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घाटे के वित्तीयन का एक उपकरण: प्रत्यक्ष मौद्रीकरण | 21 Jul 2020 | भारतीय अर्थव्यवस्था

प्रीलिम्स के लिये: 

प्रत्यक्ष मौद्रीकरण, अर्थोपाय अग्रिम

मेन्स के लिये:

प्रत्यक्ष विमौद्रीकरण  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘भारतीय स्टेट बैंक’ (State Bank of India- SBI) की एक रिपोर्ट में केंद्र सरकार के घाटे के वित्तपोषण के संभावित तरीके के रूप में ‘प्रत्यक्ष मौद्रीकरण’ (Direct Monetisation) को अपनाए जाने की सिफारिश की है।

प्रमुख बिंदु:

प्रत्यक्ष मौद्रीकरण (Direct Monetisation):

अर्थोपाय अग्रिम (Ways and Means Advances):

प्रत्यक्ष मौद्रीकरण  के लाभ: 

प्रत्यक्ष मौद्रीकरण से नुकसान:

प्रत्यक्ष मौद्रीकरण  और FRBM अधिनियम:

राजकोषीय घाटा बनाम आर्थिक वृद्धि:

Trend-in-Deficit

निष्कर्ष:

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस