औद्योगिक उत्पादन में 4.5% की वृद्धि | 11 Apr 2020

प्रीलिम्स के लिये: 

औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय

मेन्स के लिये:

औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office -NSO) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, फरवरी 2020 में औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (Index of Industrial Production -IIP) 133.3 अंक रहा जो फरवरी, 2019 के मुकाबले 4.5% अधिक है। इसका मतलब यही है कि फरवरी, 2020 में औद्योगिक विकास दर 4.5% रही।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय;


  •  वर्ष 2019 में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) तथा केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central Statistics Office-CSO) का विलय करके राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का गठन किया गया
  •  NSO का अध्यक्ष एक महानिदेशक होता है तथा यह अखिल भारतीय स्तर पर नमूना सर्वेक्षण कराने का काम करता है।

वृद्धि के प्रमुख कारण:

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में वृद्धि खनन, विद्युत् और विनिर्माण क्षेत्रों में उच्च उत्पादन के कारण हुई है।
  • खनन क्षेत्र में फरवरी माह में पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में 10% की वृद्धि देखी गई, जबकि विद्युत् क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 8.1% की वृद्धि देखने को मिलती है।
  • विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 3.2% की दर से बढ़ा है। विनिर्माण क्षेत्र के 23 में से 13 समूहों में फरवरी माह में सकारात्मक उत्पादन वृद्धि हुई।
  • बुनियादी धातुओं का निर्माण करने वाले उद्योगों के उत्पादन में 18% से अधिक की वृद्धि, जबकि रसायनों के उत्पादन में 8% की वृद्धि देखने को मिलती है।
  • प्राथमिक वस्तुओं के उत्पादन में 7% से अधिक तथा मध्यवर्ती वस्तुओं के उत्पादन में  22% से अधिक की वृद्धि हुई है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP):


  • विद्युत्, कच्चा तेल, कोयला, सीमेंट, स्टील, रिफाइनरी उत्पाद, प्राकृतिक गैस, और उर्वरक आठ ‘कोर’ उद्योग हैं, जो औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में शामिल वस्तुओं के भार का लगभग 40% भाग रखते हैं। 
  • खनन, विनिर्माण और विद्युत् तीन व्यापक क्षेत्र हैं, जिनके अंतर्गत IIP के घटक सम्मिलित होते हैं। 
  • औद्योगिक मूल्य सूचकांक से संबंधित आँकड़े  प्रत्येक माह NSO द्वारा संकलित और प्रकाशित किया जाते हैं।
  • वर्ष 2017 में IIP का आधार वर्ष 2004-05 से परिवर्तित कर वर्ष 2011-2012 कर दिया गया।

नकारात्मक वृद्धि वाले उद्योग:

  • फरवरी माह  में ऑटो सेक्टर में बड़ी गिरावट के साथ उद्योग समूह ‘मोटर वाहनों, ट्रेलरों और सेमी-ट्रेलरों के विनिर्माण’ ने (-) 15.6 प्रतिशत की सर्वाधिक ऋणात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उत्पादन में भी लगभग 15% की नकारात्मक वृद्धि देखी गई। कुल मिलाकर, पूंजीगत वस्तुओं में लगभग 10% की गिरावट आई है।  
  • प्राथमिक और मध्यवर्ती वस्तुओं को छोड़कर अन्य उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के उत्पादन में भी 6.4% की नकारात्मक वृद्धि देखने को मिलती है।

आगे की राह:

COVID ​​-19 महामारी के कारण हुए लॉकडाउन के कारण IIP में मार्च माह में फिर से भारी गिरावट की संभावना है, क्योंकि इसके कारण अधिकांश औद्योगिक उत्पादन रुक गए।

स्रोत- पीआईबी