अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत-कोरिया गणराज्य रणनीतिक विज़न 2026–2030
प्रारंभिक परीक्षा: कोरिया गणराज्य, हिंद-प्रशांत महासागर पहल, पैक्स सिलिका पहल, वैश्विक हरित विकास संस्थान, K-9 वज्र
मेन्स के लिये: भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत रणनीति, द्विपक्षीय संबंध: भारत-कोरिया गणराज्य
चर्चा में क्यों?
भारत और कोरिया गणराज्य ने कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान 2026–2030 के लिये एक संयुक्त रणनीतिक विज़न प्रस्तुत की है।
- यह दृष्टि राजनीतिक, आर्थिक, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत-कोरिया गणराज्य विशेष सामरिक साझेदारी को गहरा करने के लिये एक महत्त्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत करती है।
सारांश
- भारत-कोरिया गणराज्य संयुक्त रणनीतिक विज़न (2026–2030) आर्थिक संबंधों से आगे बढ़कर एक व्यापक सामरिक साझेदारी की ओर परिवर्तन को दर्शाता है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा और जलवायु सहयोग जैसे क्षेत्रों को समाहित करता है।
- इसकी सफलता व्यापार असंतुलन को दूर करने, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग को गहरा करने तथा भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं में सामंजस्य स्थापित करने पर निर्भर करती है, ताकि इस साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार किया जा सके।
भारत-कोरिया गणराज्य संयुक्त रणनीतिक विज़न (2026-2030) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
- राजनीतिक और संस्थागत सहभागिता को सुदृढ़ करना: भारत और कोरिया गणराज्य ने वार्षिक शीर्ष-स्तरीय बैठकों, विस्तारित मंत्रिस्तरीय संवादों और उद्योग-स्तरीय सहयोग हेतु भारत–ROK औद्योगिक सहयोग समिति की स्थापना के माध्यम से संबंधों को मज़बूत करने पर सहमति जताई है। साथ ही संसदीय विनिमय, युवा सहभागिता और राज्य स्तर पर गहन साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
- भारत और कोरिया गणराज्य (ROK) ने विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद के आधार पर सामरिक समन्वय को और गहरा करने तथा रक्षा उद्योग संयुक्त समिति के माध्यम से सहयोग को क्रियान्वित करने और उप-मंत्री स्तर पर पहली 2+2 वार्त्ता आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की है।
- भू-राजनीतिक और रणनीतिक संरेखण
- एक्ट ईस्ट और न्यू सदर्न पॉलिसी का समन्वय: इस दृष्टि में भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को कोरिया गणराज्य की ‘न्यू सदर्न पॉलिसी’ के साथ औपचारिक रूप से जोड़ा गया है, जिससे द्विपक्षीय संबंध केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रहकर एक व्यापक इंडो-पैसिफिक सुरक्षा साझेदारी में परिवर्तित हो रहे हैं।
- लघु-बहुपक्षीय ढाँचे में प्रवेश: भारत और कोरिया गणराज्य ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक के अपने साझा दृष्टिकोण की पुष्टि की और भारत के नेतृत्व वाले इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (IPOI) में कोरिया गणराज्य की भागीदारी का स्वागत किया।
- आर्थिक सुरक्षा संवाद: भारत-कोरिया गणराज्य आर्थिक सुरक्षा संवाद का उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करके महत्त्वपूर्ण संसाधनों तथा प्रौद्योगिकियों के विविधीकरण को बढ़ावा देकर आपूर्ति शृंखलाओं को जोखिम-मुक्त करना है।
- समुद्री और रक्षा उत्पादन: यह दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से संयुक्त रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिये एक रोडमैप तैयार करता है, जो पिछले नौसैनिक डील (जैसे– माइनस्वीपर्स परियोजना) को रोकने वाली नौकरशाही बाधाओं को पार करते हुए आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत सह-उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करता है।
- उन्होंने मुंबई में कोरिया मरीन इक्विपमेंट एसोसिएशन (KOMEA) के कार्यालय के उद्घाटन का स्वागत किया, जो समुद्री उद्योग का समर्थन करने के लिये सहायक पारिस्थितिक तंत्र के विकास में योगदान देने वाला पहला ऐसा कार्यालय है।
- डिजिटल एकीकरण और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी:
- भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज: भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (CET) को लक्षित करने वाली एक नई पहल है।
- यह "AI फॉर ऑल" और "MANAV" के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा गवर्नेंस और सेमीकंडक्टर डिज़ाइन एवं फैब्रिकेशन पर केंद्रित संयुक्त कार्य बल स्थापित करता है।
- सीमा पार वित्तीय लिंकेज: भारत के नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और कोरिया के KFTC (कोरिया फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस एंड क्लियरिंग्स कॉर्पोरेशन) को एकीकृत करने वाले एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए।
- यह पारंपरिक पश्चिमी फाइनेंस क्लियरिंग हाउसेस को दरकिनार करते हुए निर्बाध, वास्तविक समय सीमा पार भुगतान की अनुमति देता है।
- अंतरिक्ष: भारत और कोरिया गणराज्य ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) - कोरिया एयरोस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (KASA) संयुक्त कार्य समूह स्थापित करके और 20 अप्रैल, 2026 को बेंगलुरु में आयोजित भारत-कोरिया गणराज्य अंतरिक्ष दिवस जैसी पहलों के माध्यम से सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
- भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज: भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (CET) को लक्षित करने वाली एक नई पहल है।
- व्यापार और आर्थिक पुनर्संतुलन: एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया ताकि स्थगित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के उन्नयन को औपचारिक रूप से पुनः शुरू और तेज़ किया जा सके।
- दस्तावेज़ विशेष रूप से "व्यापार विषमता" को दूर करने और भारतीय निर्यात में बाधा डालने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं (NTB) को समाप्त करने की आवश्यकता को स्वीकार करता है।
- जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा:
- ऊर्जा संसाधन सुरक्षा: कोरिया गणराज्य ने पैक्स सिलिका पहल में भारत की भागीदारी का स्वागत किया, जबकि भारत ने फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (FORGE) में कोरिया गणराज्य के नेतृत्व की सराहना की।
- FORGE फरवरी 2026 में महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिये वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने के लिये शुरू की गई संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाली एक बहुराष्ट्रीय पहल है। भारत FORGE का समर्थक और भागीदार है।
- दोनों ने आपूर्ति व्यवधानों के दौरान नेफ्था जैसी महत्त्वपूर्ण सामग्रियों को सुरक्षित करने और ऐसे संसाधनों में द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
- अनुच्छेद 6.2 का सहयोगात्मक दृष्टिकोण: दोनों राष्ट्रों ने कार्बन क्रेडिट व्यापार और उत्सर्जन में कमी के लिये पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत एक संयुक्त ढाँचा स्थापित किया।
- संस्थागत जलवायु सदस्यता: कोरिया गणराज्य आधिकारिक तौर पर भारत-मुख्यालय वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल हो गया, जबकि भारत ने पारस्परिक रूप से सियोल-मुख्यालय वाले ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट (GGGI) में शामिल होकर दो-तरफा संस्थागत जलवायु साझेदारी को मज़बूत किया।
- ऊर्जा संसाधन सुरक्षा: कोरिया गणराज्य ने पैक्स सिलिका पहल में भारत की भागीदारी का स्वागत किया, जबकि भारत ने फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (FORGE) में कोरिया गणराज्य के नेतृत्व की सराहना की।
- वैश्विक हितों के लिये साझेदारी: भारत और कोरिया गणराज्य ने G20 जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, विशेष रूप से वर्ष 2028 में कोरिया गणराज्य की आगामी अध्यक्षता के मद्देनज़र।
- UNCLOS सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिये प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
- सांस्कृतिक और सॉफ्ट पावर संबंधों को बढ़ाना: भारत और कोरिया गणराज्य ने सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम (वर्ष 2026–2030) का विस्तार करके सांस्कृतिक सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें वर्ष 2028–29 को मित्रता वर्ष घोषित किया गया।
भारत और कोरिया गणराज्य के संबंध कैसे हैं?
