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प्रिलिम्स फैक्ट्स

रैपिड फायर

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत कौशल विकास

स्रोत: पीआईबी 

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कौशल-आधारित विकास में तेज़ी लाने के लिये वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) के तहत एक क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की।

  • MSDE सीमावर्ती क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिये मांग-संचालित, स्थानीय रूप से प्रासंगिक कौशल विकास पहलों को सक्षम बना रहा है, जो कौशल विकास को क्षेत्रीय आर्थिक आवश्यकताओं के साथ एकीकृत करता है।
  • यह पहल सहकर्मी शिक्षा, नवाचार और उत्तरदायी कार्यान्वयन को बढ़ावा देती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कौशल विकास रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी आजीविका सृजन में परिवर्तित हो।

 वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम

  • परिचय: गृह मंत्रालय के नेतृत्व में इस कार्यक्रम का उद्देश्य 662 सीमावर्ती ग्रामों को आत्मनिर्भर और बेहतर कनेक्टिविटी वाले ‘पहली पंक्ति के ग्राम’ के रूप में बदलना है, जो "विकसित भारत के लिये विकसित ग्राम" के लक्ष्य के अनुरूप है।
    • यह पहल स्थानीय निवासियों को सीमा सुरक्षा बलों की "आँख और कान" बनाने और उन्हें अवैध गतिविधियों तथा सीमा पार अपराधों से दूर करने का प्रयास करती है।
    • इसका उद्देश्य सीमावर्ती आबादी के शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को रोकना भी है, जो सुरक्षा के लिहाज से शून्यता उत्पन्न करता है और जनसांख्यिकीय परिवर्तन का कारण बनता है। इसके लिये वहाँ स्थायी आजीविका के अवसर उत्पन्न किये जाएंगे।
  • विकासक्रम: चीन की सीमा के साथ सटे ग्रामों के विकास के लिये वर्ष 2023 में शुरू किये गए 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' का विस्तार VVP-II के रूप में किया गया। यह 100% केंद्र द्वारा वित्तपोषित एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसे अप्रैल 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई थी।
  • VVP-II के तहत कवर किये गए राज्य: इस कार्यक्रम के अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है।
  • व्यापक विकास: इस रणनीति में मौजूदा सरकारी योजनाओं की परिपूर्णता, बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना और इन ग्रामों को "विकास केंद्रों" के रूप में विकसित करना शामिल है, ताकि राष्ट्र के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके।
  • विश्वास निर्माण: गृह मंत्रालय सीमा सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिये "सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील" गतिविधियों पर बल देता है, ताकि उन्हें संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करने के लिये प्रोत्साहित किया जा सके।

और पढ़ें: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II (VVP-II)    


रैपिड फायर

संधारणीय धान कृषि हेतु अमेज़न-TGRA समझौता

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स

  • अमेज़न ने भारत में संधारणीय धान कृषि एवं मीथेन उत्सर्जन न्यूनीकरण को समर्थन देने हेतु द गुड राइस अलायंस (TGRA) के साथ एक दीर्घकालिक कार्बन क्रेडिट ऑफटेक समझौता किया है।
  • द गुड राइस अलायंस (TGRA): यह बेयर, जेनज़ीरो (GenZero) तथा शेल समर्थित निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाली एक पहल है, जो वैश्विक स्तर पर भारत के प्रथम एवं सबसे बड़े कृषि कार्बन क्रेडिट समझौतों में से एक का प्रतिनिधित्व करती है।
  • परियोजना का परिचय: TGRA धान कृषि से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से 35,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र तथा 13,000 से अधिक लघु किसानों को समाहित करने वाली वृहद् पैमाने की पहल को कार्यान्वित कर रहा है।
    • अमेज़न प्राथमिक क्रेता के रूप में कार्य करेगा तथा प्रारंभिक चरण में 6,85,000 मीट्रिक टन CO₂-समतुल्य कार्बन क्रेडिट खरीदेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन जनित चुनौतियों के समाधान को बढ़ावा मिलेगा। 
  • दृष्टिकोण: यह कार्यक्रम मीथेन उत्सर्जन न्यूनीकरण एवं जल दक्षता संवर्द्धन हेतु उन्नत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करता है:
    • ऑल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग: निरंतर जल-भराव के स्थान पर धान के खेतों को आवधिक रूप से सुखाने से मीथेन उत्पन्न करने वाली अवायवीय परिस्थितियाँ कम होती हैं।
    • डायरेक्ट सीडेड राइस: जलमग्न खेतों में रोपाई के बिना बीजों की सीधी बुआई की जाती है, जिससे जल उपयोग एवं मीथेन उत्सर्जन में कमी आती है।
  • लाभ: यह पहल जलवायु कार्रवाई को आजीविका संबंधी लाभों के साथ संयुक्त करती है। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण, वित्तीय प्रोत्साहन, उच्च उपज, कम इनपुट लागत एवं बेहतर सुदृढ़ता प्रदान करती है।
  • कार्यान्वयन: वेरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड (VCS) के तहत डिजिटल निगरानी और तीसरे पक्ष के सत्यापन द्वारा समर्थित, अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) के सहयोग से क्षेत्र-आधारित विधियों के माध्यम से उत्सर्जन में कमी को मापा जाता है।
  • महत्त्व: वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में धान की कृषि का योगदान 8-10% है। भारत एक प्रमुख धान उत्पादक और उत्सर्जक होने के नाते, लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से जलवायु शमन की उच्च क्षमता रखता है।

