बसवकल्याण में ‘अनुभव मंडप’: कर्नाटक | 07 Jan 2021

चर्चा में क्यों?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने बसवकल्याण में ‘न्यू अनुभव मंडप’ की आधारशिला रखी है, ज्ञात हो कि यह वह स्थान है जहाँ 12वीं शताब्दी के कवि-दार्शनिक बसवेश्वरा ने अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया था।

प्रमुख बिंदु

न्यू अनुभव मंडप

  • यह 7.5 एकड़ भूखंड में बनी छह मंज़िल की संरचना होगी, जो कि बसवेश्वरा के दर्शन के विभिन्न सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करेगी।
  • यह 12वीं शताब्दी में बसवेश्वरा द्वारा बसवकल्याण में स्थापित ‘अनुभव मंडप’ (जिसे प्रायः विश्व की पहली संसद के रूप में संदर्भित किया जाता है) को प्रदर्शित करेगी। विदित हो कि बसवेश्वरा द्वारा स्थापित ‘अनुभव मंडप’ में विभिन्न दार्शनिकों और समाज सुधारकों द्वारा  वाद-विवाद किया जाता था।
  • इसका निर्माण वास्‍तुकला की कल्‍याण चालुक्‍य शैली में किया जाएगा।
    • कल्याण चालुक्य, मध्ययुगीन काल के प्राचीन कर्नाटक इतिहास का एक अभिन्न अंग है। कल्याण चालुक्य शासकों ने अपने पूर्वर्ती शासकों की तरह ही मंदिरों का निर्माण करवाया और नृत्य तथा संगीत कलाओं का संरक्षण किया।
  • 770 स्तंभों द्वारा समर्थित इस भव्य संरचना में 770 लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक सभागार भी बनाया जाएगा।
  • ऐसा माना जाता है कि 770 शरणों (बसवेश्वरा के अनुयायी) ने 12वीं शताब्दी में ‘वचन’ सुधारवादी आंदोलन का नेतृत्त्व किया था।
  • इसके शीर्ष पर एक विशाल शिवलिंग स्थापित किया जाएगा।
  • इस परियोजना में अत्याधुनिक रोबोट प्रणाली, ओपन-एयर थिएटर, आधुनिक जल संरक्षण प्रणाली, पुस्तकालय, अनुसंधान केंद्र, प्रार्थना हॉल और योग केंद्र आदि की भी परिकल्पना की गई है।

बसवेश्वर 

Guru-Basveshwar

संक्षिप्त परिचय

  • गुरु बसवेश्वरा (1134-1168) एक भारतीय दार्शनिक, समाज सुधारक व नेतृत्त्वकर्त्ता थे, जिन्होंने जातिविहीन समाज बनाने का प्रयास किया और जाति तथा धार्मिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया।
    • बासवन्ना जयंती, एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसे संत बासवन्ना (भगवान बसवेश्वर) के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
    • गुरु बसवेश्वर का जन्म 1131 ईसवी में बागेवाड़ी (कर्नाटक के अविभाजित बीजापुर ज़िले में) नामक स्थान पर हुआ था।
  • गुरु बसवेश्वरा को लिंगायत संप्रदाय का संस्थापक भी माना जाता है।

दर्शन

  • गुरु बसवेश्वरा द्वारा प्रतिपादित दर्शन अरिवु (सत्य ज्ञान), आचार (सही आचरण), और अनुभव (दिव्य अनुभव) के सिद्धांतों पर आधारित था, जिसने 12वीं शताब्दी में सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक क्रांति ला दी थी।
  • वे संभवतः वर्ष 1154 में ‘कल्याण’ (वर्तमान में ‘बसवकल्याण’) चले गए और वहाँ  12-13 वर्ष के लंबी अवधि तक निवास के दौरान उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण कार्य किये।
    • उन्हीं के प्रयासों के कारण धर्म के दरवाज़े जाति, पंथ या लिंग के आधार पर भेदभाव किये बिना सभी के लिये खोल दिये गए।
    • उन्होंने ‘अनुभव मंडप’ की स्थापना की, जो कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिये सामान्य मंच था।
      • इस प्रकार इसे भारत की पहली संसद माना जाता है, जहाँ ‘शरणों’ ने एक साथ बैठकर एक लोकतांत्रिक ढाँचे में समाजवादी सिद्धांतों पर चर्चा की।
    • उन्होंने दो अन्य महत्त्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक सिद्धांत दिये-
      • कायका (ईश्वरीय कार्य): इस सिद्धांत के अनुसार, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद का कार्य पूरी ईमानदारी के साथ करना चाहिये।
      • दसोहा (समान वितरण)
        • समान कार्य के लिये समान आय होनी चाहिये।
        • कामगार (कायकाजीवी) अपनी मेहनत की कमाई से आसानी से जीवनयापन कर सकते हैं। उन्हें भविष्य के लिये धन या संपत्ति को संरक्षित नहीं करना चाहिये, बल्कि अधिशेष धन का उपयोग समाज तथा गरीबों के कल्याण के लिये करना चाहिये।

‘वचन’ सुधार आंदोलन

  • 12वीं शताब्दी में बसवेश्वरा के नेतृत्व में हुए ‘वचन’ (कविता) आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सभी का कल्याण करना था।
  • इस आंदोलन ने तत्कालीन समय के मौजूदा सामाजिक परिवेश में वर्ग, जाति और कुछ हद तक लैंगिक मुद्दों को संबोधित करने का प्रयास किया।

स्रोत: द हिंदू