चारधाम परियोजना | 11 Nov 2021

प्रिलिम्स के लिये: 

चारधाम परियोजना, सीमा सड़क संगठन

मेन्स के लिये:

चारधाम परियोजना से संबंधित पर्यवरणीय मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने भारत-चीन सीमा की ओर जाने वाली ‘चारधाम परियोजना’ (CDP) के तहत सड़कों के विस्तार के सेना के अनुरोध के संदर्भ में पर्यावरण संबंधी मुद्दों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को संतुलित करने की आवश्यकता की बात कही है।

  • यह अनुरोध चीन द्वारा सीमा पार किये जा रहे निर्माण के संदर्भ में आया है। हालाँकि पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा सड़कों के विस्तार का विरोध किया गया है।

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प्रमुख बिंदु

  • चारधाम परियोजना के विषय में:
    • उद्देश्य: चारधाम परियोजना का उद्देश्य हिमालय में चारधाम तीर्थस्थलों (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) के लिये कनेक्टिविटी में सुधार करना है, जिससे इन केंद्रों की यात्रा सुरक्षित, तीव्र और अधिक सुविधाजनक हो सके।
      • यह परियोजना तीर्थ स्थलों और कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग-125) के टनकपुर-पिथौरागढ़ खंड को जोड़ने वाले लगभग 900 किलोमीटर के राजमार्गों को चौड़ा करेगी।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका: यह परियोजना रणनीतिक सड़कों के रूप में कार्य कर सकती है, जो भारत-चीन सीमा को देहरादून और मेरठ में सेना के शिविरों से जोड़ती है, जहाँ मिसाइल बेस और भारी मशीनरी मौजूद हैं।
    • कार्यान्वयन एजेंसियाँ: उत्तराखंड राज्य लोक निर्माण विभाग (PWD), सीमा सड़क संगठन (BRO) और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं बुनियादी अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL)।
      • ‘राष्ट्रीय राजमार्ग एवं बुनियादी अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड’ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है।
  • परियोजना के विषय में पर्यावरण संबंधी चिंताएँ:
    • यह परियोजना 55,000 पेड़ों के साथ लगभग 690 हेक्टेयर वनों को नष्ट कर सकती है और अनुमानित 20 मिलियन क्यूबिक मीटर मिट्टी को प्रभावित कर सकती है।
    • सड़कों के विस्तार में पेड़ों की निर्मम कटाई या वनस्पति को उखाड़ना जैव विविधता और क्षेत्रीय पारिस्थितिकी के लिये भी खतरनाक साबित हो सकता है।
      • कलिज तीतर (लोफुरा ल्यूकोमेलानोस, अनुसूची-I), ट्रैगोपैन (ट्रैगोपन मेलानोसेफालस तथा ट्रैगोपन सत्यरा, अनुसूची-I) और गिद्धों की विभिन्न प्रजातियाँ (अनुसूची- I) जैसी प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं।
    • यद्यपि चारधाम परियोजना और हाल ही में चमोली की ग्लेशियर त्रासदी के बीच कोई संबंध नहीं है, किंतु सड़क निर्माण के दौरान अंधाधुंध विस्फोट से मिट्टी और चट्टानों में दरारें आ जाती हैं जो भविष्य में अचानक बाढ़ की संभावना को बढ़ा सकती हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस