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ध्यान दें:

प्रिलिम्स फैक्ट्स

प्रारंभिक परीक्षा

RBI ने Paytm पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द किया

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों? 

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने निरंतर अनुपालन में कमी तथा जनहित के प्रतिकूल मानी गई प्रबंधन प्रथाओं और पेमेंट्स बैंक लाइसेंस की मूल शर्तों के उल्लंघन के कारण पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है।

  • यह निरस्तीकरण बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अंतर्गत किया गया, जिसके परिणामस्वरूप संबंधित संस्था को तत्काल प्रभाव से किसी भी प्रकार का बैंकिंग या संबंधित व्यवसाय करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
  • बाज़ार में अस्थिरता को कम करने हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया कि PPBL के पास समापन की स्थिति में अपनी समस्त जमा देनदारियों का भुगतान करने के लिये पर्याप्त चलनिधि उपलब्ध है।

पेमेंट्स बैंक क्या है?

  • परिचय: नचिकेत मोर समिति (2014) ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने हेतु पेमेंट्स बैंक और लघु वित्त बैंकों के गठन की सिफारिश की थी, जिसका उद्देश्य निम्न-आय वाले परिवारों, प्रवासी श्रमिकों तथा छोटे व्यवसायों को लक्षित करना था।
    • इसके पश्चात, भारतीय रिज़र्व बैंक ने वर्ष 2014 में लाइसेंसिंग संबंधी दिशानिर्देश जारी किये और बुनियादी वित्तीय सेवाओं को वंचित वर्गों तक पहुँचाने के लिये प्रौद्योगिकी के उपयोग के उद्देश्य से 11 पेमेंट्स बैंक संस्थाओं को अनुमोदन प्रदान किया।
      • उदाहरण: एयरटेल पेमेंट्स बैंक, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक आदि।
  • उद्देश्य: मुख्य लक्ष्य वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाना है, जिसके अंतर्गत छोटे बचत खाते तथा उच्च मात्रा में निम्न मूल्य वाले भुगतान एवं प्रेषण सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
  • जमा सीमा: इन बैंकों को प्रति ग्राहक अधिकतम ₹2 लाख तक की मांग जमा (बचत एवं चालू खाते) स्वीकार करने की अनुमति होती है।
  • अनुमत सेवाएँ: ये ATM एवं डेबिट कार्ड जारी कर सकते हैं, मोबाइल एवं इंटरनेट बैंकिंग सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं तथा अन्य बैंकों के लिये व्यावसायिक प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर सकते हैं।
  • ऋण संबंधी प्रतिबंध: इन्हें ऋण देने संबंधी गतिविधियाँ करने की सख्त मनाही है; अतः ये क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते और न ही ग्राहकों को ऋण प्रदान कर सकते हैं।
  • निवेश संबंधी अनिवार्यता: सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु इन्हें अपनी मांग जमा राशि का न्यूनतम 75% भाग एक वर्ष तक की परिपक्वता वाली वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) योग्य सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना अनिवार्य है।
  • पूंजी आवश्यकता: पेमेंट्स बैंक की स्थापना के लिये न्यूनतम चुकता इक्विटी पूंजी ₹100 करोड़ निर्धारित है तथा इन्हें कम-से-कम 15% पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) बनाए रखना होता है।
  • शासन व्यवस्था: ये कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत होते हैं तथा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 और भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 द्वारा शासित होते हैं।
  • तृतीय-पक्ष वितरण: ये म्यूचुअल फंड इकाइयों एवं बीमा उत्पादों जैसे गैर-जोखिम वहन करने वाले सरल वित्तीय उत्पादों के वितरण में संलग्न हो सकते हैं।
  • बहिष्करण: ये अनिवासी भारतीय (NRI) जमा स्वीकार नहीं कर सकते तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवाओं के लिये सहायक कंपनियाँ स्थापित नहीं कर सकते।
  • DICGC: भारत में संचालित पेमेंट्स बैंक जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) के अंतर्गत आते हैं।
    • भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी वाणिज्यिक बैंक, जिनमें पेमेंट्स बैंक, लघु वित्त बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल हैं, इस बीमा व्यवस्था के अंतर्गत कवर किये जाते हैं।
    • जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम के तहत प्रत्येक बैंक जमाकर्त्ता को प्रति बैंक अधिकतम ₹5 लाख (मूलधन + ब्याज सहित) तक की जमा बीमा सुरक्षा प्राप्त होती है। यह सुरक्षा बैंक के परिसमापन, लाइसेंस रद्द होने अथवा विलय/पुनर्गठन की स्थिति में लागू होती है।
  • RBI सुधार: 
    • सितंबर 2019: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पेमेंट्स बैंकों को पाँच वर्ष के बाद लघु वित्त बैंक का लाइसेंस प्राप्त करने के लिये आवेदन करने की अनुमति दी, जिससे उन्हें ऋण देने तथा व्यापक सेवाएँ प्रदान करने का अवसर प्राप्त हुआ।
    • अक्टूबर 2019: पेमेंट्स बैंकों को सीमा-पार प्रेषण के लिये अधिकृत विदेशी मुद्रा डीलर के रूप में कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई।
    • फरवरी 2020: RBI ने इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्द्धा एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिये ऑन-टैप लाइसेंसिंग संबंधी दिशानिर्देश जारी किये।

