एडिटोरियल (06 Jan, 2022)



भारत में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर्स पारितंत्र

यह एडिटोरियल 03/01/2022 को ‘लाइवमिंट’ में प्रकाशित “It’s in India’s National Interest to Promote Open Source Software” लेख पर आधारित है। इसमें ‘फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर्स’ के बढ़ते महत्त्व और भारत के प्रौद्योगिकीय विकास में इसकी भूमिका के संबंध में चर्चा की गई है।

संदर्भ

पिछले 20 वर्षों में सबसे विस्मयकारी प्रौद्योगिकीय विकासों में से एक दुनिया भर में ‘फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर’ (FOSS) का तीव्रता से विकास हो रहा है।  

अधिकांश डिजिटल अनुभव आज ‘फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर’ द्वारा संचालित हैं और भारत का 85% से अधिक इंटरनेट FOSS पर ही सक्रिय है। न्यायालय, IRCTC और भारतीय स्टेट बैंक जैसे प्रमुख संस्थान परिचालन स्तर की वृद्धि और लाखों लोगों को समयबद्ध कुशल डिजिटल सेवाएँ प्रदान करने के लिये FOSS पर ही निर्भर हैं।    

FOSS प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण करता है और संगठनों को प्रतिभा के वैश्विक पूल तथा सुरक्षित, विश्वसनीय एवं स्केलेबल सॉफ्टवेयर विकसित करने हेतु आवश्यक उपकरणों तक पहुँच प्रदान कर तीव्र नवाचार को सक्षम बनाता है।

फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर को बढ़ावा देना भारत के राष्ट्रीय हित में है, क्योंकि यह भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करेगा। 

फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर्स

  • परिचय: FOSS का अर्थ यह नहीं है कि सॉफ्टवेयर निःशुल्क उपलब्ध है। ‘फ्री’ शब्द इंगित करता है कि सॉफ्टवेयर में कॉपीराइट के संबंध में कोई बाधा नहीं है।  
    • इसका अर्थ है कि सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड सभी के लिये खुला/ओपन है और कोई भी कोड का उपयोग, अध्ययन और संशोधन करने के लिये स्वतंत्र है।  
    • यह अन्य लोगों को भी एक समुदाय की तरह सॉफ्टवेयर के विकास और सुधार में योगदान करने की अनुमति देता है।
    • FOSS को फ्री/लिबरा ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (FLOSS) के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है। 
    • FOSS के उदाहरणों में MySQL, Firefox, Linux आदि शामिल हैं।  
  • FOSS का महत्त्व: FOSS वर्तमान में व्यापक पैमाने पर प्रौद्योगिकियों के निर्माण हेतु एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत करता है।  
    • प्रोपराइटरी सॉफ्टवेयर के विपरीत सभी को ओपन-सोर्स कोड को संपादित करने, संशोधित करने और पुन: उपयोग करने की स्वतंत्रता होती है। 
    • इसके परिणामस्वरूप कई लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे लागत में कमी, कोई वेंडर लॉक-इन नहीं, स्थानीय संदर्भ के लिये अनुकूलित करने की क्षमता और व्यापक सहयोग के माध्यम से वृहत नवाचार।  
    • विभिन्न FOSS समुदाय, डेटा गोपनीयता सिद्धांतों के पालन के लिये ओपन-सोर्स कोड की जाँच कर सकते हैं, बग्स (Bugs) खोजने में मदद कर सकते हैं और पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं।  
  • भारत और FOSS:
    • आरंभिक प्रयास: सरकारों द्वारा ओपन सोर्स को बढ़ावा देने के आरंभिक प्रयासों में अधिकांशतः लिनक्स-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम और ओपन डॉक्यूमेंट फॉर्मेट को अपनाना शामिल था।  
      • हालाँकि, यह विफल रहा क्योंकि सरकारें निगमों या ओपन-सोर्स समुदायों की तुलना में बेहतर उपभोक्ता उत्पाद का निर्माण नहीं कर सकीं।
    • FOSS डेवलपर्स का वर्तमान परिदृश्य: भारतीय डेवलपर्स इस पारितंत्र में प्रमुख भूमिका निभा रहें हैं। ’GitHub’ के अनुसार, वर्ष 2021 में इसके 73 मिलियन उपयोगकर्त्ताओं में से 7.2 मिलियन से अधिक भारत से थे, जो भारत को चीन (7.6 मिलियन) और अमेरिका (13.5 मिलियन) के बाद तीसरे स्थान पर रखता है।      
      • लेकिन भारतीय डेवलपर बेस का तेज़ी से विस्तार हो रहा है, जहाँ वर्ष 2020-21 में चीन में 16% और अमेरिका में 22% की तुलना में यह लगभग 40% रहा।
      • ‘GitHub’ का अनुमान है कि वर्ष 2023 इस प्लेटफॉर्म पर 10 मिलियन भारतीय डेवलपर्स हो जाएंगे।
      • लाखों भारतीय डेवलपर्स वैश्विक ओपन-सोर्स इकोसिस्टम से जुड़े हुए हैं जो एक अच्छा संकेत है और यह उच्च-प्रौद्योगिकी भू-राजनीति में भारत के लिये प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ का स्रोत बन सकता है।  
    • संबंधित पहल: अप्रैल 2021 में इलेक्ट्रॉनिकी एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) ने सरकार में फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (FOSS) को अपनाने में तेज़ी लाने के लिये ’#FOSS4GOV इनोवेशन चैलेंज’ की घोषणा की थी।   
      • यह सरकारी प्रौद्योगिकियों (GovTech) में प्रमुख समस्याओं को हल करने के लिये FOSS समुदाय और स्टार्ट-अप्स की नवाचार क्षमता का उपयोग करेगा।  
      • यह ’GovTech 3.0’ का एक प्रमुख घटक है, जो सुरक्षित एवं समावेशी ओपन डिजिटल इकोसिस्टम (ODEs) के निर्माण से संबंधित है।   