- ऐतिहासिक संबंध: 48 ईस्वी में अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना ने राजा किम-सुरो से विवाह करने के लिये कोरिया की यात्रा की और कई कोरियाई अपने वंश का पता इस वंशावली से लगाते हैं। इसके अतिरिक्त बौद्ध धर्म एक मज़बूत ऐतिहासिक कड़ी के रूप में कार्य करता है।
- नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की वर्ष 1929 की कविता "लैंप ऑफ द ईस्ट" को कोरियाई लोग प्यार से याद करते हैं और यह उनके स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल है।
- भारत ने कोरियाई युद्ध (1950-53) के दौरान एक सेना चिकित्सा इकाई तैनात करके और युद्धविराम तथा युद्धबंदियों के प्रत्यावर्तन की सुविधा प्रदान करके महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- आर्थिक संबंध: वर्ष 2010 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के कार्यान्वयन के बाद व्यापार में महत्त्वपूर्ण गति आई है। वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 25.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
- कोरिया गणराज्य भारत में 15वाँ सबसे बड़ा FDI निवेशक है, जिसका वर्ष 2024 में कुल निवेश 929 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में है।
- "कोरिया प्लस" और "इंडिया-कोरिया फास्ट ट्रैक मेकैनिज़्म" जैसी पहलें निवेशकों के लिये व्यवसाय को बढ़ावा देती हैं और आसान बनाती हैं।
- सैमसंग, हुंडई, किआ और एलजी जैसे कोरियाई गणराज्य समूहों का भारत में बड़े पैमाने पर और अत्यधिक सफल कारोबार है।
- उन्होंने "मेक इन इंडिया" पहल में भारी एकीकरण किया है, वे भारत का उपयोग केवल उपभोक्ता बाज़ार के रूप में नहीं, बल्कि निर्यात केंद्र के रूप में भी कर रहे हैं।
- रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग: इसकी सबसे उल्लेखनीय सफलता K-9 वज्र है, जो 155 मिमी. की स्व-चालित होवित्ज़र तोप है। इसे भारत में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा कोरिया गणराज्य की हनवा डिफेंस के सहयोग से निर्मित किया गया है।
- IN-ROKN द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास भारत और कोरिया गणराज्य (ROK) के बीच पहला नौसैनिक अभ्यास है, जो अक्तूबर 2025 में आयोजित किया गया था।
- सांस्कृतिक संबंध एवं सॉफ्ट पावर: कोरिया गणराज्य में लगभग 18,000 भारतीय निवासरत है, जिसमें मुख्यतः STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) के छात्र, शोधकर्त्ता एवं पेशेवर शामिल हैं।
- ‘हैल्यू’ (कोरियाई वेव) ने भारत में एक महत्त्वपूर्ण प्रभाव छोड़ा है। K-pop (जैसे– BTS, Blackpink), K-ड्रामा, कोरियाई कॉस्मेटिक्स (K-beauty) और कोरियाई व्यंजन भारतीय युवाओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर गहरा सद्भाव और आकर्षण उत्पन्न हुआ है।
भारत-कोरिया गणराज्य संबंधों में प्रमुख चुनौतियाँ तथा आगे की राह क्या है?