विशेषता 

पेमेंट बैंक

स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB)

यूनिवर्सल बैंक

मुख्य उद्देश्य

वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान 

छोटे व्यवसायों और असंगठित क्षेत्रों को ऋण उपलब्ध कराना 

अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के लिये समग्र बैंकिंग सेवा 

ऋण/लोन

अनुमति नहीं (लोन या क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते) 

अनुमति है, मुख्यतः छोटे व्यवसाय व कृषि पर केंद्रित 

पूर्ण रूप से अनुमति, सभी प्रकार के रिटेल व कॉर्पोरेट लोन 

जमा सीमा

सीमित (वर्तमान में प्रति व्यक्ति ₹2 लाख तक) 

कोई विशिष्ट सीमा नहीं

कोई विशिष्ट सीमा नहीं

क्रेडिट कार्ड

क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते 

क्रेडिट कार्ड जारी कर सकते हैं

क्रेडिट कार्ड जारी कर सकते हैं

न्यूनतम पूंजी

₹100 करोड़

₹200 करोड़

₹500 करोड़

उदाहरण

एयरटेल पेमेंट्स बैंक, इंडिया पोस्ट।

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक, इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक।

SBI, HDFC, ICICI, PNB

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत RBI को प्रदान की गई प्रमुख शक्तियाँ

  • बैंकों का लाइसेंसिंग (धारा 22): भारत में कोई भी कंपनी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी लाइसेंस के बिना बैंकिंग व्यवसाय नहीं कर सकती। 
    • यदि कोई बैंक निर्धारित शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, तो RBI उसके लाइसेंस को रद्द भी कर सकता है।
  • वैधानिक तरलता अनुपात- SLR (धारा 24): बैंकों को अपनी कुल मांग और सावधि देनदारियों का एक निश्चित प्रतिशत तरल परिसंपत्तियों (नकद, स्वर्ण या अनुमोदित बिना बंधक प्रतिभूतियों) के रूप में बनाए रखना अनिवार्य है। 
  • प्रबंधन नियंत्रण (धारा 10 एवं 36AA): यदि किसी बैंक के प्रबंधकीय अधिकारी या निदेशकों का आचरण जनहित के प्रतिकूल पाया जाता है, तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) उन्हें हटाने और उनके स्थान पर उपयुक्त व्यक्तियों की नियुक्ति करने का अधिकार रखता है। 
  • निरीक्षण एवं लेखापरीक्षा (धारा 35): RBI किसी भी बैंक के खातों और अभिलेखों की जाँच कर उसकी वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करने हेतु निरीक्षण कर सकता है। 
  • अस्थायी प्रतिबंध एवं समाधान (धारा 45): संकट की स्थिति में RBI केंद्र सरकार से अनुरोध कर किसी संकटग्रस्त बैंक पर अस्थायी रोक (Moratorium) लगा सकता है, जिससे उसके संचालन को अस्थायी रूप से स्थिर कर पुनर्गठन या विलय की योजना तैयार की जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. पेमेंट्स बैंक क्या है?
यह वित्तीय समावेशन के लिये बनाया गया एक विशिष्ट बैंकिंग मॉडल है, जो जमा स्वीकार करता है (₹2 लाख तक) और भुगतान सेवाएँ प्रदान करता है, लेकिन ऋण देने की अनुमति नहीं होती। 

