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ध्यान दें:

प्रिलिम्स फैक्ट्स

प्रारंभिक परीक्षा

नीति आयोग का पुनर्गठन

स्रोत: द हिंदू  

चर्चा में क्यों? 

भारत सरकार ने नीति (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) आयोग का पुनर्गठन किया है, जिसमें सुमन के. बेरी का स्थान लेते हुए अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है तथा पाँच नए पूर्णकालिक सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनमें से तीन स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी (डीप टेक) जैसे क्षेत्रों से संबंध रखते हैं।

  • यह व्यापक पुनर्गठन नीति आयोग की पारंपरिक अर्थशास्त्री संरचना से हटकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों पर अधिक मज़बूत फोकस का संकेत देता है।
  • यह पुनर्संरचना नीति आयोग के हालिया प्रयास "भारत में अनुसंधान एवं विकास की सुगमता में सुधार" के साथ संरेखित है। यह कठोर अकादमिक विभागीय सोच के बजाय अनुकूलनीय, नवाचार-प्रेरित नियामक ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

NITI आयोग के संदर्भ में मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • परिचय: नीति आयोग का गठन वर्ष 2015 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव के माध्यम से किया गया था, जिसने पूर्ववर्ती योजना आयोग का स्थान लिया।
    • नीति आयोग भारत सरकार के सर्वोच्च सार्वजनिक नीति के थिंक-टैंक के रूप में कार्य करता है। यह नोडल एजेंसी है जिसे आर्थिक विकास को उत्प्रेरित करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने का कार्य सौंपा गया है। यह राज्य सरकारों को आर्थिक नीति निर्माण प्रक्रिया में बॉटम-अप दृष्टिकोण के माध्यम से शामिल करता है।
  • कानूनी स्थिति: नीति आयोग एक सलाहकार, अतिसंवैधानिक और गैर-वैधानिक निकाय है। यह विशुद्ध रूप से एक सलाहकार थिंक-टैंक के रूप में कार्य करता है।
  • कोर फिलॉसफी:
    • सहकारी संघवाद: योजना आयोग के विपरीत, जो राज्यों पर नीतियाँ थोपता था, नीति आयोग राज्यों को राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया में समान भागीदार के रूप में मानता है।
    • प्रतिस्पर्द्धी संघवाद: यह राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करता है, ताकि वे विभिन्न सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों (जैसे–स्वास्थ्य, शिक्षा, जल प्रबंधन आदि) में अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें।
  • संरचना एवं नेतृत्व:
    • अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री।
    • उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा सीधे नियुक्त किये जाते हैं और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।
    • शासी परिषद: यह सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री तथा अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं।
    • मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): प्रधानमंत्री द्वारा निश्चित कार्यकाल के लिये नियुक्त किये जाते हैं और इन्हें भारत सरकार के सचिव के समकक्ष दर्जा प्राप्त होता है।
    • पूर्णकालिक सदस्य: विभिन्न क्षेत्रों (जैसे–अर्थशास्त्र, विज्ञान, स्वास्थ्य और कृषि) के विशेषज्ञ।
    • क्षेत्रीय परिषद: विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान हेतु गठित की जाती है, जिसमें संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल शामिल होते हैं। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री या उनके नामित प्रतिनिधि द्वारा की जाती है।
    • पदेन सदस्यता: केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार सदस्यों को प्रधानमंत्री द्वारा नामित किया जाता है।
  • प्रमुख कार्य:
    • रणनीतिक एवं दीर्घकालिक नीति: सरकार के लिये रणनीतिक तथा दीर्घकालिक नीतियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना।
    • ज्ञान एवं नवाचार केंद्र: एक उन्नत संसाधन केंद्र का संचालन करना, जो सुशासन और श्रेष्ठ प्रथाओं से संबंधित शोध का भंडार हो।
    • निगरानी एवं मूल्यांकन: सरकारी कार्यक्रमों और पहलों के क्रियान्वयन की सक्रिय रूप से निगरानी और मूल्यांकन करना।
  • प्रमुख पहलें एवं सूचकांक:

NITI_Aayog

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नीति आयोग क्या है और इसकी कानूनी स्थिति क्या है?
नीति आयोग एक अतिरिक्त-संवैधानिक, गैर-सांविधिक नीति थिंक टैंक है, जिसकी स्थापना वर्ष 2015 में योजना आयोग के स्थान पर की गई थी।

2. नीति आयोग के उपाध्यक्ष कौन हैं?
अशोक कुमार लाहिड़ी नव नियुक्त उपाध्यक्ष हैं, जिन्होंने सुमन के. बेरी का स्थान लिया है।

3. नीति आयोग के हालिया पुनर्गठन का क्या महत्त्व है?
यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य-आधारित नीति-निर्माण की ओर बदलाव को दर्शाता है, जो नवाचार और बहुविषयक शासन को बढ़ावा देता है।

4. सहकारी बनाम प्रतिस्पर्द्धी संघवाद क्या है?
सहकारी संघवाद केंद्र–राज्य सहयोग को बढ़ावा देता है, जबकि प्रतिस्पर्द्धी संघवाद राज्यों के बीच प्रदर्शन-आधारित प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करता है।

5. नीति आयोग की प्रमुख पहलों के नाम बताइये।
प्रमुख पहलों में आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम, अटल नवाचार मिशन, SDG इंडिया इंडेक्स और राज्य स्वास्थ्य सूचकांक शामिल हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत सरकार ने नीति (NITI) आयोग की स्थापना निम्नलिखित में से किसका स्थान लेने के लिये की है?

(a) मानव अधिकार आयोग

(b) वित्त आयोग

(c) विधि आयोग

(d) योजना आयोग

उत्तर: (d)


प्रश्न: 'राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढाँचा कोष' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2017)

  1. यह नीति आयोग का अंग है।    
  2. वर्तमान में इसके पास 4,00,000 करोड़ रुपये का कोष है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (d)


प्रश्न. अटल नवप्रवर्तन (इनोवेशन) मिशन किसके अधीन स्थापित किया गया है?

(a) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

(b) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय

(c) नीति (NITI) आयोग

(d) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

उत्तर: (c)


मेन्स

प्रश्न. भारत में नीति आयोग द्वारा अनुसरण किये जा रहे सिद्धांत इससे पूर्व के योजना आयोग द्वारा अनुसरित सिद्धांतों से किस प्रकार भिन्न हैं? (2018)


रैपिड फायर

बैड लोन पर RBI के प्रमुख दिशानिर्देश

स्रोत: द हिंदू 

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी नए दिशानिर्देश जारी किये हैं, जो बैड लोन के वर्गीकरण और वसूली को नियंत्रित करने वाले नियमों को सख्त बनाने, क्रेडिट जोखिम प्रबंधन को मज़बूत करने और ढाँचे को वैश्विक स्तर पर स्वीकृत मानकों के अनुरूप लाने के लिये हैं।