और पढ़ें: भारत में कार्बन क्रेडिट: उम्मीद और चुनौतियाँ 


रैपिड फायर

स्वचालित उपकरणों में इन्फ्रारेड सेंसर तकनीक

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में सेंसर-आधारित उपकरणों की कार्यप्रणाली ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें टचलेस ऑपरेशन को सक्षम करने में इन्फ्रारेड (IR) तकनीक और सेंसर की भूमिका को रेखांकित किया गया है।

  • प्रकाश की प्रकृति: प्रकाश एक विद्युत चुंबकीय तरंग है, जिसमें दोलन करने वाले विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र होते हैं और यह निर्वात में भी गमन करने में सक्षम हैं।
  • वर्णक्रम: प्रकाश के वर्णक्रम का तात्पर्य उनकी आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य के अनुसार व्यवस्थित विद्युत चुंबकीय तरंगों की संपूर्ण शृंखला से है। इसमें रेडियो तरंगें, सूक्ष्म तरंगें, अवरक्त तरंगें, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी किरणें, एक्स-किरणें और गामा किरणें शामिल हैं।
    • मनुष्य इस वर्णक्रम के केवल एक संकीर्ण बैंड (दृश्य प्रकाश) को ही देख सकता है, जबकि अवरक्त विकिरण आवृत्ति में लाल प्रकाश के ठीक नीचे स्थित होता है और मानवीय आँखों के लिये अदृश्य रहता है।
  • स्रोत: रिमोट और स्वचालित वॉशबेसिन जैसे उपकरण इन अदृश्य अवरक्त तरंगों को उत्सर्जित करने के लिये अवरक्त LED (लाइट-एमिटिंग डायोड) का उपयोग करते हैं।
  • सेंसर: इनकी पहचान फोटोडायोड नामक सेंसर द्वारा की जाती है, जो प्रकाश-संवेदनशील स्विच के रूप में कार्य करते हैं। जब उन पर अवरक्त प्रकाश पड़ता है, तो वे विद्युत प्रवाह को गुज़रने देते हैं, जिससे एक प्रतिक्रिया शुरू होती है।
  • कार्यप्रणाली: वॉशबेसिन जैसे स्वचालित उपकरणों में अवरक्त प्रकाश सामान्यतः सेंसर तक नहीं पहुँचता है; हालाँकि जब हाथ जैसी कोई वस्तु पास में रखी जाती है, तो वह अवरक्त तरंगों को परावर्तित करके पुनः सेंसर तक भेज देती है, जिससे सिस्टम सक्रिय हो जाता है।
  • उपयोग: ऐसी तकनीकों का व्यापक रूप से स्वचालित दरवाज़ों, एस्केलेटर, ड्रायर और रिमोट कंट्रोल में उपयोग किया जाता है।
  • आधार: इसके पीछे का विज्ञान प्रकाशिकी, विद्युत चुंबकत्व, संघनित द्रव्य भौतिकी और क्वांटम मेकैनिक्स के सिद्धांतों को एकीकृत करता है, जहाँ पदार्थों में इलेक्ट्रॉनों के साथ प्रकाश की अंतःक्रिया सटीक सेंसिंग और स्वचालित प्रतिक्रियाओं को सक्षम बनाती है।

