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भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता

प्रिलिम्स के लिये: मुक्त व्यापार समझौता, मोस्ट फेवर्ड नेशन, भौगोलिक संकेत, राष्ट्रमंडल, हिंद-प्रशांत महासागर पहल, परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (NSG), फाइव आइज़

मेन्स के लिये: भारत और न्यूज़ीलैंड (NZ) के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रमुख विशेषताएँ और इसका महत्त्व, भारत के मुक्त व्यापार समझौते और वैश्विक व्यापार रणनीति हिंद-प्रशांत भू-राजनीति और भारत की भूमिका

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

भारत और न्यूज़ीलैंड ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किये, जो द्विपक्षीय संबंधों में प्रमुख भूमिका को दर्शाता है। इस समझौते का लक्ष्य पाँच वर्षों में व्यापार को दोगुना करके 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना है, जो बाज़ार पहुँच के विस्तार, टैरिफ में कमी और वस्तुओं, सेवाओं तथा श्रम गतिशीलता में सहयोग को बढ़ावा देकर प्राप्त किया जाएगा।

  • यह FTA दोनों देशों में सभी घरेलू प्रक्रियाओं के पूरा होने और अनुसमर्थन के पश्चात लागू होगा।

सारांश

  • भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 100% शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करता है, MSME, सेवाओं, गतिशीलता को बढ़ावा देता है और इसमें 20 अरब अमेरिकी डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता शामिल है, जो व्यापार एवं आर्थिक संबंधों को मज़बूत करती है।
  • यह समझौता बाज़ार पहुँच को घरेलू संरक्षण के साथ संतुलित करता है, हिंद-प्रशांत सहयोग को बढ़ाता है और विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण के तहत भारत के वैश्विक व्यापार फुटप्रिंट का विस्तार करता है।

भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

  • भारतीय निर्यात के लिये अभूतपूर्व बाज़ार पहुँच: FTA न्यूज़ीलैंड में भारतीय निर्यातों को 100% शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करता है, जिससे MSME और वस्त्र, चमड़ा तथा इंजीनियरिंग वस्तुओं जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा मिलता है।
    • यह पिछले टैरिफ (10% तक) को समाप्त करता है और समान अवसर सुनिश्चित करता है।
    • भारत को वुडन लॉग्स, कोकिंग कोयला और धातु स्क्रैप जैसे प्रमुख आगतों तक शुल्क-मुक्त पहुँच प्राप्त होती है, जिससे लागत कम होती है और विनिर्माण प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ती है।
  • न्यूज़ीलैंड के लिये संतुलित बाज़ार पहुँच: भारत ने 70.03% टैरिफ सीमाओं पर टैरिफ उदारीकरण की पेशकश की है (जो द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के लगभग 95% को कवर करता है)।
    • इनमें से 30% सीमाओं पर तत्काल शुल्क उन्मूलन होगा, जबकि शेष पर 3 से 10 वर्षों में चरणबद्ध कटौती होगी।
  • संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों का संरक्षण: घरेलू किसानों और उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिये भारत ने 29.97% टैरिफ लाइनों को बहिष्करण सूची में रखा है।
    • बहिष्कृत वस्तुओं में शामिल हैं: सभी डेयरी उत्पाद (दुग्ध, पनीर, दही आदि), संवेदनशील कृषि उत्पाद (प्याज़, मटर, मक्का), हथियार और गोला-बारूद तथा विशिष्ट रत्न एवं आभूषण।
  • विशाल निवेश प्रतिबद्धता: न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने के लिये एक बाध्यकारी प्रतिबद्धता बनाई है।
    • समझौते हेतु निवेश वितरण में किसी भी कमी को दूर करने के लिये एक रीबैलेंसिंग क्लॉज़ शामिल है, जो ठोस आर्थिक परिणाम सुनिश्चित करता है।
  • सेवा क्षेत्र: न्यूज़ीलैंड 118 सेवा क्षेत्रों (आईटी, शिक्षा, वित्त, पर्यटन आदि) में बाज़ार पहुँच प्रदान करता है, साथ ही 139 उप-क्षेत्रों में सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) प्रतिबद्धता प्रदान करता है, जो भारतीय पेशेवरों, महिलाओं और युवाओं के लिये अवसरों को बढ़ाता है।
  • गतिशीलता एवं रोज़गार के अवसर: FTA भारतीयों के लिये 5,000 अस्थायी रोज़गार प्रवेश वीज़ा (3 वर्ष तक), जैसे– आईटी, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा क्षेत्रों में नए मार्ग बनाता है।
    • यह भारतीय छात्रों पर सीमा हटाता है, अध्ययन के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने की अनुमति देता है, 3-4 वर्ष तक अध्ययनोपरांत कार्य अधिकार प्रदान करता है और वर्किंग होलीडे वीजा शामिल करता है, जिससे वैश्विक अनुभव और कौशल गतिशीलता को बढ़ावा मिलता है।
  • कृषि उत्पादकता और किसान समर्थन: यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) उत्कृष्टता केंद्रों, बेहतर रोपण सामग्री, अनुसंधान और तकनीकी सहायता के माध्यम से कृषि विकास को बढ़ावा देता है, जिससे उत्पादकता, आपूर्ति शृंखला और किसानों की आय में सुधार होता है।  
    • सेब, कीवी, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसे आयातों को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के माध्यम से मूल्य सुरक्षा उपायों के साथ नियंत्रित किया जाता है, जिससे बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित होती है और घरेलू किसानों की सुरक्षा भी बनी रहती है। 
    • यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) साझा मानकों (ऑस्ट्रेलिया के माध्यम से) पर आधारित पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (MRA) को सक्षम बनाता है, जिससे भारतीय जैविक उत्पादों, जैसे– बासमती चावल, चाय और तिलहन के न्यूज़ीलैंड को निर्यात को बढ़ावा मिलता है। 
      • भारत 80 से अधिक जैविक उत्पादों का निर्यात करता है, और न्यूज़ीलैंड को 2,401.53 मीट्रिक टन के निर्यात में और वृद्धि की संभावना है, विशेष रूप से MRA के तहत बासमती चावल, चाय, अलसी के बीज और इसबगोल जैसे उत्पादों में। 
  • बौद्धिक संपदा अधिकार: न्यूज़ीलैंड 18 महीनों के भीतर अपने भौगोलिक संकेत (GI) कानून में संशोधन करेगा, ताकि केवल वाइन और स्पिरिट्स के अलावा भी भारतीय वस्तुओं को संरक्षण दिया जा सके, जिससे उसके बाज़ार में प्रतिष्ठित भारतीय GI उत्पादों का पंजीकरण संभव हो सके। 
  • मूल के नियम: यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कड़े उत्पाद-विशिष्ट मूल नियम (PSRs) स्थापित करता है, ताकि वास्तविक मूल्य संवर्द्धन सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ सत्यापन तंत्र और सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं, जिससे दुरुपयोग रोका जा सके और लाभ वास्तविक भारतीय निर्यातकों तक पहुँच सके। 
  • व्यापार उपचार: यह मुक्त व्यापार समझौता आयात में अचानक वृद्धि के खिलाफ सुरक्षा उपायों की अनुमति देता है, जिनमें शुल्क बढ़ाना या टैरिफ कटौती को अस्थायी रूप से रोकना शामिल है, लेकिन ये उपाय MFN दर की निम्नतम सीमा से अधिक नहीं हो सकते, जिससे घरेलू उद्योगों की संतुलित सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल उपकरण: यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वैश्विक बेहतर नैदानिक विधियाँ (GCP) और बेहतर विनिर्माण के तरीकों (GMP) अनुमोदनों (जैसे– US FDA, EMA) को मान्यता देकर बाज़ार में प्रवेश को तेज़ करता है। इससे दोहराव वाली निरीक्षण प्रक्रियाएँ कम होती हैं, लागत घटती है और भारतीय दवा एवं चिकित्सा उपकरणों के न्यूज़ीलैंड को निर्यात की पहुँच तेज़ हो जाती है। 
  • व्यापार सुगमता और सीमा शुल्क: यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 24–48 घंटे में माल की निकासी, कागज़रहित प्रणालियों तथा अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (AEO) तंत्र के माध्यम से तेज़ और पारदर्शी व्यापार को सक्षम बनाता है। साथ ही निर्यात विनिर्माण के लिये त्वरित आयात प्रक्रिया की सुविधा प्रदान करता है, जिससे MSMEs को बढ़ावा मिलता है तथा समग्र दक्षता में वृद्धि होती है। 
  • SPS और TBT उपाय: इस समझौते में सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी (SPS) तथा व्यापार में तकनीकी बाधाओं (TBT) पर समर्पित अध्याय शामिल हैं, जो अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाते हैं, प्रमाणन को आसान करते हैं एवं गैर-शुल्क बाधाओं को कम करते हैं, साथ ही सुरक्षा मानकों को भी सुनिश्चित करते हैं। 
  • सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान सहयोग: इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में पहली बार AYUSH, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, ऑडियो-विज़ुअल एवं रचनात्मक उद्योगों, खेलों तथा पर्यटन को बढ़ावा देने वाला एक अध्याय शामिल किया गया है, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान व क्षेत्रीय नवाचार को मज़बूत करता है। 

भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंध कैसे हैं?