  • NPAs.ऋणकर्त्ता के स्तर पर NPA वर्गीकरण: सबसे महत्त्वपूर्ण परिवर्तन यह है कि यदि एकाधिक ऋणों वाले किसी ऋणकर्त्ता का एक ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित किया जाता है, तो उसके सभी ऋणों को अब NPA माना जाएगा
    • NPA वर्गीकरण के लिये मूल मापदंड 90 दिनों की अतिदेयता ही रहेगा।
  • सख्त उन्नयन मानदंड: एक NPA ऋणकर्त्ता को केवल तब "मानक परिसंपत्ति" के रूप में उन्नत किया जाएगा, जब केवल डिफॉल्ट वाले ऋण के बजाय सभी ऋण सुविधाओं में ब्याज और मूलधन के संपूर्ण बकाए का पुनर्भुगतान कर दिया गया हो।
  • अनिवार्य स्वचालित पहचान: RBI ने बैंकों को NPA की पहचान करने के लिये स्वचालित प्रणालियों को लागू करने का निर्देश दिया है, जिससे पुरानी मैन्युअल टैगिंग प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सके, सटीकता सुनिश्चित हो सके और मानवीय हस्तक्षेप को रोका जा सके।
  • अपेक्षित ऋण हानि (ECL) ढाँचे की ओर बदलाव: RBI पुरानी 'उपगत हानि' पद्धति को एक सख्त अपेक्षित ऋण हानि (ECL) ढाँचे से प्रतिस्थापित कर रहा है।
    • ECL तीन चरणों में हानि आवंटन की गणना करता है: निम्न/कोई ऋण जोखिम नहीं, ऋण जोखिम में महत्त्वपूर्ण वृद्धि और ऋण-ह्रास। इसके लिये आवश्यक है कि बैंक किसी ऋण के 90 दिनों से अतिदेय होने से पहले ही संभावित हानियों के लिये प्रावधान करें।
  • प्रभावी ब्याज दर (EIR) का अनुप्रयोग: RBI ने ECL की गणना के लिये संविदात्मक ब्याज दर के स्थान पर प्रभावी ब्याज दर (EIR) के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है।
    • EIR का अनुमान अपेक्षित नकदी प्रवाह पर आधारित होगा, जिसमें संभावित ऋण हानि को छोड़कर सभी संविदात्मक शर्तों पर विचार किया जाएगा।

गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA)

  • एक NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) वह ऋण या अग्रिम है जिसने बैंक के लिये आय उत्पन्न करना बंद कर दिया है, आमतौर पर तब जब ब्याज या मूलधन का भुगतान 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहता है।
    • सकल NPA ऐसे डिफॉल्ट ऋणों के कुल मूल्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि शुद्ध NPA बैंकों द्वारा किये गए प्रावधानों को घटाने के बाद वास्तविक बोझ को दर्शाते हैं।
    • RBI की 'ट्रेंड्स एंड प्रोग्रेस' रिपोर्ट से पता चलता है कि बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिससे सितंबर 2025 तक सकल NPA घटकर 2.1% और शुद्ध NPA 0.5% पर आ गया है।
  • बैड बैंक एक विशेष वित्तीय संस्थान है जिसे बैंकों से इन NPA को खरीदने के लिये स्थापित किया गया है, जिससे उनका वित्तीय तनाव कम होता है और वे सामान्य ऋण देने की प्रक्रिया को पुनः शुरू करने में सक्षम होते हैं।
    • यह बाद में इन खराब ऋणों का पुनर्गठन कर सकता है या उन्हें निवेशकों को बेच सकता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य लाभ कमाने के बजाय बैंकों की बैलेंस शीट को सही करना है।

और पढ़ें: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लोन 'राइट-ऑफ' और NPA 


रैपिड फायर

भारत-जर्मनी रक्षा संबंध सुदृढ़ हुए

स्रोत: द हिंदू 

भारत के रक्षा मंत्री ने बर्लिन में अपने जर्मन समकक्ष के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्त्ता की, जिसका उद्देश्य भारत-जर्मनी सामरिक रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करना और सैन्य-से-सैन्य सहयोग का विस्तार करना है।

  • प्रमुख समझौते: दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर हस्ताक्षर किये और उसका आदान-प्रदान किया, साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना प्रशिक्षण में सहयोग हेतु एक कार्यान्वयन व्यवस्था (Implementing Arrangement) पर भी सहमति व्यक्त की।
  • भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा समन्वय: नेताओं ने संयुक्त क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण, क्षेत्रीय स्थिरता की सुनिश्चितता तथा व्यापक भारत-जर्मनी सामरिक समन्वय को सुदृढ़ करने हेतु भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी को एक महत्त्वपूर्ण ढाँचे के रूप में रेखांकित किया।
  • सैन्य अभ्यास एवं स्टाफ वार्त्ताएँ: जर्मनी ने सेवा-स्तर की स्टाफ वार्त्ताओं के संस्थानीकरण का स्वागत किया।
    • इसके अतिरिक्त, भारत को जर्मन वायुसेना की भागीदारी अभ्यास 'तरंग शक्ति' में प्राप्त होने की उम्मीद है, जो एक प्रमुख बहुपक्षीय वायु अभ्यास है जिसे वर्ष 2026 के अंत में भारत में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