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चुनौतियाँ |
आगे की राह |
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बढ़ता हुआ व्यापार घाटा: द्विपक्षीय व्यापार कोरिया गणराज्य के पक्ष में असंतुलित बना हुआ है, जिसमें भारतीय निर्यात को गैर-शुल्क बाधाओं (NTB) और सीमित पहुँच का सामना करना पड़ रहा है, हालाँकि यह स्थिति तब है जब फार्मा, आईटी और कृषि जैसे क्षेत्र भारत में मजबूत स्थिति में हैं। |
मूल्य शृंखला एकीकरण: केवल टैरिफ पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, भारत को क्षेत्र-विशिष्ट एकीकरण (इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, ग्रीन प्रौद्योगिकी) के लिये प्रयास करना चाहिये ताकि भारतीय कंपनियाँ कोरियाई आपूर्ति शृंखलाओं का हिस्सा बन सकें, जिससे विषमता कम हो। |
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CEPA उन्नयन में ठहराव: CEPA को उन्नत करने और 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु वार्त्ताएँ सख्त सौदेबाज़ी और संरचनात्मक असंतुलनों के कारण अभी भी विलंबित हैं। |
लक्षित CEPA सुधार: व्यापक चर्चाओं के स्थान पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और बाज़ार पहुँच से संबंधित प्रतिबद्धताओं पर ध्यान केंद्रित किया जाए, ताकि अधिक त्वरित और सार्थक परिणाम सुनिश्चित किये जा सकें। |
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सीमित रक्षा सहयोग की गहराई: K-9 वज्र जैसी सफलता अपवाद है, जबकि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा से जुड़ी चिंताओं के कारण प्रमुख समझौते लंबित हैं। |
रक्षा सह-उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT): खरीदार-विक्रेता मॉडल से आगे बढ़कर सह-विकास की दिशा में कदम बढ़ाए जाएँ, जिसके तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को अनिवार्य किया जाए, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित किया जाए और स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं का निर्माण किया जाए। |
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भूराजनीतिक बाधाएँ (चीन कारक): कोरिया गणराज्य (ROK) की चीन पर आर्थिक निर्भरता और उत्तर कोरिया से जुड़ी सुरक्षा चिंताएँ भारत के साथ हिंद-प्रशांत में उसके सतर्क/संयमित संरेखण का कारण बनती हैं। |
मुद्दा-आधारित मिनीलेटरलिज़्म: समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति शृंखलाओं और महत्त्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अनुकूलनशील समूहों (भारत-ROK-अमेरिका/आसियान) के माध्यम से सहयोग को सुदृढ़ किया जाए। |
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कार्यान्वयन घाटा: अनेक समझौते और MoU नौकरशाही बाधाओं तथा अप्रभावी अनुवर्ती तंत्र के कारण विलंब का सामना करते हैं। |
समर्पित आर्थिक कॉरिडोर: क्रियान्वयन और निवेश परिणामों में सुधार हेतु कोरिया-विशिष्ट औद्योगिक क्लस्टर स्थापित किये जाएँ तथा त्वरित स्वीकृति (फास्ट-ट्रैक) प्रणालियाँ विकसित की जाएँ। |
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अप्रभावी सामाजिक संपर्क: सीमित प्रवासी उपस्थिति और व्यवसायों के बीच जागरूकता की कमी, गहन सहभागिता और विश्वास के विकास में बाधा उत्पन्न करती है। |
मानव पूंजी और गतिशीलता साझेदारियाँ: कौशल गलियारों का विकास करना और पेशेवरों के लिये गतिशीलता को सरल बनाया जाए ताकि सामाजिक-आर्थिक एकीकरण को सुदृढ़ किया जा सके। |
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प्रौद्योगिकी सहयोग में अंतर: संबंध मुख्यतः प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आधारित (असेंबली-केंद्रित) बने हुए हैं, जिनमें नवाचार या उच्च-स्तरीय सहयोग की कमी दिखाई देती है। |
रणनीतिक प्रौद्योगिकी गठबंधन: सेमीकंडक्टर, AI और 6G जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा दिया जाए तथा बौद्धिक संपदा (IP) साझाकरण ढाँचे विकसित किये जाएँ, ताकि संबंधों को उच्च-प्रौद्योगिकी साझेदारी में रूपांतरित किया जा सके। |
निष्कर्ष
भारत-कोरिया गणराज्य संयुक्त रणनीतिक विज़न पारंपरिक द्विपक्षीय सहभागिता से एक बहुआयामी, भविष्य-उन्मुख साझेदारी की ओर परिवर्तन का संकेत देता है। प्रौद्योगिकी, व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक शासन के क्षेत्रों में प्रबल सामंजस्य के साथ, दोनों देश आने वाले दशक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में प्रमुख भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर हैं।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: ‘भारत एवं कोरिया गणराज्य के मध्य संबंध आर्थिक सहभागिता से सामरिक अभिसरण की ओर अग्रसर हैं।’ चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत-कोरिया गणराज्य संयुक्त रणनीतिक विज़न (2026-2030) क्या है?