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रथम विश्वयुद्ध (1915) के दौरान गैलीपोली में भारतीय सैनिकों ने ऑस्ट्रेलियाई और न्यूज़ीलैंड सेना (ANZAC) बलों के साथ मिलकर युद्ध लड़ा। 
    • औपचारिक राजनयिक संबंध 1952 में स्थापित किये गए। दोनों देश कॉमनवेल्थ के सदस्य हैं, जीवंत लोकतंत्र हैं जिनमें कॉमन लॉ प्रणाली लागू है तथा नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के समर्थक हैं। 
  • व्यापार: वर्ष 2024 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। भारत न्यूज़ीलैंड से ऊन, लोहा एवं इस्पात, फल और मेवे तथा एल्यूमिनियम का आयात करता है, जबकि दवाइयाँ, मशीनरी, वस्त्र तथा कीमती पत्थर एवं धातुओं का निर्यात करता है।
  • रक्षा और सुरक्षा: वर्ष 2025 की शुरुआत में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय रक्षा समझौते ने नियमित सैन्य सहभागिता और नौसैनिक बंदरगाह यात्राओं को मज़बूत किया है।
    • न्यूज़ीलैंड ने संयुक्त अभ्यासों के संचालन तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता में सुधार के लिये भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के साथ तालमेल बढ़ाने में रुचि दिखाई है।
  • बहुपक्षीय सहयोग: न्यूज़ीलैंड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी तथा परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (NSG) में उसके प्रवेश का समर्थन करता है। 
  • प्रवासी भारतीय और सांस्कृतिक संबंध: भारतीय प्रवासी समुदाय न्यूज़ीलैंड की जनसंख्या का लगभग 6% है, जो एक मज़बूत सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु के रूप में कार्य करता है।

भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों का क्या महत्त्व है?

भारत के लिये

  • हिंद-प्रशांत में रणनीतिक संतुलन: न्यूज़ीलैंड एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाए रखने में एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है, जो प्रशांत द्वीपों में चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति के बीच एक क्षेत्रीय आधार स्तंभ के रूप में कार्य करता है। 
  • उन्नत कृषि और प्रौद्योगिकी: डेयरी आधुनिकीकरण, बागवानी तथा सतत कृषि में न्यूज़ीलैंड की वैश्विक विशेषज्ञता भारत के खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि आपूर्ति शृंखलाओं के परिवर्तन में सहायक हो सकती है। 
  • ओशिनिया का प्रवेशद्वार: वेलिंग्टन के साथ मज़बूत संबंध ओशिनिया क्षेत्र में भारत की व्यापक कूटनीतिक और आर्थिक पहुँच को सुदृढ़ करते हैं तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के मज़बूत संबंधों को पूरक बनाते हैं। 

न्यूज़ीलैंड के लिये

  • आर्थिक विविधीकरण: न्यूज़ीलैंड ने अपनी ‘ओपनिंग डोर्स टू इंडिया’ नीति के तहत भारत को प्राथमिकता दी है, ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके।
    • बाज़ार के रूप में भारत: भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या और तेज़ी से बढ़ता मध्यम वर्ग न्यूज़ीलैंड के लिये एक महत्त्वपूर्ण और लाभकारी बाज़ार प्रस्तुत करता है।
  • कुशल कार्यबल: भारत न्यूज़ीलैंड के लिये कुशल प्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है, जो IT, स्वास्थ्य सेवाओं और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में श्रम की कमी को पूरा करता है।
  • डिजिटल बाज़ार: लगभग एक अरब इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं के साथ भारत न्यूज़ीलैंड की टेक कंपनियों के लिये AI, फिनटेक और डिजिटल कॉमर्स में व्यापक अवसर प्रदान करता है।

भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों में क्या चुनौतियाँ हैं?

  • भू-राजनीतिक मतभेद (हिंद-प्रशांत): न्यूज़ीलैंड की चीन पर मज़बूत आर्थिक निर्भरता (लगभग 30% निर्यात) के कारण उसकी रणनीतिक अस्पष्टता बनी रहती है। इससे वह भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप एक विश्वसनीय हिंद-प्रशांत साझेदार के रूप में पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाता। 
  • एंग्लोस्फीयर संरेखण बनाम रणनीतिक स्वायत्तता: फाइव आइज़ का सदस्य होने के कारण न्यूज़ीलैंड अक्सर मानवाधिकार और शासन से जुड़े मुद्दों पर अधिक निर्देशात्मक रुख अपनाता है, जो भारत की संप्रभुता-केंद्रित विदेश नीति से टकरा सकता है। 
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: उदार नीतियों के कारण खालिस्तान समर्थक तत्त्वों की उपस्थिति को बढ़ावा मिला है, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएँ गहरी हुई हैं और कनाडा के साथ संबंधों में देखे गए तनाव जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है।
  • लेन-देन आधारित संबंध: न्यूज़ीलैंड भारत को मुख्यतः श्रम स्रोत और शिक्षा बाज़ार के रूप में देखता है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका या इज़रायल जैसे साझेदारों की तरह गहन प्रौद्योगिकी, रक्षा या पूंजी क्षमता इसमें अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। 
  • कमज़ोर संस्थागत गहराई: आतंकवाद-रोधी सहयोग, महत्त्वपूर्ण खनिज और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उच्च-स्तरीय सहयोग सीमित है, जिससे इस साझेदारी की रणनीतिक गहराई कम हो जाती है।

भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को मज़बूत बनाने के लिये कौन-से उपाय किये जा सकते हैं?

