प्रिलिम्स फैक्ट्स (28 Aug, 2019)



प्रीलिम्स फैक्ट्स: 28 अगस्त, 2019

पीकॉक पैराशूट स्पाइडर

तमिलनाडु के विल्लुपुरम ज़िले के पक्कामलाई रिज़र्व फॉरेस्ट में Poecilotheria कुल से संबंधित पीकॉक पैराशूट स्पाइडर (Peacock Parachute Spider) या गूटी टारनटुलावस (Gooty Tarantulawas) के रूप में पहचानी जाने वाली मकड़ी पाई गई।

Peacock Parachute Spider

प्रमुख बिंदु

  • इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने इसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त के रूप में वर्गीकृत किया है।
  • यह भारत की स्थानिक प्रजाति है।
  • इस प्रजाति का ज्ञात निवास स्थान पूर्वी घाटों में है, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में नंद्याल के पास पवित्र वनों में।
  • पैरों के नीचे के हिस्से पर बैंडिंग पैटर्न के आधार पर इस जीन की प्रजातियों की पहचान की जा सकती है।

टारनटुला जैविक कीट नियंत्रक हैं और पालतू व्यापार में संग्रहकों के बीच इनकी भारी मांग रहती है। अतः इनकी सुरक्षा के संबंध में जल्द से जल्द उपाय किये जाने की आवश्यकता है।


राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की क्लीयरिंग प्रणाली

संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री ने छह राज्यों के 517 स्थानीय निकायों के लिये राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (National Monuments Authority- NMA) के लिये एक एकीकृत अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) ऑनलाइन आवेदन प्रसंस्करण प्रणाली (NOPAS) लॉन्च किया है।

प्रमुख बिंदु

  • NOPAS को सितंबर 2015 में NMA द्वारा लॉन्च किया गया था, लेकिन यह दिल्ली में केवल पाँच शहरी स्थानीय निकायों और मुंबई में एक नागरिक निकाय तक सीमित था। अब, इस सुविधा का विस्तार छह और राज्यों मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, झारखंड एवं तेलंगाना में किया गया है।
  • यह सिस्टम ऑनलाइन तरीके से भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारकों के निषिद्ध और विनियमित क्षेत्रों में निर्माण-संबंधी कार्यों के लिये अनापत्ति प्रमाण-पत्र देने की प्रक्रिया को स्वचालित करता है।
  • NMA निषिद्ध और विनियमित क्षेत्र में निर्माण से संबंधित गतिविधि के लिये आवेदकों को अनुमति देने पर विचार करता है।
  • संस्कृति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) की स्थापना प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष AMASR (संशोधन एवं मान्यता) अधिनियम, 2010 के प्रावधानों के अनुसार की गई है।
  • आवेदक को शहरी स्थानीय निकाय द्वारा संबंधित एजेंसियों को भेजे जाने वाले एक एकल फॉर्म को भरने की आवश्यकता है, जिसमें से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) आवश्यक है।
  • पोर्टल का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्मार्ट 'स्मार्क' मोबाइल एप के साथ एकीकरण है, जिसके माध्यम से आवेदक अपने भूखंड का पता लगाता है और छवियों के साथ-साथ उसके भूखंड के भू-समन्वयकों को निकटता के साथ NIC पोर्टल में अपलोड किया जाता है।

ASI

  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय के तहत पुरातात्विक शोध और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये प्रमुख संगठन है।
  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण राष्‍ट्र की सांस्‍कृतिक विरासतों के पुरातत्त्वीय अनुसंधान तथा संरक्षण के लिये एक प्रमुख संगठन है।
  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण का प्रमुख कार्य राष्‍ट्रीय महत्त्व के प्राचीन स्‍मारकों तथा पुरातत्त्वीय स्‍थलों और अवशेषों का रखरखाव करना है ।
  • इसके अतिरिक्‍त प्राचीन संस्‍मारक तथा पुरातत्त्वीय स्‍थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के अनुसार, यह देश में सभी पुरातत्त्वीय गतिविधियों को विनियमित करता है।
  • यह पुरावशेष तथा बहुमूल्‍य कलाकृति अधिनियम, 1972 को भी विनियमित करता है।
  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण संस्‍कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

जनऔषधि सुगम

जैविक दवाओं और दुकानों की तलाश के लिये ‘जन औषधि सुगम’ मोबाइल एप की शुरुआत की गई तथा इस एप के लॉन्च के दौरान यह घोषणा भी की गई कि जन औषधि सुविधा सेनेटरी नैपकीन अब 1 रुपए प्रति पैड की दर से बेचा जाएगी।

  • औषधि विभाग देश भर में फैले प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क के ज़रिये सभी नागरिकों को सस्‍ती दरों पर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध है। इस कदम से गरीबों के दवा खर्च में पर्याप्‍त कमी आई है।
  • भारत सरकार ने 4 जून, 2018 को विश्‍व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्‍या पर ढाई रुपए प्रति पैड की दर से ‘जन औषधि सुविधा ऑक्‍सो-बायोडीग्रेडेबल सेनेटरी नैपकीन’ की शुरुआत की थी।
  • जन औषधि सुविधा की विशेष बात यह है कि जब यह इस्‍तेमाल के बाद ऑक्‍सीजन के संपर्क में आता है तो यह पैड बायोडीग्रेडेबल हो जाता है।
  • ‘जन औषधि सु‍गम’ मोबाइल एप्‍लीकेशन में नज़दीक के जन औषधि केंद्रों, गूगल मैप के ज़रिये उन केंद्रों तक पहुँचने का मार्ग, जन औषधि जैविक दवाओं का पता लगाने, दवाओं के मूल्‍य के आधार पर जैविक तथा ब्रांडेंड दवाओं की तुलना, खर्च में होने वाली बचत की जानकारी मिलेगी।
  • औषधि विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से सबके लिये ‘सस्‍ती और बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा’ दृष्टिकोण को हासिल करना सुनिश्चित हो जाएगा। इस कदम के ज़रिये ‘स्‍वच्‍छ भारत, हरित भारत’ का सपना भी पूरा होगा, क्‍योंकि ये पैड ऑक्‍सो-बायोडीग्रेडेबल तथा पर्यावरण अनुकूल हैं। जन औषधि सुविधा को देश भर के 5500 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के ज़रिये बिक्री के लिये उपलब्‍ध कराया जा रहा है।