यह एक रोडमैप है, जिसका उद्देश्य व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को हिंद-प्रशांत परिप्रेक्ष्य के साथ सुदृढ़ करना है।
2. भारत और कोरिया गणराज्य के बीच CEPA क्या है?
यह वर्ष 2010 का एक व्यापार समझौता है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है। वर्तमान में व्यापार असंतुलन को दूर करने हेतु इसके उन्नयन पर वार्त्ता जारी है।
3. भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज क्या है?
यह AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिये एक ढाँचा है, जो ‘AI फॉर ऑल’ और ‘MANAV’ जैसे विज़न द्वारा निर्देशित है।
4. K-9 वज्र का क्या महत्त्व है?
यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत-कोरिया गणराज्य रक्षा सह-उत्पादन का एक सफल मॉडल है, जो कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रदर्शित करता है।
5. ISA और GGGI जलवायु सहयोग को कैसे सुदृढ़ करते हैं?
ये संस्थाएँ नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विकास और हरित वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करते हुए द्विपक्षीय जलवायु कार्रवाई को संस्थागत रूप प्रदान करती हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
मेन्स
प्रश्न. शीतयुद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य के संदर्भ में, भारत की पूर्वोन्मुखी नीति के आर्थिक और सामरिक आयामों का मूल्याकंन कीजिये। (2016)

शासन व्यवस्था
कल्याण बनाम विकास
प्रिलिम्स के लिये: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), राजस्व व्यय, पूंजीगत व्यय, JAM (जन धन–आधार–मोबाइल), वित्त आयोग
मेन्स के लिये: भारतीय राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था में कल्याण बनाम विकास संबंधी परिचर्चा, कल्याणकारी लोकलुभावनवाद और इसके आर्थिक निहितार्थ, मानव पूंजी निर्माण
चर्चा में क्यों?
राजनीतिक आख्यानों में कल्याण और विकास के बीच कमज़ोर होती सीमाओं ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं, जहाँ अल्पकालिक कल्याणकारी योजनाओं को दीर्घकालीन विकास की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
- इसने कल्याणकारी लोकलुभावनवाद, राजकोषीय स्थिरता और वास्तविक संरचनात्मक परिवर्तन पर चुनावी लाभ को प्राथमिकता देने पर बहस छेड़ दी है।
सारांश
- कल्याण बनाम विकास संबंधी परिचर्चा कल्याण (अल्पकालिक राहत) और विकास (दीर्घकालिक क्षमता निर्माण) के बीच तनाव को उजागर करती है, जहाँ लोकलुभावन योजनाओं पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने से राजकोषीय स्वास्थ्य पर दबाव पड़ सकता है और संरचनात्मक विकास में बाधा आ सकती है।
- एक संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है, जहाँ लक्षित कल्याण मानव पूंजी और मांग का समर्थन करता है, जबकि राजकोषीय अनुशासन बनाए रखता है और सतत विकास के लिये पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देता है।
कल्याण और विकास के बीच क्या अंतर है?
