असम समझौते की धारा 6 लागू किये जाने की मंज़ूरी | 03 Jan 2019

चर्चा में क्यों?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम समझौते की धारा 6 को लागू करने के लिये एक उच्‍चस्‍तरीय समिति के गठन की मंज़ूरी दी।

पृष्ठभूमि

  • 1979-1985 के दौरान हुए असम आंदोलन के पश्‍चात् 15 अगस्‍त, 1985 को असम समझौते पर हस्‍ताक्षर हुए।
  • समझौते की धारा 6 के अनुसार, असम के लोगों की सांस्‍कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान व विरासत के संरक्षण और उसे प्रोत्‍साहित करने के लिये उचित संवै‍धानिक, विधायी और प्रशासनिक उपाय किये जाएंगे।
  • इसलिये मंत्रिमंडल ने एक उच्‍च स्‍तरीय समिति के गठन को मंज़ूरी दी है जो असम समझौते की धारा 6 के आलोक में संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक  सुरक्षात्‍मक उपायों से संबंधित अनुशंसाएँ करेगी।
  • बोडो समझौते पर 2003 में हस्‍ताक्षर किये गए। इसके परिणामस्‍वरूप भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (Bodoland Territorial Council) का गठन हुआ।

प्रमुख बिंदु

  • समिति असम समझौते की धारा 6 को लागू करने के लिये 1985 से अब तक किये गए कार्यों के प्रभाव का मूल्‍यांकन करेगी।
  • समिति सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करेगी और असम के लोगों के लिये असम विधानसभा तथा स्‍थानीय निकायों में आरक्षण हेतु सीटों की संख्‍या का आकलन करेगी। 
  • समि‍ति असमी और अन्‍य स्‍थानीय भाषाओं को संरक्षित करने, असम सरकार के तहत रोज़गार में आरक्षण का प्रतिशत तय करने तथा असमी लोगों की सांस्‍कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान व विरासत को सुरक्षित, संरक्षित तथा प्रोत्‍साहित करने के लिये अन्‍य उपायों की आवश्‍यकता का आकलन करेगी।
  • गृह मंत्रालय समिति की संरचना और शर्तों के संबंध में अलग से अधिसूचना जारी करेगा।
  • यह महसूस किया गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने के लगभग 35 साल बाद भी असम समझौते की धारा 6 को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।
  • उम्मीद है कि समिति के गठन से असम समझौते को अक्षरश: लागू करने का मार्ग प्रशस्‍त होगा और यह असम के लोगों के लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों को पूरा करेगा।
  • मंत्रिमंडल ने बोडो समुदाय से संबंधित लंबे समय से चले आ रहे मामलों के समाधान के लिये विभिन्‍न उपायों को अपनाए जाने की भी मंज़ूरी दी है।
  • मंत्रिमंडल ने बोडो म्‍यूजियम सह-भाषा व सांस्‍कृतिक अध्‍ययन केंद्र की स्‍थापना, कोकराझार में वर्तमान के ऑल इंडिया रेडियो स्‍टेशन व दूरदर्शन केंद्र को आधुनिक बनाने तथा BTAD (Bodoland Territorial Area Districts) से होकर गुज़रने वाली एक सुपर-फास्‍ट ट्रेन का नाम अरोनई एक्‍सप्रेस रखने के प्रस्‍तावों को भी मंज़ूरी दी है।
  • राज्‍य सरकार भूमि नीति और भूमि कानूनों के संबंध में आवश्‍यक कदम उठाएगी। इसके अलावा राज्‍य सरकार स्‍थानीय समुदायों के रीति-रिवाजों, परंपराओं और भाषायी शोध तथा प्रलेखन के लिये संस्‍थाओं की स्‍थापना करेगी।

क्या है असम समझौता?

  • 1985 में असम समझौते पर इस आश्वासन के साथ हस्ताक्षर किये गए कि केंद्र सरकार असम में विदेशियों की समस्या का संतोषजनक समाधान खोजने के लिये प्रयास करेगी।
  • परिणामस्वरूप असम में आव्रजन मुद्दे को हल करने के लिये लागू किये जाने वाले प्रस्तावों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा।
  • समझौते के अनुसार, 1 जनवरी, 1966 से पहले असम आने वाले सभी लोगों को नागरिकता दी जाएगी।
  • 1 जनवरी, 1966 तथा 24 मार्च, 1971 के बीच आए लोगों का “विदेशी अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946) और विदेशी (ट्रिब्यूनल) आदेश 1964 [The Foreigners (Tribunal) Order,1964] के प्रावधानों के अनुसार पता लगाया जाएगा।
  • उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे और उन्हें 10 साल की अवधि के लिये विस्थापित किया जाएगा।
  • समझौते के अनुसार, 25 मार्च, 1971 या उसके बाद असम आए विदेशियों का पता लगाए जाने का कार्य जारी रहेगा, ऐसे विदेशियों को निष्कासित करने के लिये व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे।

बोडोलैंड की मांग

  • बोडो (असमिया) समुदाय के लोग पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य के मूल निवासी हैं तथा भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत भारत की एक महत्त्वपूर्ण जनजाति है।
  • प्रतिबंधित संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) पिछले कई सालों से असम में बोडो आदिवासी समुदाय के लिये एक अलग राज्य की मांग उठाता रहा है।

स्रोत : पी.आई.बी. एवं द हिंदू