डेली अपडेट्स

गर्भपात संबंधी नियमों में बदलाव | 29 Jan 2020 | सामाजिक न्याय

प्रीलिम्स के लिये:

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम 1971, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) विधेयक, 2020

मेन्स के लिये:

महिला अधिकारों से संबंधित मुद्दे, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वैधानिक रूप से गर्भपात संबंधी नियमों में बदलाव के लिये मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (Medical Termination of Pregnancy- MTP) अधिनियम, 1971 में संशोधन को मंज़ूरी दे दी है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

प्रस्तावित संशोधन की मुख्य बातें

गर्भपात कानून में बदलाव के निहितार्थ

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम (MTP Act) , 1971

वर्तमान गर्भपात कानून लगभग पाँच दशक पुराना है और इसके तहत गर्भपात की अनुमति के लिये गर्भधारण की अधिकतम अवधि 20 सप्ताह निर्धारित की गई है।

a. गर्भावस्था की अवधि 12 सप्ताह से अधिक की नहीं है।
b. गर्भावस्था की अवधि 12 सप्ताह से अधिक है लेकिन 20 सप्ताह से अधिक नहीं है, तो गर्भपात उसी स्थिति में हो सकता है जब दो डॉक्टर ऐसा मानते हैं कि:

1. गर्भपात नहीं किया गया तो गर्भवती महिला का जीवन खतरे में पड़ सकता है, या
2. अगर गर्भवती महिला के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पहुँचने की आशंका हो, या
3. अगर गर्भाधान का कारण बलात्कार हो, या
4. इस बात का गंभीर खतरा हो कि अगर बच्चे का जन्म होता है तो वह शारीरिक या मानसिक विकारों का शिकार हो सकता है जिससे उसके गंभीर रूप से विकलांग होने की आशंका है, या
5. बच्चों की संख्या को सीमित रखने के उद्देश्य से दंपति ने जो गर्भ निरोधक या तरीका अपनाया हो वह विफल हो जाए।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, पी.आई.बी.