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UIDAI की कार्यप्रणाली पर CAG की लेखापरीक्षा रिपोर्ट | 08 Apr 2022 | शासन व्यवस्था

प्रिलिम्स के लिये:

CAG, UIDAI, आधार अधिनियम, 2016

मेन्स के लिये:

आधार और संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने आधार कार्ड जारी करने से संबंधित कई मुद्दों पर ‘भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण’ (UIDAI) की आलोचना की है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण:

  • सांविधिक प्राधिकरण: UIDAI 12 जुलाई, 2016 को आधार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का पालन करते हुए ‘इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय’ के अधिकार क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वैधानिक प्राधिकरण है।
    • UIDAI की स्थापना भारत सरकार द्वारा जनवरी 2009 में योजना आयोग के तत्त्वावधान में एक संलग्न कार्यालय के रूप में की गई थी।
  • जनादेश: UIDAI को भारत के सभी निवासियों को एक 12-अंकीय विशिष्ट पहचान (UID) संख्या (आधार) प्रदान करने का कार्य सौंपा गया है।
  • 31 अक्तूबर, 2021 तक UIDAI ने 131.68 करोड़ आधार नंबर जारी किये थे।

CAG द्वारा रेखांकित मुद्दे:

सिफारिशें:

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न:

प्रश्न: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018) 

  1. आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता या अधिवास के प्रमाण के रूप में किया जा सकता है।
  2. एक बार जारी होने के बाद आधार संख्या को जारीकर्त्ता प्राधिकारी द्वारा समाप्त या छोड़ा नहीं जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों 
(d) न तो 1 और न ही 2 

उत्तर: (d)

  • आधार प्लेटफॉर्म सेवा प्रदाताओं को निवासियों की पहचान को सुरक्षित और त्वरित तरीके से इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रमाणित करने में मदद करता है, जिससे सेवा वितरण अधिक लागत प्रभावी एवं कुशल हो जाता है। भारत सरकार और UIDAI के अनुसार आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
  • हालाँकि UIDAI ने आकस्मिकताओं का एक सेट भी प्रकाशित किया है जो उसके द्वारा जारी आधार अस्वीकृति के लिये उत्तरदायी है। मिश्रित या विषम बायोमेट्रिक जानकारी वाला आधार निष्क्रिय किया जा सकता है। आधार का लगातार तीन वर्षों तक उपयोग न करने पर भी उसे निष्क्रिय किया जा सकता है।

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020) 

  1. आधार मेटाडेटा को तीन महीने से अधिक समय तक संग्रहीत नहीं किया जा सकता है।
  2. आधार के डेटा को साझा करने के लिये राज्य निजी निगमों के साथ कोई अनुबंध नहीं कर सकता है।
  3. बीमा उत्पाद प्राप्त करने के लिये आधार अनिवार्य है।
  4. भारत की संचित निधि से लाभ प्राप्त करने के लिये आधार अनिवार्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 4
(b) केवल 2 और 4
(c) केवल 3
(d) केवल 1, 2 और 3

उत्तर: (b) 

  • सितंबर 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, आधार मेटाडेटा को छह महीने से अधिक समय तक संग्रहीत नहीं किया जा सकता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने आधार अधिनियम की धारा 2 (डी) को रद्द कर दिया है, जो सरकारी अधिकारियों को लेन-देन संबंधी मेटाडेटा को संग्रहीत करने से रोकने के लिये इस तरह के डेटा को पाँच साल की अवधि के लिये संग्रहीत करने की अनुमति देता था।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने आधार विनियमन 26 (c) को भी रद्द कर दिया है, जिसने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को निजी फर्मों के लिये आधार आधारित प्रमाणीकरण या प्रमाणीकरण इतिहास से संबंधित मेटाडेटा संग्रहीत करने की अनुमति दी थी। तद्नुसार, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्राहक को जानें (KYC) जैसी आवश्यकताओं के लिये अनिवार्य रूप से आधार विवरण न मांगें या UIDAI से  e-KYC का उपयोग करके प्रमाणीकरण न करें।
  • इसके अलावा आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 की धारा 7 में किये गए संशोधन को बरकरार रखा गया है। यह एक शर्त निर्धारित करता है कि राज्य सरकार सब्सिडी, लाभ या सेवा प्राप्त करने हेतु लाभार्थियों के लिये आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य कर सकती है, जिसके लिये भारत की संचित निधि से व्यय किया जाता है।

प्रश्न. पहचान प्लेटफॉर्म 'आधार' खुला (ओपन) "एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs)" उपलब्ध कराता है। इसका क्या अभिप्राय है? (2018)

  1. इसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के साथ एकीकृत किया जा सकता है।
  2. परितारिका (आईरिस) का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण संभव है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c) 

  • एपीआई (API) एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस का संक्षिप्त नाम है, जो एक सॉफ्टवेयर इंटरफेस है जिसमे दो अनुप्रयोगों को एक-दूसरे के साथ संवाद करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
  • ओपन एपीआई आधार सक्षम एप्लीकेशन बनाने की अनुमति प्रदान करते है तथा ऐसे एप्लीकेशन एप या वेबसाइट को आधार के साथ एकीकृत कर प्रमाणीकरण सेवाओं का उपयोग किया जा सकता हैं।
  • एपीआई मल्टी-मोड प्रमाणीकरण (आइरिस, फिंगरप्रिंट, ओटीपी और बायोमेट्रिक) का समर्थन करते हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस