कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से स्तन कैंसर के लिये उत्तरदायी घावों की पहचान | 18 Oct 2017

संदर्भ

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intellince-AI)  प्रणाली का विकास किया है, जो यह पहचान कर सकने में सक्षम है कि स्तन के कौन-से घाव शीघ्र ही कैंसर में परिवर्तित हो जाएंगे। विदित हो कि यदि ऐसा संभव होता है तो इससे अनावश्यक शल्य चिकित्साओं में कमी आएगी।  

प्रमुख बिंदु

  • उच्च जोखिम वाले स्तन के घाव (High-risk breast lesions) बायोप्सी-निदान घाव (biopsy-diagnosed lesions) हैं, जिनके कैंसर में बदलने का खतरा अधिक होता है। इस खतरे के कारण ही प्रायः शल्य चिकित्सा से उन्हें हटाने को प्राथमिकता दी जाती है।
  • हालाँकि, अनेक उच्च जोखिम वाले घाव सीधे रोगी के जीवन को खतरा नहीं पहुँचाते हैं और उन्हें उनकी पहचान भी तस्वीरों के माध्यम से की जा सकती है। दरअसल, इससे रोगियों की उपचार लागत में कमी आती है और शल्य चिकित्सा से जुड़ी जटिलताओं भी कम हो जाती हैं|
  • अधिकांश संस्थाओं ने उच्च जोखिम वाले घावों जैसे- एक विशिष्ट डक्टिकल हाइपरप्लासिया(a typical ductal hyperplasia) के लिये शल्य चिकित्सा कराने की ही सिफारिश की है क्योंकि इसके कैंसर में बदलने का जोखिम लगभग 20% होता है।
  • इस दौरान शोधकर्त्ताओं ने एक मशीन लर्निंग (machine learning) उपकरण के उपयोग का भी अध्ययन किया ताकि उन उच्च जोखिम वाले घावों की भी पहचान की जा सके जिनका कैंसर में बदलने का खतरा बहुत कम रहता है।
  • जब आँकड़ों में अधिक अनिश्चितता आ जाती है तो अन्वेषणों में सुधार और ओवरट्रीटमेंट को रोकने के लिये मशीन लर्निंग की आवश्यकता पड़ती है|
  • मशीन लर्निंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ही एक प्रकार है, जिसमें एक मॉडल पूर्व के अनुभवों के आधार पर स्वतः ही स्तन के घावों का पता लगा लेता है और डाटा तैयार करता है| 
  • शोधकर्त्ताओं द्वारा विकसित किये गए मॉडल ने अनेक विशिष्ट गुणों के साथ ही जोखिम के परंपरागत कारकों जैसे-रोगी की आयु और घाव का भी विश्लेषण किया। 
  • शोधकर्त्ताओं ने इस मॉडल का प्रयोग बायोप्सी द्वारा प्रमाणित उच्च जोखिम वाले घावों युक्त मरीज़ों के एक समूह पर किया। 
  • चिह्णितकिये गए 1,006 उच्च जोखिम वाले घावों में से 115 अथवा 11% घावों की पहचान कैंसर के घावों के रूप में की गई थी। 
  • मशीन लर्निंग मॉडल को उच्च जोखिम वाले दो-तिहाई घावों पर प्रयोग करने के बाद शोधकर्त्ताओ ने इसका प्रयोग शेष 335 घावों पर किया।
  • इस मॉडल ने सटीकता से 38 घावों में से कैंसर के लिये उत्तरदायी 37 अथवा 97% घावों का पता लगाया। शोधकर्त्ताओं ने यह भी पाया कि इस मॉडल के उपयोग से शल्य चिकित्साओं की संख्या में लगभग एक-तिहाई कमी आएगी।