अरुणाचल प्रदेश में चीन के नए गाँव | 25 Jan 2021

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में बुम ला दर्रे से 5 किलोमीटर की दूरी पर चीन द्वारा तीन गाँवों का निर्माण किये जाने की खबरें सामने आई हैं।

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प्रमुख बिंदु:

पिछले वर्ष निर्मित नया गाँव:

  • नवंबर 2020 तक की सैटेलाइट इमेज दर्शाती हैं कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबानसिरी ज़िले में त्सारी चू नदी के तट पर एक पूर्ण विकसित गाँव का निर्माण किया गया है।
    • यह गाँव वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पार कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
    • पहले इस क्षेत्र में चीन ने सैन्य बैरकों का स्थायी निर्माण किया था।
  • यह क्षेत्र वर्ष 1959 से चीन के नियंत्रण में है।
  • यह मैकमोहन रेखा से कम-से-कम 2 किमी. दक्षिण में (भारतीय क्षेत्र में) स्थित है, जिसे चीन मान्यता नहीं देता है। वर्ष 1962 के युद्ध के बाद भारत ने इस क्षेत्र में गश्त बंद कर दी।
    • चीन के अनुसार, वह मैकमोहन रेखा को इसलिये अस्वीकार करता है क्योंकि वर्ष 1914 में शिमला में आयोजित कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने वाले तिब्बती प्रतिनिधियों ने मैकमोहन लाइन को मानचित्र पर दर्शाया था जो कि ऐसा करने के लिये अधिकृत नहीं थे।

असहमति के अन्य स्थान:

  • वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के संपूर्ण क्षेत्र में लगभग दो दर्जन ऐसे स्थान हैं जिनकी स्थिति को लेकर भारत और चीन के बीच आपसी सहमति नहीं है।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC):
  • इसे तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है
    • पूर्वी क्षेत्र जो अरुणाचल प्रदेश व सिक्किम तक फैला है (1346 किमी.)।
    • मध्य क्षेत्र का विस्तार उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में है (545 किमी.)।
    • पश्चिमी क्षेत्र के अंतर्गत लद्दाख आता है (1597 किमी.)।
  • अरुणाचल प्रदेश का मामला:
    • भारत द्वारा किया जाने वाला दावा LAC से अलग है। यह वह रेखा है जिसे सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा जारी नक्शे पर आधिकारिक रूप में दर्शाया गया था तथा इसमें अक्साई चिन (चीन के कब्ज़े में) भी शामिल है। अरुणाचल प्रदेश भारत का एक 'अभिन्न और अविछिन्न' भाग है।
    • चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत के रूप में दावा करता है।

चीन का इरादा:

  • विश्लेषकों ने गाँव के निर्माण को उस क्षेत्र में चीन के दावे को मज़बूत करने के कदम के रूप में देखा है। चीन द्वारा हाल ही में विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक बस्तियों के निर्माण पर ज़ोर दिया गया है। उदाहरण के लिये भूटान से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में भी चीन द्वारा इस प्रकार के निर्माण किये गए हैं।

भारत पर प्रभाव:

  • सुरक्षा संबंधी मुद्दे:
    • सीमा के निकट गाँव की स्थापना करना काफी हद तक चीन के लिये सैन्यकर्मियों और सैन्य सामग्री के परिवहन की क्षमता तथा सीमा क्षेत्र में रसद आपूर्ति की सुविधा को बढ़ाएगा।
    • अरुणाचल प्रदेश की सीमा के आस-पास प्रत्यक्ष गतिरोध की स्थिति में चीन लाभप्रद स्थिति में हो सकता है, जैसा कि डोकलाम या हाल ही में लद्दाख में गतिरोध के दौरान देखा गया था।
      • डोकलाम मुद्दा: दरअसल विवादित स्थान डोलाम पठार पर स्थित है, जिसे भारतीय विदेश मंत्रालय और नई दिल्ली स्थित भूटान के दूतावास के बयानों में डोकलाम क्षेत्र कहा गया है। 
        • डोलाम पठार और डोकलाम पठार अलग-अलग हैं। डोकलाम पठार को लेकर चीन और भूटान के बीच विवाद है, इसकी भारत के साथ संलग्नता नहीं है।  
        • डोकलाम पठार, डोलाम पठार के उत्तर-पूर्व में 30 किमी. दूर स्थित है। डोकलाम को चीनी भाषा मंदारिन में डोंगलांग कहा जाता है। 
        • डोकलाम क्षेत्र कीप (Funnel) के आकार जैसी घाटी के उत्तरी छोर के निकट है, जिसे चुम्बा घाटी कहा जाता है। 
        • यह घाटी चीन के तिब्बत क्षेत्र में फैली है और वहाँ इसका विस्तार चौड़ाई में 54 किमी. तक है, जबकि मुहाने पर इसकी चौड़ाई केवल 11 किमी. है। 
        • यह बटांग ला है, जो गंगटोक के पूर्व में स्थित है। कीप जैसी आकार की चुम्बा घाटी का क्षेत्रफल इसके सिरे से आधार तक कुल 70 किमी. है।

भारत द्वारा हाल ही में उठाए गए कदम:

  • भारत सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (Border Area Development Programme) का 10% धन केवल चीन की सीमा से लगे अपने बुनियादी ढाँचे में सुधार पर खर्च करेगा।
  • सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation) ने अरुणाचल प्रदेश में सुबनसिरी नदी के ऊपर दापोरीजो पुल (Daporijo Bridge) का निर्माण सिर्फ 27 दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया।
    • यह भारत और चीन के बीच LAC तक जाने वाली सड़कों को जोड़ता है।
  • हाल ही में रक्षा मंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग ज़िले में नेचिफु (Nechiphu) में एक सुरंग की नींव रखी।
    • यह सैनिकों को तवांग की तरफ से LAC तक पहुँचने में लगने वाले समय को कम कर देगा, जिसे चीन अपना क्षेत्र बताता है।
  • अरुणाचल प्रदेश में BRO पहले से ही ‘से ला दर्रा’ (Se La Pass) के तहत एक सुरंग का निर्माण कर रहा है जो तवांग को अरुणाचल और गुवाहाटी के बाकी हिस्सों से जोड़ती है।
  • अरुणाचल प्रदेश सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों से शहरी केंद्रों की ओर जनसंख्या के पलायन (विशेष रूप से चीन सीमा के साथ लगे क्षेत्रों से) को रोकने के लिये केंद्र सरकार से पायलट विकास परियोजनाओं की मांग की है।
  • हाल ही में रक्षा मंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के निचली दिबांग घाटी में स्थित सिसेरी नदी पुल (Sisseri River Bridge) का उद्घाटन किया, जो दिबांग घाटी (Dibang Valley) और सियांग (Siang) को जोड़ता है।
  • अरुणाचल प्रदेश के सबसे पूर्वी गाँव विजय नगर (चांगलांग ज़िला) में भारतीय वायु सेना ने वर्ष 2019 में एक रनवे का उद्घाटन किया।
  • भारतीय सेना ने वर्ष 2019 में अपने पहले एकीकृत युद्ध समूह (Integrated Battle Group) के साथ अरुणाचल प्रदेश और असम में 'हिम विजय' (HimVijay) सैन्य अभ्यास किया।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने वर्ष 2018 में असम के डिब्रूगढ़ को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट से जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे सड़क और रेल पुल 'बोगीबील पुल' (Bogibeel Bridge) का उद्घाटन किया था।
    • यह भारत-चीन सीमा के आस-पास के क्षेत्रों में सैनिकों और उपकरणों की त्वरित आवाजाही की सुविधा प्रदान करेगा।

आगे की राह

  • भारत को अपने हितों की रक्षा के लिये सीमा के पास चीन द्वारा किये जाने वाले किसी भी नए विकास से सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसके अलावा इसे अपने सीमा क्षेत्रों में मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की आवश्यकता है ताकि सैन्यकर्मियों और अन्य सैन्य सामानों को यहाँ आसानी से पहुँचाया जा सके।

स्रोत: द हिंदू