भारत-जर्मनी रक्षा संबंध

  • वर्ष 2026 में भारत और जर्मनी 75 वर्ष के राजनयिक संबंध (स्थापित 1951) और 25 वर्ष की अपनी सामरिक साझेदारी (स्थापित 2000) पूरी कर रहे हैं।
  • भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग वर्ष 2006 के रक्षा सहयोग समझौते और उसके 2019 के कार्यान्वयन प्रबंध पर आधारित है, जो नियमित उच्च-स्तरीय रक्षा संवादों द्वारा समर्थित है।
  • नौसेना के पोर्ट कॉल और पैसेज अभ्यास के माध्यम से सैन्य संबंध गहरे हुए हैं। वायुसेना सहयोग का विस्तार अभ्यास 'तरंग शक्ति' के माध्यम से हुआ है, जो बढ़ती अंतर-संचालन क्षमता और सामरिक विश्वास को दर्शाता है।
  • बढ़ते समुद्री सहयोग को दर्शाते हुए जर्मन नौसेना के अधिकारी अभ्यास MILAN 2024 में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए।

Germany

और पढ़ें: भारत-जर्मनी संबंध 


चर्चित स्थान

UK ने फाॅकलैंड द्वीपों पर अपनी संप्रभुता की पुनः पुष्टि की

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया

हाल ही में इस मुद्दे पर अमेरिका के रुख की संभावित समीक्षा की खबरों के बीच यूनाइटेड किंगडम ने पुनः स्पष्ट किया कि फॉकलैंड द्वीप समूह पर संप्रभुता उसी के पास है।

  • ब्रिटेन ने आत्मनिर्णय के सिद्धांत पर ज़ोर देते हुए कहा कि द्वीपवासियों ने भारी बहुमत से ब्रिटिश ओवरसीज़ टेरिटरी के रूप में बने रहने की अपनी इच्छा व्यक्त की है।
  • अर्जेंटीना ने द्वीपों (माल्विनास) पर अपना दावा दोहराया और विवाद के समाधान के लिये द्विपक्षीय वार्त्ता  को पुनः शुरू करने की मांग की।

फॉकलैंड द्वीप समूह

  • फॉकलैंड द्वीपसमूह (माल्विनास) दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक स्वशासी ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र है। यह दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी तट से लगभग 300 मील पूर्व में स्थित है।
  • इस क्षेत्र में दो प्रमुख द्वीप—पूर्वी फॉकलैंड और पश्चिमी फॉकलैंड—तथा सैकड़ों छोटे द्वीप और टापू शामिल हैं।
  • ये द्वीप 1833 से ब्रिटिश नियंत्रण में हैं (1982 के फॉकलैंड युद्ध के दौरान अर्जेंटीना के संक्षिप्त कब्ज़े  को छोड़कर) हालाँकि संप्रभुता को लेकर अर्जेंटीना अब भी दावा करता है।

Falkland_Islands

और पढ़ें: फाॅकलैंड द्वीप संबंधी विवाद 


चर्चित स्थान

ऑयल इंडिया द्वारा लीबिया में हाइड्रोकार्बन की खोज

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने लीबिया के घदामेस बेसिन में स्थित अपने अनवरत अन्वेषण ब्लॉक क्षेत्र में एक नए तेल और गैस भंडार की खोज की सूचना दी, जो विदेशी ऊर्जा परिसंपत्तियों में विविधता लाने की भारत की रणनीति को दर्शाता है।