संबद्ध चुनौतियाँ 

  • भारत में घरेलू FOSS नवाचारों की कमी: मज़बूत खपत के बावजूद, भारत संवहनीय घरेलू FOSS नवाचारों के निर्माण में वैश्विक स्तर पर बहुत पीछे है।  
    • भारत से पर्याप्त FOSS योगदान की कमी के परिणामस्वरूप ही देश के सॉफ्टवेयर पारितंत्र में भारत की विविध भाषाओं, सांस्कृतिक संदर्भों और जीवित अनुभवों के प्रतिनिधित्व का अभाव है।  
    • ये कारक नए इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं के लिये डिजिटल अंगीकरण को बाधित करते हैं।  
  • FOSS के विषय में भ्रांतियाँ: FOSS में प्रायः ‘फ्री’ को ‘मुफ्त’ मान लिया जाता जाता है और इसलिये कई लोग सोचते हैं कि FOSS पर आधारित समाधान पर्याप्त नहीं हैं।  
    • उदाहरण के लिये, FOSS को प्रायः कम भरोसेमंद और अधिक असुरक्षित माना जाता है, जबकि वास्तव में यह सरकार और नागरिकों के बीच अधिक भरोसे का निर्माण कर सकता है।  
  • FOSS में जवाबदेही का अभाव: एक और महत्त्वपूर्ण समस्या यह है कि किसी प्रोपराइटरी सॉफ्टवेयर विक्रेता से निपटना प्रायः आसान नज़र आता है और उसे किसी भी विफलता के लिये उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।
    • FOSS के मामले में एक स्पष्ट ‘ओनर’ (Owner) की अनुपस्थिति होती है, जिससे यह चिह्नित करना कठिन हो जाता है कि उत्तरदायी कौन है।   
  • संचालन संबंधी कमियाँ: ओपन-सोर्स घटकों का उपयोग बहुत सारे अतिरिक्त कार्य का सृजन कर सकता है।  
    • इस बात का ध्यान रखना होता है कि कौन से घटक उपयोग किये जा रहे हैं, सॉफ्टवेयर का कौन-सा संस्करण प्रयुक्त है और वे उपयोग में आने वाले अन्य घटकों के साथ किस प्रकार अंतःक्रिया कर सकते हैं।
  • बौद्धिक संपदा संबंधी समस्याएँ: वर्तमान में 200 से अधिक प्रकार के लाइसेंस मौजूद हैं, जिन्हें ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर पर लागू किया जा सकता है।
    • इनमें से कई लाइसेंस एक-दूसरे के साथ असंगत हैं, जिसका अर्थ यह है कि कुछ घटकों का एक साथ उपयोग नहीं किया जा सकता है। क्योंकि ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर का उपयोग करते समय सभी शर्तों का पालन करना होता है।  
    • जितने अधिक घटकों का उपयोग किया जाता है, सभी लाइसेंस शर्तों को ट्रैक करना और उनकी तुलना करना उतना ही कठिन होता जाता है।