  • आर्थिक तालमेल का पुनर्संतुलन: टैरिफ मुद्दों से आगे बढ़कर एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स में वैल्यू चेन एकीकरण पर ध्यान दिया जाए। साथ ही भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI, Aadhaar और ONDC) का उपयोग करते हुए 20 अरब डॉलर के निवेश को फास्ट-ट्रैक तंत्र के माध्यम से लागू किया जाए। 
  • हिंद-प्रशांत और रणनीतिक अभिसरण को गहरा करना: प्रशांत द्वीपों में सहयोग, हिंद-प्रशांत ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) में भागीदारी और समुद्री डोमेन जागरूकता को बढ़ाया जाए। साथ ही जलवायु समुत्थानशीलता, आपदा राहत और क्षेत्रीय स्थिरता पर संयुक्त प्रयास किये जाएँ। 
  • सुरक्षा सहयोग को संस्थागत बनाना: उग्रवाद और संप्रभुता संबंधी चिंताओं से निपटने के लिये खुफिया जानकारी साझा करने, MLAT ढाँचों और एक द्विपक्षीय आतंकवाद-रोधी तंत्र के माध्यम से संबंधों को सुदृढ़ करना।
  • भविष्य-उन्मुख साझेदारी का निर्माण: अंतरिक्ष, हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और क्लीन-टेक नवाचार में सहयोग को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक रणनीतिक एवं तकनीकी साझेदारी विकसित की जाए। 

निष्कर्ष


यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) एक समावेशी नई पीढ़ी की साझेदारी है, जो किसानों, MSME, महिलाओं, युवाओं और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करता है तथा बाज़ार पहुँच और घरेलू संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह भारत की वैश्विक व्यापार उपस्थिति को सुदृढ़ करता है, जिससे कुल FTA की संख्या 9 हो जाती है, जो 38 उन्नत अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं और वैश्विक GDP के लगभग 65-70% हिस्से को समाहित करते हैं। साथ ही, यह ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को भी समर्थन प्रदान करता है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न: “परंपरागत रूप से कॉमनवेल्थ संबंधों और क्रिकेट संबंधी भारत-न्यूज़ीलैंड संबंध अब हिंद-प्रशांत की रणनीतिक वास्तविकताओं और सुदृढ़ आर्थिक एकीकरण द्वारा अधिकाधिक परिभाषित हो रहे हैं।” चर्चा कीजिये। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. भारत-न्यूज़ीलैंड FTA की मुख्य विशेषता क्या है?
यह भारतीय निर्यातों के लिये 100% शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करता है तथा सेवाओं, गतिशीलता और निवेश सहयोग का विस्तार करता है। 

2. यह FTA भारतीय किसानों की सुरक्षा कैसे करता है?
डेयरी और अन्य प्रमुख कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर रखा गया है तथा आयात को TRQ (Tariff Rate Quotas) और सुरक्षा उपायों के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। 

3. यह FTA भारतीय पेशेवरों के लिये कौन-से अवसर उत्पन्न करता है?
यह 5,000 कार्य वीज़ा, 3-4 वर्षों के पोस्ट-स्टडी वर्क अधिकार तथा 118 सेवा क्षेत्रों तक पहुँच प्रदान करता है। 

4. यह FTA भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति को कैसे सुदृढ़ करता है?
यह भारत के FTA नेटवर्क को 9 समझौतों तक विस्तारित करता है, जो 38 अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक GDP के लगभग 65-70% हिस्से को कवर करते हैं, जिससे व्यापार एकीकरण सुदृढ़ होता है। 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा,  विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिये: (2025)

I. यूनाइटेड किंगडम

II. डेनमार्क

III. न्यूज़ीलैंड

IV. ऑस्ट्रेलिया

V. ब्राज़ील

उपर्युक्त देशों में से कितने देशों में चार से अधिक टाइम ज़ोन हैं?

(a) सभी पाँच

(b) केवल चार

(c) केवल तीन

(d) केवल दो

उत्तर: B


मेन्स 

प्रश्न. विश्व व्यापार में संरक्षणवाद और मुद्रा चालबाज़ियों की हाल की परिघटनाएँ भारत की समष्टि आर्थिक स्थिरता को किस प्रकार से प्रभावित करेंगी? (2018)


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