और पढ़ें: विद्युत चुंबकीय क्षेत्र (ईएमएफ) उत्सर्जन 


रैपिड फायर

भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास (DIVEX) 2026

स्रोत: द हिंदू 

भारतीय नौसेना का सबमरीन रेस्क्यू वेसल INS निरीक्षक, भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास (DIVEX 2026) के चतुर्थ संस्करण में भाग लेने हेतु कोलंबो पहुँच गया है। यह MAHASAGAR (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिये पारस्परिक व समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में गहरे होते समुद्री सहयोग और सक्रिय मानवीय पहुँच को उजागर करता है।

  • DIVEX 2026: यह अभ्यास विशेष अंडरवाटर ऑपरेशन पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य भारतीय और श्रीलंकाई नौसेनाओं के बीच परिचालन सामंजस्य, अंतर-संचालनीयता और समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना है।
    • यह तैनाती INS निरीक्षक की परिचालन तत्परता को प्रदर्शित करती है, जो विशेष रूप से गहरे समुद्र में गोताखोरी सहायता और पनडुब्बी बचाव मिशनों के लिये डिज़ाइन किया गया एक महत्त्वपूर्ण नौसैनिक पोत है।
  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR): भारत की 'पड़ोसी प्रथम' की नीति को आगे बढ़ाते हुए, इस मिशन में व्यापक आरोग्य मैत्री कार्यक्रम के अंतर्गत दो भीष्म (BHISM– Bharat Health Initiative for Sahyog Hita & Maitri) क्यूब्स प्रस्तुत किये जा रहे हैं। 
    • भीष्म क्यूब्स अत्यधिक पोर्टेबल और अत्याधुनिक चिकित्सा इकाइयों के रूप में कार्य करते हैं, जो स्वायत्त रूप से लगभग 200 आपातकालीन मामलों का प्रबंधन करने में सक्षम हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर आपदा शमन और चिकित्सा कूटनीति को बल मिलता है।
  • INS निरीक्षक: यह भारतीय नौसेना का एक डाइव सपोर्ट और सबमरीन रेस्क्यू वेसल है, जिसे वर्ष 1985 में मझगाँव शिपबिल्डर्स द्वारा बनाया गया था और यह वर्ष 1989 से परिचालन में है (1995 में कमीशन किया गया)। इसने गोताखोरी अभियानों में प्रमुख भूमिका निभाई है और 257 मीटर की सबसे गहरी गोताखोरी का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी इसके नाम है।

भारत-श्रीलंका रक्षा सहयोग

  • भारत और श्रीलंका ने अप्रैल 2025 में एक ऐतिहासिक 5-वर्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से रक्षा संबंधों को सुदृढ़ किया है, जो संयुक्त अभ्यास, समुद्री निगरानी और रक्षा उद्योग सहयोग को कवर करते हुए गहरे सैन्य और रणनीतिक जुड़ाव के लिये एक ढाँचे को संस्थागत बनाता है।
    • श्रीलंका ने अपनी इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि उसके क्षेत्र का उपयोग भारत के हितों के विरुद्ध नहीं किया जाएगा, जिससे रणनीतिक विश्वास को और बल मिला है।
  • SLINEX (नौसेना) और MITRA SHAKTI (सेना) जैसे नियमित द्विपक्षीय अभ्यास अंतर-संचालनीयता को और बढ़ाते हैं, जबकि भारत मानवीय सहायता और आपदा राहत में श्रीलंका के लिये 'प्रथम उत्तरदाता' के रूप में कार्य करना जारी रखे हुए है, जैसा कि वर्ष 2021 के एमवी एक्सप्रेस पर्ल डिजास्टर और ऑपरेशन सागर बंधु के दौरान प्रदर्शित हुआ था।

और पढ़ें: भारत-श्रीलंका संबंध 


चर्चित स्थान

तूती द्वीप सूडान

स्रोत: द हिंदू

तूती द्वीप, जो ऐतिहासिक रूप से सूडान में एक शांत कृषि आश्रय के रूप में जाना जाता था, वर्तमान में सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और अर्द्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) के बीच चल रहे गृहयुद्ध में एक प्रमुख केंद्र बन गया है।