  • लीबिया के नेशनल ऑयल कॉरपोरेशन द्वारा इस नवीनतम कुएँ को ब्लॉक में पाँचवीं हाइड्रोकार्बन खोज घोषित किया गया है, जो मज़बूत संसाधन क्षमता का संकेत देता है।
  • जून 2023 में फोर्स मेज्योर (अप्रत्याशित घटना के कारण रोक) हटाए जाने के बाद अन्वेषण पुनः शुरू हुआ, संसाधन क्षमता का आकलन करने और विकास को सुविधाजनक बनाने के लिये आगे मूल्यांकन गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी।

लीबिया

  • लीबिया उत्तर अफ्रीका का एक देश है, जो भूमध्य सागर के तट पर स्थित है और इसकी सीमाएँ मिस्र, सूडान, चाड, नाइजर, अल्जीरिया तथा ट्यूनीशिया से लगती हैं।
  • यह अफ्रीका में सिद्ध तेल भंडार का सबसे बड़ा धारक है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में एक महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी बनता है।
    • घदामेस बेसिन, जो पश्चिमी लीबिया के कुछ हिस्सों में विस्तृत है, उत्तरी अफ्रीका के प्रमुख हाइड्रोकार्बन-समृद्ध अवसादी बेसिनों में से एक है।
  • यह क्षेत्र राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित रहा है, जिसके कारण तेल अन्वेषण गतिविधियों पर असर पड़ा है, जिसमें तेल ब्लॉकों में ‘फोर्स मेज्योर’ की स्थितियाँ भी शामिल रही हैं।

Oil_India_Discovers_Hydrocarbons_in_Libya

और पढ़ें: लीबियाई संकट और संघर्ष-विराम की घोषणा


रैपिड फायर

चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी छूट समाप्त

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट 26 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो गई, जिससे ईरान के रास्ते अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत की दीर्घकालिक संपर्क परियोजना को लेकर अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है।

  • अब भारत के सामने एक सामरिक विकल्प है: या तो इस परियोजना में अपनी भागीदारी कम कर दे/समाप्त कर दे या फिर अमेरिकी प्रतिबंधों की चपेट में आने का जोखिम उठाए।
  • प्रतिबंधों के जोखिम को न्यूनतम करने के लिये सरकार ने चाबहार से अपने कर्मियों को वापस बुला लिया है, अपनी 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का पूर्व भुगतान कर दिया है और शहीद बेहेश्ती टर्मिनल में अपनी हिस्सेदारी एक ईरानी कंपनी को हस्तांतरित करने पर विचार कर रही है। हालाँकि यह हस्तांतरण अभी भी चर्चा के अधीन है और इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।

चाबहार बंदरगाह

  • परिचय: चाबहार ईरान का भारत के सबसे निकट का समुद्री बंदरगाह है, जो ओमान की खाड़ी के तट पर मकरान तट के साथ सीस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है।
    • इसमें दो टर्मिनल हैं — शहीद कलंतरी और शहीद बेहेश्ती टर्मिनल, जिसमें भारत बाद वाले टर्मिनल के विकास में शामिल है।
  • समझौते: चाबहार बंदरगाह समझौते पर 2003 में हस्ताक्षर किये गए थे, हालाँकि इससे संबंधित वर्ष 2016 में एक त्रिपक्षीय समझौता (भारत–ईरान–अफगानिस्तान) इस बंदरगाह को संचालित करने के लिये किया गया था।
    • यह परियोजना पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच प्रदान करती है।
  • महत्त्व: पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिये एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है।
  • आर्थिक एवं संपर्क लाभ: परिवहन लागत और समय को कम करता है, व्यापार दक्षता में सुधार करता है, तथा भारत को कज़ाखस्तान और उज़्बेकिस्तान जैसे मध्य एशियाई बाज़ारों तक सीधी पहुँच प्रदान करता है।
  • सामरिक महत्त्व: चीन के ग्वादर बंदरगाह के विकल्प के रूप में भारत के क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाता है, साथ ही अफगानिस्तान को मानवीय सहायता पहुँचाने में सक्षम बनाता है।

और पढ़ें: चाबहार बंदरगाह समझौता  


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