कल्याण
- परिचय: कल्याण से तात्पर्य राज्य के उस हस्तक्षेप से है जो अपनी उपेक्षित आबादी के लिये एक बुनियादी सुरक्षा जाल सुनिश्चित करता है। यह मूल रूप से पुनर्वितरणात्मक न्याय और तात्कालिक संकट को कम करने से संबंधित है।
- यह प्रायः अल्प से मध्यम अवधि का होता है, जो उपभोग और उत्तरजीविता पर केंद्रित है।
- उद्देश्य: बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं (भोजन, आश्रय, बुनियादी स्वास्थ्य) को पूरा करना, असमानता को कम करना और गरीबी एवं प्रणालीगत आघातों के खिलाफ एक बफर प्रदान करना।
- उपेक्षित समूहों के लिये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), वृद्धावस्था पेंशन, विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) (तत्काल मज़दूरी सुरक्षा प्रदान करना)।
विकास
- परिचय: विकास केवल आर्थिक विकास से परे है; यह संरचनात्मक परिवर्तन, क्षमता निर्माण और मानव स्वतंत्रता के विस्तार (अमर्त्य सेन के क्षमतावादी दृष्टिकोण के अनुसार) को शामिल करता है।
- यह दीर्घकालिक होता है, जो पूंजी निर्माण, उत्पादकता वृद्धि और प्रणालीगत सशक्तीकरण पर केंद्रित है।
- उद्देश्य: दीर्घकालिक क्षमताओं का निर्माण करना, धन उत्पन्न करना, रोज़गार सृजित करना और सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करना जो नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने के लिये सशक्त बनाता है।
- उदाहरण: राजमार्गों और बंदरगाहों का निर्माण, IIT/AIIMS की स्थापना, अनुसंधान एवं विकास में निवेश, कौशल विकास पहल (स्किल इंडिया) और औद्योगिक गलियारे।
कल्याण और विकास में अंतर
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मापदंड |
कल्याण (अल्पकालिक) |
विकास (दीर्घकालिक) |
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परिभाषा |
मूलभूत आवश्यकताओं हेतु त्वरित, पुनर्वितरणात्मक हस्तक्षेप |
दीर्घकालिक संरचनात्मक आर्थिक एवं सामाजिक रूपांतरण |
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समय-सीमा |
अल्पकालिक |
दीर्घकालिक (दशकों तक) |
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अभिमुखता |
उपभोग-केंद्रित (तात्कालिक निर्धनता का शमन) |
उत्पादन-केंद्रित (उत्पादक क्षमता का निर्माण) |
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उद्देश्य |
संवेदनशीलता में कमी लाना; मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करना |
क्षमताओं, उत्पादकता, संस्थानों तथा मानवीय स्वतंत्रताओं का विस्तार करना |
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उदाहरण |
खाद्य सुरक्षा, नकद अंतरण, ऋण माफी, निःशुल्क विद्युत |
शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आधारभूत संरचना, संस्थान, विधि का शासन |
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दुरुपयोग की स्थिति में जोखिम |
राजकोषीय दबाव, रिसाव, निवेश का निष्कासन |
यदि वृद्धि के लाभ वितरित न हों तो असमानता बढ़ सकती है |
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राजनीतिक प्रस्तुतीकरण |
स्पष्ट, तात्कालिक; उच्च निर्वाचन आकर्षण |
धीमा, क्रमिक; प्रायः निर्वाचन दृष्टि से कम महत्त्वांकित |
कल्याण और विकास एक-दूसरे के साथ किस प्रकार टकराते हैं और एक-दूसरे के पूरक बनते हैं?
संघर्ष
- पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का 'बहिर्वाह' (क्राउडिंग आउट): राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के तहत राज्यों के पास सख्त उधारी की सीमाएँ (आमतौर पर GSDP का 3-4%) होती हैं।
- जब राज्य उच्च राजस्व व्यय (गैर-लक्षित सब्सिडी, ऋण माफी) को प्राथमिकता देते हैं, तो यह सीधे पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 'क्राउड आउट' कर देता है।