  • सामरिक स्थिति: तूती द्वीप लगभग 8 वर्ग किमी. क्षेत्रफल वाला अर्द्धचंद्राकार भूभाग है, जो खार्तूम में श्वेत नील नदी और नीली नील नदी के संगम पर स्थित है, जहाँ युगांडा से बहने वाली श्वेत नील नदी, इथियोपिया से आने वाली नीली नील नदी से मिलती है और यह शहर की सबसे प्राचीन बसावटों में से एक है।
    • यह सूडान के त्रि-शहरी महानगरीय समूह के ठीक भौगोलिक केंद्र में स्थित है, जिसके दक्षिण में खार्तूम (राजनीतिक राजधानी), पश्चिम में ओमदुरमान (सबसे बड़ा शहर) और उत्तर-पूर्व में खार्तूम नॉर्थ अर्थात बहरी (औद्योगिक केंद्र) स्थित हैं।
  • भू-आकृतिक संरचना: यह नील नदी के ऐतिहासिक बाढ़ चक्रों द्वारा जमा जलोढ़ गाद से पूर्णतः निर्मित है, जिससे इसकी मृदा अत्यंत उपजाऊ बन गई है।
    • परंपरागत रूप से यह खार्तूम के लिये ताज़ा उपज का एक प्रमुख स्रोत रहा है, जहाँ कृषि और मात्स्यिकी पर निर्भरता के कारण इसे “खार्तूम का बगीचा” कहा जाता है।
  • जनसांख्यिकीय विरासत: पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से मुख्यतः महास जनजाति द्वारा आबाद, इस समुदाय ने पारंपरिक कृषि पद्धतियों और स्वदेशी प्रारंभिक बाढ़ चेतावनी प्रणालियों (जिसे अल-ताया प्रणाली कहा जाता है) को संरक्षित रखा है।
  • सूडान में शहरी युद्ध: अप्रैल 2023 में सूडान गृहयुद्ध के प्रारंभ होने के बाद, रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) ने जून 2023 से मार्च 2025 तक नाकाबंदी लागू की, जिससे यह द्वीप एक खुले कारागार में परिवर्तित हो गया, जहाँ आवागमन और आपूर्ति पर कड़ा नियंत्रण था।
    • निवासियों को खाद्य पदार्थों, दवाइयों और ईंधन की तीव्र कमी का सामना करना पड़ा तथा आवश्यक वस्तुओं तक पहुँच के लिये अक्सर भारी रिश्वत देनी पड़ती थी। यह नाकाबंदी भूख को एक हथियार के रूप में उपयोग करने को दर्शाती है।
    • हार्ट परियोजना (हेरिटेज एंपावर्ड एक्शन फॉर रिस्क इन तूती) को ताया प्रणाली के ज्ञान के संरक्षण हेतु प्रारंभ किया गया, जो विस्थापन के कारण संकट में है।

और पढ़ें: सूडान गृहयुद्ध 


प्रारंभिक परीक्षा

ऑनलाइन गेमिंग के संवर्द्धन और विनियमन नियम, 2026

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ऑनलाइन गेमिंग के संवर्द्धन और विनियमन (PROG) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जो 1 मई, 2026 से प्रभावी होंगे।

ऑनलाइन गेमिंग के संवर्द्धन और विनियमन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?

  • परिचय: ऑनलाइन गेमिंग के संवर्द्धन और विनियमन नियम, 2026 भारत के ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र के लिये एक संरचित नियामक ढाँचा प्रदान करते हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन धन आधारित खेलों का विनियमन करते हुए ई-स्पोर्ट्स और सुरक्षित डिजिटल गेमिंग के विकास को बढ़ावा देना है।
  • उद्देश्य: ये नियम उपयोगकर्त्ताओं, विशेषकर बच्चों, को वित्तीय हानि और लत से सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं, साथ ही उद्योग के लिये नियामकीय निश्चितता सुनिश्चित करते हैं।
    • इनका लक्ष्य अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकना, ज़िम्मेदार गेमिंग को प्रोत्साहित करना तथा नियामकों, वित्तीय संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना है।

प्रमुख प्रावधान

  • भारत ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण (OGAI): यह इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक संबद्ध कार्यालय के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में स्थित है और इसे मुख्यतः डिजिटल-प्रथम कार्यालय के रूप में कार्य करने का दायित्व दिया गया है।
    • इसकी अध्यक्षता इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव द्वारा (पदेन रूप से) की जाती है। समग्र शासन सुनिश्चित करने के लिये इसमें गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवाएँ विभाग), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय तथा विधि तथा न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
    • यह प्राधिकरण प्रतिबंधित धन-आधारित खेलों की सार्वजनिक सूचियाँ बनाए रखने, संचालन संबंधी आचार संहिता जारी करने, उपयोगकर्त्ता शिकायतों का निस्तारण करने तथा लक्षित प्रवर्तन कार्यवाहियाँ संचालित करने का दायित्व निभाता है।
  • ऑनलाइन गेम का निर्धारण: नियमों में ऑनलाइन गेमिंग के संवर्द्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत यह निर्धारित करने के लिये एक परीक्षण का प्रावधान किया गया है कि कोई ऑनलाइन गेम धन-आधारित खेल है या नहीं।
    • यह प्रक्रिया प्राधिकरण, सेवा प्रदाताओं या सरकार द्वारा दाँव, पुरस्कार और मुद्रीकरण जैसे कारकों के आधार पर प्रारंभ की जा सकती है।
    • इस प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाना है तथा प्रत्येक खेल के लिये अंतिम निर्णय निर्धारण आदेश के रूप में जारी किया जाता है।
  • ऑनलाइन गेम का पंजीकरण: पंजीकरण पूर्णतः अनिवार्य नहीं है; यह केवल उन खेलों के लिये अनिवार्य है जिन्हें ई-स्पोर्ट्स के रूप में मान्यता दी जानी है या केंद्र द्वारा अधिसूचित विशिष्ट सामाजिक खेलों के लिये अनिवार्य है।
    • सफल पंजीकरण पर एक डिजिटल प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है जो 10 वर्षों तक वैध होता है।
    • नियम स्पष्ट रूप से निर्देश देते हैं कि "ऑनलाइन मनी गेम" राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के तहत ई-स्पोर्ट्स के रूप में मान्यता या पंजीकरण के लिये पूर्णतः अयोग्य है।
  • उपयोगकर्त्ता सुरक्षा विशेषता: नियम उपयोगकर्त्ताओं की सुरक्षा सुविधाओं को अनिवार्य बनाते हैं, जिसमें आयु सत्यापन, समय सीमा, माता-पिता का नियंत्रण, रिपोर्टिंग टूल, परामर्श सहायता और फेयर-प्ले (निष्पक्ष खेल) निगरानी शामिल हैं।
    • सेवा प्रदाताओं को पंजीकरण या निर्धारण के दौरान इन सुरक्षा उपायों और अपनी शिकायत निवारण प्रणाली का खुलासा करना होगा।
  • शिकायत निवारण और अपीलीय तंत्र: नियम दो-स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली प्रदान करते हैं, जहाँ शिकायतों का समाधान पहले सेवा प्रदाता द्वारा किया जाता है, उसके बाद प्राधिकरण को अपील की जाती है और अंत में सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), को अपील की जाती है। प्रत्येक चरण का समाधान 30 दिनों के भीतर किया जाना आवश्यक है।
  • दंड और प्रवर्तन: प्रवर्तन कार्यवाही डिजिटल रूप से संचालित की जाएगी, जो 90 दिनों के भीतर संपन्न होगी।
    • जुर्माना उल्लंघन की गंभीरता, उपयोगकर्त्ता को हुई हानि, बार-बार होने वाले उल्लंघन और अनुपालन न करने से प्राप्त वित्तीय लाभ के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

ऑनलाइन गेमिंग

  • परिचय: ऑनलाइन गेम को उन खेलों के रूप में परिभाषित किया गया है, जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल उपकरणों पर खेले जाते हैं और इंटरनेट या अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित होते हैं।
    • यह खिलाड़ियों के स्थान की परवाह किये बगैर उनके बीच वास्तविक समय में बातचीत और प्रतिस्पर्द्धा की सुविधा प्रदान करता है।
  • वर्गीकरण:
    • कौशल-आधारित खेल: ये खेल भाग्य के बजाय कौशल को प्राथमिकता देते हैं और भारत में कानूनी रूप से मान्य हैं। उदाहरण के लिये: गेम 24X7, ड्रीम11 और मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL)।
    • भाग्य-आधारित खेल: इनका परिणाम कौशल के बजाय मुख्य रूप से भाग्य पर निर्भर करता है, जो भारत में अवैध हैं। उदाहरण के लिये रूलेट, जो मुख्य रूप से मौद्रिक पुरस्कारों के लिये खिलाड़ियों को आकर्षित करता है।
  • बाज़ार का आकार: वर्ष 2023 में भारत 568 मिलियन गेमर और 9.5 बिलियन ऐप डाउनलोड के साथ दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग बाज़ार बन गया।
    • ऑनलाइन गेमिंग उद्योग एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसके वर्ष 2028 तक 8.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बाज़ार आकार तक पहुँचने का अनुमान है।