2. RBI किस आधार पर बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर सकता है?
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 के तहत RBI अनुपालन न करने, निम्स्तरीय प्रबंधन या जमाकर्त्ताओं के हितों को जोखिम होने पर लाइसेंस रद्द कर सकता है। 

3. पेमेंट्स बैंकों पर प्रमुख प्रतिबंध क्या हैं?
ये बैंक ऋण या क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते और उन्हें अपनी 75% जमा राशि सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करनी होती है। 

4. बैंक प्रबंधन में RBI की क्या भूमिका है?
RBI बैंकों का निरीक्षण कर सकता है, प्रबंधन को हटा सकता है, प्रतिबंध लगा सकता है तथा सार्वजनिक हित की रक्षा के लिये परिसमापन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। 

5. पेमेंट्स बैंकों का उद्देश्य क्या है?
वंचित और असंगठित वर्गों तक बुनियादी बैंकिंग और धन प्रेषण सेवाएँ पहुँचाकर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत में वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से 'भुगतान बैंकों' (पेमेंट बैंक्स) की स्थापना की जा

  1. रही है। इस दृष्टि से निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  2. जिन मोबाइल टेलीफोन कंपनियों और सुपर-बाज़ार शृंखलाओं का स्वामित्व एवं नियंत्रण भारतीय व्यक्तियों के पास है, वे भुगतान बैंकों के प्रवर्तक होने के योग्य हैं।
  3. भुगतान बैंक क्रेडिट कार्ड एवं डेबिट कार्ड दोनों जारी कर सकते हैं।
  4. भुगतान बैंक ऋण देने के कार्यकलाप नहीं कर सकते हैं।

नीचे दिये गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 1 और 3

(c) केवल 2

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: B 


रैपिड फायर

ब्रिक्स उप-विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की बैठक

स्रोत: द हिंदू

नई दिल्ली में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) पर BRICS उप-विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की बैठक बिना किसी संयुक्त सहमति के समाप्त हुई, जिससे पश्चिम एशिया के संघर्षों और इज़रायल–फिलिस्तीन मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद उजागर हुए।

  • ‘अध्यक्ष वक्तव्य’ जारी करना: संयुक्त बयान पर सहमति न बन पाने के कारण भारत (वर्तमान BRICS अध्यक्ष के रूप में) ने एक अध्यक्षीय वक्तव्य जारी किया, जिसमें साझा स्थिति के बजाय चर्चाओं को प्रतिबिंबित किया गया।
  • इज़रायल–फिलिस्तीन पर भारत का रुख बदलना: भारतीय राजनयिकों को गाज़ा और लेबनान पर इज़रायल की बमबारी की आलोचना करने वाली भाषा को नरम करने के प्रयास के लिये लगभग सभी अन्य सदस्य देशों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
    • भारत ने कुछ संदर्भों में ‘इज़रायल’ शब्द को बदलकर ‘कब्ज़ा करने वाली शक्ति’ शब्द प्रयोग करने का भी सुझाव दिया।
  • ‘पूर्वी यरुशलम’ को हटाना: भारत ने भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की राजधानी के रूप में ‘पूर्वी यरुशलम’ के उल्लेख को हटाने की कोशिश की—यह परिवर्तन वर्ष 2017 के बाद से भारत के द्विपक्षीय बयानों के अनुरूप था, लेकिन व्यापक BRICS मंच के भीतर यह एक मतभेद का विषय रहा।
  • विस्तारित BRICS समूह: यह गहरा ध्रुवीकृत वातावरण नए विस्तारित संगठन की जटिलताओं को दर्शाता है, जिसमें अब ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। (नोट: सऊदी अरब को सदस्यता दी गई है, लेकिन उसने अभी तक औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण नहीं की है।)

और पढ़ें: भू-राजनीतिक परिवर्तनों के दौर में ब्रिक्स


रैपिड फायर

अनुच्छेद 21 के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित यात्रा का अधिकार

स्रोत: द हिंदू 

सर्वोच्च न्यायालय ने घोषित किया है कि सड़क दुर्घटनाओं से यात्रियों की सुरक्षा और राजमार्गों पर सुरक्षित आवागमन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