- उदाहरण के लिये महाराष्ट्र में, 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले घोषित माझी लाडकी बहीण योजना ने राजकोषीय तनाव को बढ़ा दिया है, जिससे बुनियादी ढाँचे और दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं में निवेश करने की राज्य की क्षमता सीमित हो गई है।
- एक राज्य जो मुफ्त बिजली और बस यात्राओं पर भारी खर्च करता है, वह राज्य राजमार्गों के निर्माण या कृषि के आधुनिकीकरण के लिये नगण्य राजकोषीय स्थान छोड़ता है, जो मूल रूप से दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन को रोकता है।
- जब राज्य उच्च राजस्व व्यय (गैर-लक्षित सब्सिडी, ऋण माफी) को प्राथमिकता देते हैं, तो यह सीधे पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 'क्राउड आउट' कर देता है।
- बाज़ार विकृतियाँ और निर्भरता: जब कल्याण को विशुद्ध रूप से सशर्त लोकलुभावन "फ्रीबीज़" के रूप में वितरित किया जाता है, न कि काम या क्षमता निर्माण से जोड़ा जाता है, तो यह कुछ संदर्भों में श्रम संबंधी प्रोत्साहन को कमज़ोर कर सकता है।
- उदाहरण के लिये पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ कृषि क्षेत्रों में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी योजनाओं ने बुनियादी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है, लेकिन किसानों को चरम मौसमों में खेतिहर मज़दूरों को खोजने में कठिनाई होती है, जो कार्य के भागीदारी पैटर्न में बदलाव और सरकारी समर्थन पर बढ़ती निर्भरता का प्रतीक है।
- यह राजनीतिक अर्थव्यवस्था को "उत्पादक राज्य" (Productive State) से "किराया-मांग वाले राज्य" (Rent-Seeking State) में स्थानांतरित करता है, जो जनसांख्यिकीय सशक्तीकरण के बजाय एक स्थायी मतदाता निर्भरता बनाता है।
- अंतर-पीढ़ीगत असमानता: आर्थिक सर्वेक्षण ने निरंतर चेतावनी दी है कि ऑफ-बजट बॉरोइंग (अतिरिक्त-बजटीय संसाधनों) के माध्यम से लोकलुभावन कल्याण को वित्तपोषित करना राज्य के ऋण को बढ़ाता है।
- इसका अर्थ है कि वर्तमान पीढ़ी कल्याण का उपभोग करती है, लेकिन भविष्य की पीढ़ी ऋण का भुगतान करती है, जिससे उनकी विकास क्षमता कमज़ोर हो जाती है।
पूरक
- मानव पूंजी का निर्माण करता है: पोषण, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे कल्याणकारी उपाय एक स्वस्थ और कुशल कार्यबल का निर्माण करते हैं जो दीर्घकालिक विकास के लिये आवश्यक है।
- मांग को बढ़ावा देता है: नकद हस्तांतरण और VB-G RAM G जैसी योजनाएँ क्रय शक्ति को बढ़ाती हैं, जिससे उपभोग और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- नकद हस्तांतरण और पीएम-किसान जैसी योजनाएँ किसानों को मौसमी संकटों, जैसे–बीज, इनपुट खरीदने और अल्पकालिक कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती हैं।
- सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित करता है: कल्याण गरीबी और असमानता को कम करता है, अशांति को रोकता है और निवेश तथा विकास के लिये एक स्थिर वातावरण का निर्माण करता है।
- जोखिम लेने को बढ़ावा देता है: एक बुनियादी सुरक्षा जाल लोगों को आर्थिक जोखिम लेने, नए कौशल को अपनाने और बेहतर अवसरों को बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित करता है।
कल्याण और विकास के बीच संतुलन बनाने हेतु क्या उपाय किये जा सकते हैं?
- संतुलन बनाना (DPSP का जनादेश): संविधान कल्याण और विकास का जनादेश देता है। अनुच्छेद 38 और 39 न्यायसंगत वितरण (कल्याण) की मांग करते हैं, जबकि व्यापक संवैधानिक ढाँचा एक आधुनिक, समृद्ध राष्ट्र (विकास) की आकांक्षा रखता है।
- राज्य को निर्धनों हेतु कल्याण प्रदाता और युवाओं के लिये विकासात्मक सहायक के रूप में कार्य करना चाहिये।