ऑनलाइन गेमिंग (संवर्द्धन एवं विनियमन) अधिनियम, 2025

  • PROG अधिनियम, 2025 ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र को विनियमित और प्रोत्साहित करने के लिये एक व्यापक कानूनी ढाँचा स्थापित करता है, साथ ही एक सुरक्षित और उत्तरदायी डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करता है।
  • यह ऑनलाइन धन-आधारित खेलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, जिसमें उनके संचालन, विज्ञापन और वित्तीय लेन-देन पर रोक शामिल है तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ऐसे प्लेटफॉर्म से संबंधित भुगतान संसाधित करने से प्रतिबंधित किया जाता है।
  • यह अधिनियम ऑनलाइन खेलों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:
    • ई-स्पोर्ट्स, जिन्हें वैध प्रतिस्पर्द्धी कौशल-आधारित खेलों के रूप में मान्यता दी गई है।
    • ऑनलाइन सोशल गेम्स, जो मुख्यतः कौशल-आधारित होते हैं और मनोरंजन या पारस्परिक सहभागिता के लिये होते हैं।
    • ऑनलाइन मनी गेम्स, जिनमें वित्तीय दाँव शामिल होता है और जिन्हें पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।
  • यह अधिनियम पूरे देश में लागू होता है और भारत में उपलब्ध घरेलू तथा विदेशी (ऑफशोर) दोनों प्रकार के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को इसके दायरे में शामिल करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. PROG नियम, 2026 का उद्देश्य क्या है?
ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करना, वित्तीय जोखिम एवं लत को रोकना तथा सुरक्षित ई-स्पोर्ट्स विकास को नियामकीय स्पष्टता के साथ प्रोत्साहित करना इसका उद्देश्य है। 

2. भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण (OGAI) की क्या भूमिका है?
OGAI इस क्षेत्र का विनियमन करता है, प्रतिबंधित सूची का रखरखाव करता है, कोड जारी करता है, शिकायतों का निवारण करता है तथा अनुपालन सुनिश्चित करता है। 

3. क्या PROG ढाँचे के तहत ऑनलाइन मनी गेम्स की अनुमति है?
नहीं, ऑनलाइन मनी गेम्स पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, जिनमें वित्तीय लेन-देन और प्लेटफॉर्म संचालन दोनों शामिल हैं। 

4. नियमों के तहत कौन-से उपयोगकर्त्ता सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं?
आयु सत्यापन, अभिभावकीय नियंत्रण, समय सीमा निर्धारण, शिकायत निवारण तंत्र तथा परामर्श सहायता जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएँ अनिवार्य हैं। 

5. PROG अधिनियम, 2025 के तहत ऑनलाइन खेलों का वर्गीकरण कैसे किया गया है?
इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है: ई-स्पोर्ट्स (कौशल-आधारित), सोशल गेम्स (गैर-आर्थिक) और मनी गेम्स (प्रतिबंधित)। 


UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रिलिम्स 

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा/से भारत सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ योजना का/के उद्देश्य है/हैं?  (2018)

  1. भारत की अपनी इंटरनेट कंपनियों का गठन, जैसा कि चीन ने किया।   
  2. एक नीतिगत ढाँचे की स्थापना जिससे बड़े आँकड़े एकत्रित करने वाली समुद्रपारीय बहु-राष्ट्रीय कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा सके कि वे हमारी राष्ट्रीय भौगोलिक सीमाओं के अंदर अपने बड़े डेटा केंद्रों की स्थापना करें।   
  3. हमारे अनेक गाँवों को इंटरनेट से जोड़ना तथा हमारे बहुत से विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों एवं प्रमुख पर्यटक केंद्रों में वाई-फाई की सुविधा प्रदान करना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 3

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


मेन्स 

प्रश्न. चर्चा कीजिये कि किस प्रकार उभरती प्रौद्योगिकियाँ और वैश्वीकरण मनी लॉन्ड्रिंग में योगदान करते हैं । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर मनी लॉन्ड्रिंग की समस्या से निपटने के लिये किये जाने वाले उपायों को विस्तार से समझाइये। (2021)


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