  • चिंताजनक आँकड़े: राष्ट्रीय राजमार्ग (NHs) भारत के कुल सड़क नेटवर्क का केवल 2% हिस्सा हैं, लेकिन ये लगभग 30% सड़क दुर्घटनाजनित मौतों के लिये ज़िम्मेदार हैं, जो गंभीर अवसंरचनात्मक और प्रशासनिक कमज़ोरियों को उजागर करता है।
  • संवैधानिक व्याख्या: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 21 राज्य पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का सकारात्मक दायित्व डालता है। यह केवल अवैध मृत्यु से संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि रोके जा सकने वाले खतरों से होने वाली मृत्यु भी इस दायित्व के निर्वहन में विफलता को दर्शाती है।
  • तत्काल प्रतिबंध: न्यायालय ने किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के राइट-ऑफ-वे के भीतर नए वाणिज्यिक ढाँचे, ढाबों या भोजनालयों के निर्माण अथवा संचालन पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया।
  • सख्त पार्किंग नियम: भारी और वाणिज्यिक वाहनों को किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग, कैरिज-वे (मुख्य सड़क) या पक्के शोल्डर (सड़क के किनारे) पर पार्क करने या रुकने की सख्त मनाही है, सिवाय आधिकारिक तौर पर निर्धारित ले-बाय (Lay-bys) और मार्ग के किनारे की सुविधाओं के, ताकि ब्लाइंड-स्पॉट टक्करों को रोका जा सके।
  • प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई: ज़िला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों के भीतर सभी अनधिकृत संरचनाओं को ध्वस्त करने या हटाने का निर्देश दिया गया है।
    • इसके अतिरिक्त राजमार्ग सुरक्षा क्षेत्र के भीतर किसी भी लाइसेंस या व्यापारिक स्वीकृति को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या लोक निर्माण विभाग (PWD) की पूर्व अनुमति के बिना प्रदान नहीं किया जा सकता।
  • संस्थागत तंत्र: राजमार्ग सुरक्षा प्रोटोकॉल की निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित करने के लिये देश के प्रत्येक जिले में एक ‘ज़िला राजमार्ग सुरक्षा कार्यबल’ का गठन किया जाना अनिवार्य है।

और पढ़ें: भारत में सड़क सुरक्षा के परिदृश्य में बदलाव


रैपिड फायर

नीलगिरि तहर का तीसरा सिंक्रोनाइज़्ड सर्वेक्षण

स्रोत: द हिंदू

हाल ही में तमिलनाडु वन विभाग ने केरल के समन्वय में पश्चिमी घाट में तीसरा सिंक्रोनाइज़्ड नीलगिरि तहर सर्वेक्षण प्रारंभ किया।

  • यह सर्वेक्षण राज्यों की सीमाओं के पार एक साथ गणना सुनिश्चित करता है, जिससे दोहराव से बचा जा सके और सटीकता में सुधार हो। इसके अंतर्गत अशंबु मोट्टई (कन्याकुमारी) से लेकर तवलमलाई (गुडालूर) तक 14 वन प्रभागों में विस्तृत 3,100 किमी. से अधिक क्षेत्र को कवर किया गया है।
  • सहायक वेब-आधारित प्रणाली के साथ ‘वरुदाई’ (Varudai) मोबाइल ऐप का उपयोग वास्तविक समय में डेटा संग्रह, GPS ट्रैकिंग और मानकीकृत रिपोर्टिंग को संभव बनाता है; वहीं, अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण और भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट जैसे स्वतंत्र संस्थानों की भागीदारी वैज्ञानिक सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।

