विश्व बाल और किशोर स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली | 28 Apr 2022

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), मध्याह्न भोजन योजना, एनीमिया मुक्त भारत अभियान

मेन्स के लिये:

भारत में बाल और किशोर स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली एवं संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में विश्व के बाल और किशोर स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली (Child and Adolescent Healthcare Systems of the World) पर एक सीरीज़ प्रकाशित हुई।

  • चार पत्रों की इस सीरीज़ ने वर्तमान स्थिति को विश्व स्तर पर किये गए लाभ के साथ निर्धारित किया है, जो वैश्विक परिदृश्य में स्पष्ट भिन्नताओं को इंगित करता है, कुछ देशों ने दूसरों की तुलना में अधिक उल्लेखनीय सुधार प्रदर्शित किये हैं।

Child-and-Adolescent-Healthcare-Systems

सीरीज़ के प्रमुख निष्कर्ष:

  • अनुमान के अनुसार, वर्ष 2019 में 28 सप्ताह के गर्भ के दौरान और 20 वर्ष की आयु के बीच 8.62 मिलियन से अधिक मौतें हुईं।
    • इन मौतों में आधे से अधिक हिस्सेदारी मातृ मृत्यु (23%) और नवजात मृत्यु (28%) के मामलों की थी, जबकि इनके अलावा अन्य एक-तिहाई (32%) में एक से पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु शामिल थी।  
    • इन मौतों में से आधे से अधिक मृत्यु जन्म के दौरान (23%) और नवजात शिशुओं  (28%) की थी , जबकि एक तिहाई (32%) मौतें एक महीने से पाँच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों कीं हुईं। 
  • यह बाल मृत्यु दर और रुग्णता में कमी को प्रगति के रूप में दर्ज करता है। 
    • हालाँकि इसमें अत्यधिक असमानताएँ देखी जा सकती हैं, कई बच्चे और किशोर जीवित नहीं बचते क्योंकि इनके लिये कम लागत वाली सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।

महामारी का प्रभाव:  

  • कोविड-19 महामारी के कारण बच्चों कि देखभाल और शिक्षा में जो अंतराल आया है, इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
    • समान और लचीली सेवाओं के पुनर्निर्माण के प्रयास के रूप में बच्चों एवं परिवारों की उभरती ज़रूरतों को पूरा करने हेतु स्वास्थ्य व सामाजिक प्रणालियों को एक साथ काम करने के लिये उचित ढंग से संगठित किया जाना चाहिये।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान बच्चों और परिवारों की \ज़रूरतों को पूरा करने में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है उसे वैश्विक समुदाय के समक्ष चेतावनी के रूप में रेखांकित करते हुए वैश्विक स्तर पर बाल व किशोर स्वास्थ्य एजेंडा को बदलने की तत्काल आवश्यकता है।

सिफारिशें:

  • विखंडित दृष्टिकोण :
    • शृंखला में बच्चों को पालन-पोषण में मदद करने वाली सेवाओं की फिर से कल्पना करने के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि विखंडित दृष्टिकोण केवल कुछ आयु समूहों के लिये खाद्य संकट से निपटने का सबसे अच्छा तरीका नहीं हो सकता है।
  • व्यापक देखभाल की आवश्यकता:
    • जर्नल में पोषण, निवारक स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक और सामुदायिक सहायता, पूर्व की निर्मित अवधारणा से लेकर 20 वर्ष की आयु तक के सभी आयु समूहों को केंद्रित किया गया है।
      • इसमे परिवारों की निकट भागीदारी, विशेष रूप से गर्भावस्था के चरण से ही सहायता प्रदान करने, प्रासंगिक वर्षों के दौरान बच्चे को भोजन उपलब्ध कराने हेतु भी दृढ़तापूर्वक अनुशंसा की गई है। 
  • साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप की आवश्यकता:
    • इसमें पांँच साल से कम उम्र के बच्चों के लिये साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप को बढ़ाने का आह्वान करते हुए स्कूल जाने वाले बच्चों के लिये हस्तक्षेप और बचपन से किशोरावस्था में संक्रमण की अवधि पर प्रकाश डाला गया है।
      • इसमें मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन करने, अनजाने में लगी चोटों, गैर-संचारी रोगों और उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों को दूर करने हेतु सिफारिशें की गई हैं।

भारत द्वारा की गई संबंधित पहलें:

विगत वर्षों के प्रश्न: 

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन से 'राष्ट्रीय पोषण मिशन' के उद्देश्य हैं? (2017)  

  1. गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण के बारे में जागरूकता पैदा करना।
  2. छोटे बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया की घटनाओं को कम करना।
  3. बाजरा, मोटे अनाज और बिना पॉलिश किये चावल की खपत को बढ़ावा देना।
  4. मुर्गी के अंडों की खपत को बढ़ावा देना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 2 और 3
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) केवल 3 और 4

उत्तर: (a)  

  • राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) महिला और बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो आंँगनवाड़ी सेवाओं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, स्वच्छ-भारत मिशन आदि जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के साथ अभिसरण सुनिश्चित करता है।   
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) का लक्ष्य 2017-18 से शुरू होकर अगले तीन वर्षों के दौरान 0-6 वर्ष के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति में समयबद्ध तरीके से सुधार करना है। अतः कथन 1 सही है।
  • एनएनएम का लक्ष्य स्टंटिंग, अल्पपोषण, एनीमिया (छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोर लड़कियों के बीच) को कम करना और बच्चों के जन्म के समय कम वज़न की समस्या को कम करना है। अत: 2 सही है।
  • एनएनएम के तहत बाजरा, बिना पॉलिश किये चावल, मोटे अनाज और अंडों की खपत से संबंधित ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अत: कथन 3 और 4 सही नहीं हैं।

स्रोत: द हिंदू