आगे की राह

  • ‘GovTech’ में FOSS: पहला कदम सरकार में FOSS को बढ़ावा देना है। ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर को अपनाने के संबंध में सरकार के लिये आवश्यक है कि वह सभी तकनीकी आपूर्तिकर्त्ता ओपन सोर्स विकल्पों के साथ बोलियाँ (Bids) जमा करना अनिवार्य बनाए।   
    • RFPs (Request for Proposals) में मूल्यांकन मानदंड में FOSS-विशिष्ट मेट्रिक्स को औपचारिक रूप से अधिक वेटेज देकर और FOSS पहलों को तैनात करने वाले विभागों को मान्यता प्रदान कर (जैसे डिजिटल इंडिया अवार्ड के तहत इसके लिये एक विशेष श्रेणी बना दी जाए) यह नीतिगत ढाँचा एक और कदम आगे बढ़ेगा।      
  • राष्ट्रीय हित में ओपन सोर्स प्रौद्योगिकी: भारत को अपनी स्वतंत्र प्रौद्योगिकीय शक्ति को अधिकतम करना चाहिये। वास्तव में प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अर्थशास्त्र और उसकी राजनीति को देखते हुए ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर भारत के राष्ट्रीय हित में है।   
    • हर चीज़ की पुनर्रचना और स्थानीयकरण पर बल देने के माध्यम से प्रौद्योगिकीय संप्रभुता पाने के प्रयास की तुलना में ओपन-सोर्स परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना कहीं अधिक उत्पादक होगा।
    • यह अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियों (और उनके पीछे की सरकारों) पर निर्भरता को कम करने का एक भरोसेमंद उपाय होगा।  
  • ओपन-सोर्स अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना: भारत को अब ओपन-सोर्स अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिये, जहाँ ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के निर्माण में अधिक निवेश हेतु डेवलपर्स एवं फर्मों के पक्ष में प्रोत्साहन सृजन के लिये विभिन्न नीतिगत उपाय आगे बढ़ाने होंगे।   
    • इसे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी डेवलपर्स और फर्म के सृजन पर लक्षित होना चाहिये जो प्रौद्यिगिकी पारितंत्र में महत्त्वपूर्ण नोड का रूप ग्रहण करेंगे।  
    • महामारी बाद के विश्व में गिग इकोनॉमी का आकार बढ़ेगा और इसलिये इस क्षेत्र में योगदान कर सकने के लिये इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। 
  • प्रौद्योगिकी संस्थानों की भूमिका: इंजीनियरिंग कॉलेजों को अपने छात्रों को ओपन सोर्स परियोजनाओं में भाग लेने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये।   
    • एक स्वस्थ ओपन-सोर्स इकोसिस्टम सुनिश्चित करना वास्तव में एक बड़े आईटी उद्योग वाले देश के लिये सामाजिक उत्तरदायित्व का विषय है। 
    • यदि ओपन-सोर्स परियोजनाओं के लिये समर्थन को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) प्रतिबद्धताओं की संतुष्टि के रूप में मान्यता दी जाती है तो और अधिक डेवलपर्स इनकी ओर आकर्षित होंगे।  
      • यह विश्व के सूचना अवसंरचना के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से को बनाए रखने के लिये कुछ ही व्यक्तियों पर निर्भरता की संभावना को कम करेगा।
  • FOSS उत्कृष्टता केंद्र: भारत में FOSS के नेतृत्व वाले नवाचार के लिये एक विश्वसनीय संस्थागत सहारे की भी ज़रूरत है जो पूरे भारत में फैले FOSS नेतृत्वकर्त्ताओं और समुदायों को एक साथ ला सके।   
    • केरल का ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर’ (ICFOSS) एक ऐसा ही संस्थान है जिसके कारण केरल FOSS को अपनाने के मामले में अग्रणी राज्य बन गया है। 
    • एक राष्ट्रीय ‘FOSS उत्कृष्टता केंद्र’ पूंजी, संसाधन और क्षमता-निर्माण समर्थन जुटाने में मदद कर सकता है, जिससे विश्वस्तरीय ‘मेड-इन-इंडिया’ FOSS उत्पादों के निर्माण के लिये अत्यंत आवश्यक गति पैदा हो सकती है।  

निष्कर्ष

भारत ‘GovTech’ में FOSS के अधिकाधिक अंगीकरण की दिशा में अपनी यात्रा के एक महत्त्वपूर्ण मोड़ पर है। चार मिलियन से अधिक कर्मियों के आईटी कार्यबल और दुनिया के लिये बेहद आकर्षक एक सॉफ्टवेयर उद्योग के साथ भारत के पास पहले से ही आवश्यक प्रतिभा मौजूद है और आवश्यकता यह है कि FOSS के सबसे बड़े वादे, यानी सहयोगात्मक प्रौद्योगिकीय नवाचार की संभावना, का लाभ उठाने के लिये ठोस प्रयास किया जाए।

अभ्यास प्रश्न: भारत को एक ओपन-सोर्स अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने हेतु उठाए जा सकने वाले कदमों की चर्चा कीजिये।