोनों पक्ष के सैनिक मानव दीवार बनाकर एक-दूसरे को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। 
  • चीन भारत से इस पर शीघ्र कार्रवाई की माँग कर रहा है। उसने भारत से सीमा पार कर चुके भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने की माँग की है। 
  • दरअसल, भारत और चीन की सीमा के बीच नियंत्रण रेखा (LAC) तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा को लेकर भिन्न मत के कारण इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं। हालाँकि सिक्किम पठार के कुछ-एक इलाकों को छोड़कर सिक्किम की सीमा को लेकर कोई विवाद नहीं है। ऐसी परिस्थितियों के शांतिपूर्ण हल के लिये दोनों देशों के मध्य एक मज़बूत तंत्र बना हुआ है। 
  • भारतीय सुरक्षा तंत्र से जुड़े कुछ लोगों का कहना है, कि कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों को वापस भेजना एक कूटनीतिक संदेश है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। 
  • गौरतलब है कि इस महीने के प्रारम्भ में प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति ज़ी ज़िनपींग के बीच शंघाई सहयोग संगठन की अस्ताना बैठक में सौहार्दपूर्ण भेंट हो चुकी है।  दोनों नेताओं की  अगली भेंट सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के दौरान चीन के तटीय शहर ज़ियामेन में हो सकती है। 
  • चीन के प्रमुख अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने इस घटना को लेकर तीन टिप्पणियाँ की हैं।  ये घटनाएँ ऐसे समय पर हो रही हैं, जब भारत और चीन के मध्य पहले से ही तनाव ज़ारी है।  
  • यह एक चेतावनी है। जिस स्थान पर यह घटना हुई है, उसकी स्थिति भी महत्त्वपूर्ण है।  चीन वहाँ एक सड़क का निर्माण करना चाहता है। भारत के लिये वह सामरिक महत्त्व का स्थान है। यह  स्थल सिलीगुड़ी से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर है। 
  • सिलीगुड़ी को ‘चिकेन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है। 

 कूटनीतिक संदेश 

  • भारतीय सेना के अधिकारी  इस विषय पर चुप हैं। चीन द्वारा नाथुला के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा रोके जाने को कड़ा कूटनीतिक संदेश माना जाना चाहिये। चीन की  पिछली प्रवृत्तियों से पता चलता है कि भारत की तरफ से जब भी कोई उच्च-स्तरीय यात्रा होती है, तो वह ऐसी हरकतें करता है। इस समय भी भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका की यात्रा पर हैं। 

निष्कर्ष 
यह विषय संप्रभुता, क्षेत्रीय एवं रणनीतिक महत्त्व से जुड़ा हुआ है।  इसकी अवहेलना नहीं की जा सकती है। इस तरह की कोई भी घटना सीमा क्षेत्र की शांति एवं स्थायित्व को खतरे में डाल सकती है।