नीलगिरि तहर

  • परिचय: ‘वरयाडु’ (Varayaadu) या ‘नीलगिरि आइबेक्स’ के नाम से भी जाना जाने वाला यह एक केप्राइन खुरदार स्तनधारी (Caprine Ungulate) है, जो पश्चिमी घाट की स्थानिक (Endemic) प्रजाति है, विशेष रूप से केरल और तमिलनाडु में पाया जाता है (जहाँ यह राज्य पशु है)।
    • यह 1,200-2,600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पर्वतीय घासभूमियों और शोला वनों में निवास करता है तथा पश्चिमी घाट की घासयुक्त ढलानों और चट्टानी खड़ी ढलानों पर अच्छी तरह विकसित होता है।
    • केरल का एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (ENP) इसकी सबसे बड़ी आबादी का आश्रय स्थल है, जबकि पेहरी ऊँचाई, श्रीविल्लीपुत्तूर, मेघमलाई और अगस्त्यर पर्वतमालाओं में इसकी छोटी आबादी पाई जाती हैं।
  • व्यवहार एवं जीवन चक्र: यह एक दिवाचर प्रजाति है (दिन में सक्रिय रहती है) और इसका जीवनकाल वन्य परिस्थितियों में लगभग 9 वर्ष तक होता है।
  • संरक्षण स्थिति:
    • IUCN स्थिति: लुप्तप्राय 
    • WPA, 1972: अनुसूची-I
  • जोखिम: पर्यावास हानि (वनोन्मूलन, जलविद्युत परियोजनाएँ, एकल फसल प्रणाली), पशुधन के साथ प्रतिस्पर्द्धा, शिकार (पोचिंग) तथा स्थानीय विलुप्ति (उदाहरण: कर्नाटक के उच्चभूमि क्षेत्र)।
    • प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर अक्तूबर 2023 में शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावास प्रबंधन, संख्या निगरानी तथा वैज्ञानिक संरक्षण पर केंद्रित है।
  • पारिस्थितिक महत्त्व: यह तेंदुए (और कभी-कभी बाघ) जैसे बड़े माँसाहारी जीवों के लिये शिकार आधार का हिस्सा बनता है, नीलगिरि लंगूर तथा लायन-टेल्ड मेकाक जैसी स्थानिक प्रजातियों के साथ सह-अस्तित्व में रहता है तथा पर्वतीय घासभूमि के स्वास्थ्य का संकेतक भी है।

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और पढ़ें: नीलगिरि तहर


रैपिड फायर

इज़रायल ने भारत से बनी मेनाशे समुदाय को हवाई मार्ग से स्थानांतरित किया

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

हाल ही में, इज़रायल ने पश्चिम एशिया में जारी सुरक्षा चिंताओं के बीच “ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन” के अंतर्गत मिज़ोरम से लगभग 240 व्यक्तियों को तेल अवीव स्थानांतरित किया।

  • यह कई चरणों में होने वाले स्थानांतरण का प्रथम चरण था, जिसमें उत्तरी इज़रायल के नोफ हागलील जैसे आवास केंद्रों में बसावट की योजना बनाई गई है।
  • भारत ने स्पष्ट किया कि उसने इस अभियान को सुगम नहीं बनाया, बल्कि उसकी भूमिका केवल कानूनी प्रवासन सुनिश्चित करने तथा मानव तस्करी की रोकथाम तक सीमित थी।

बनी मेनाशे समुदाय

  • बनी मेनाशे (अर्थात “मनश्शे के पुत्र”) स्वयं को इज़रायल की दस लुप्त जनजातियों में से एक के वंशज मानते हैं, जिन्हें लगभग 722 ईसा पूर्व असीरियाई विजय के बाद निर्वासित कर दिया गया था।
  • ये मुख्यतः मिज़ो और कुकी जनजातीय समूहों का हिस्सा हैं, जिनकी पूर्वोत्तर भारत में जनसंख्या लगभग 7,000 है। इनकी प्रवासन संबंधी मान्यता के अनुसार, इनका प्रवास क्रमशः फारस (ईरान) और अफगानिस्तान के मार्ग से होते हुए सदियों में पूर्वोत्तर भारत तक पहुँचा।
  • प्रारंभ में समुदाय के अधिकांश सदस्य मिशनरियों के प्रभाव में ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे। किंतु 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में एक यहूदीकरण आंदोलन उभरा, जो स्थानीय मान्यताओं तथा अमिशाव और शावेई इज़रायल जैसे संगठनों से प्रभावित था। 1980 के दशक तक समुदाय के अनेक सदस्यों ने यहूदी धार्मिक प्रथाओं को अपनाना शुरू कर दिया।
  • वर्ष 2005 में इज़रायल के मुख्य रब्बीनेट ने सांस्कृतिक दावों तथा अनिर्णायक आनुवंशिक साक्ष्यों के आधार पर इन्हें “इज़रायल का खोया वंश” के रूप में मान्यता प्रदान की, जिससे चरणबद्ध प्रवासन संभव हुआ।
    • प्रवास ‘अलियाह’ (वापसी प्रवासन) के माध्यम से होता है, जिसे ज्यूइश एजेंसी फॉर इज़रायल (JAFI) तथा इज़रायली सरकार के कार्यक्रमों द्वारा समर्थन प्राप्त होता है।
  • स्थानांतरण के बावजूद इस समुदाय को इज़रायल में एकीकरण संबंधी चुनौतियों तथा भेदभाव की घटनाओं का सामना करना पड़ा है।

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और पढ़ें: भारत-इज़रायल संबंध


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