- ‘फ्रीबीज़’ से ‘मेरिट गुड्स’ तक: सार्वजनिक नीति को अनुत्पादक 'फ्रीबीज़' (जैसे– मुफ्त टेलीविज़न या अंतहीन बिजली सब्सिडी) और "मेरिट गुड्स" (जैसे– मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी पोषण) के बीच अंतर करना चाहिये, क्योंकि मेरिट गुड्स के विकासात्मक परिणाम सकारात्मक और दूरगामी होते हैं।
- आयुष्मान भारत, पीएम पोषण और पीएम श्री स्कूल जैसी योजनाओं में निवेश करके मानव पूंजी को सशक्त बनाना चाहिये।
- राजकोषीय अनुशासन को संस्थागत बनाना: राज्य चुनावों में प्रतिस्पर्द्धी लोकलुभावनवाद के कारण बड़े पैमाने पर ऑफ-बजट उधारी और ऋण संचय हुआ है।
- 16वें वित्त आयोग ने राज्यों को सब्सिडी, विशेष रूप से बिना शर्त नकद हस्तांतरण को तर्कसंगत बनाने, स्पष्ट बहिष्करण मानदंड लागू करने, ऑफ-बजट फाइनेंसिंग (बजट से इतर वित्तपोषण) को रोकने और सब्सिडी तथा हस्तांतरण के लिये समान लेखांकन एवं प्रकटीकरण मानदंडों को अपनाने की सिफारिश की है।
- राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम का कड़ाई से पालन गैर-परक्राम्य है। इसके अतिरिक्त भविष्य के वित्त आयोगों को एक ऐसा ढाँचा विकसित करना चाहिये जो केंद्रीय करों के हस्तांतरण को सीधे किसी राज्य के पूंजीगत व्यय अनुपात से जोड़ दे, जिससे अत्यधिक वित्तीय अपव्यय के लिये राज्यों पर वित्तीय दंड लगाया जा सके।
- कल्याणकारी योजनाओं की दक्षता में सुधार करने और लक्षित, पारदर्शी एवं रिसाव-मुक्त नकद हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिये JAM (जन धन-आधार-मोबाइल) तंत्र का उपयोग करें।
- क्षमता पर ध्यान देना: पूरी तरह ‘सब्सिडी-आधारित’ दृष्टिकोण से हटकर ‘क्षमता-वर्द्धन’ (कैपेबिलिटी-एन्हांसिंग) दृष्टिकोण की ओर परिवर्तन करना चाहिये।
- उदाहरण के लिये मुफ्त कृषि बिजली (कल्याण/सब्सिडी) प्रदान करने से हटकर सौर माइक्रोग्रिड और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों में निवेश (विकास) की ओर परिवर्तन करना चाहिये।
- सब्सिडी को हटाकर पीएम-कुसुम और पीएम कृषि सिंचाई योजना जैसे दीर्घकालिक समाधानों को अपनाना चाहिये।
- स्थानीय शासन को सशक्त बनाना (विकेंद्रीकरण): ‘वन-साइज़-फिट्स-ऑल’ कल्याणकारी योजनाएँ अक्सर स्थानीय विकास संबंधी बाधाओं को दूर करने में असफल रहती हैं।
- पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को अधिक वित्तीय और कार्यात्मक स्वायत्तता प्रदान करनी चाहिये। स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने से यह सुनिश्चित होता है कि राज्य के धन का उपयोग व्यापक लोकलुभावन सहायता के बजाय समुदाय-विशिष्ट विकासात्मक आवश्यकताओं पर किया जाए।
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और स्वामित्व (SVAMITVA) जैसी योजनाओं के माध्यम से बेहतर लक्षित व्यय के लिये पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को सशक्त बनाएँ।
निष्कर्ष
चूँकि भारत उच्च-मध्यम-आय दर्जा प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है, इसलिये राजनीतिक विमर्श को ‘त्वरित विकास’ के भ्रम से आगे बढ़कर अधिक परिपक्व होना चाहिये। अल्पकालिक राजनीतिक लाभ की तुलना में दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि कल्याणकारी राज्य नागरिकों को विकास की कहानी में भागीदार बनने हेतु सशक्त बनाए, न कि उन्हें निर्भरता के एक सतत चक्र में बांध दे।
दृष्टि मेन्स प्रश्न:प्रश्न. ‘कल्याण और विकास परस्पर पूरक होने के साथ-साथ परस्पर विरोधी उद्देश्य भी हैं।’ भारतीय संदर्भ में इसका आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs).
1. सार्वजनिक नीति में कल्याण क्या है?
कल्याण (Welfare) से तात्पर्य राज्य द्वारा किये जाने वाले पुनर्वितरणात्मक हस्तक्षेपों से है, जैसे– सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और मनरेगा (MGNREGA), जिनका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
2. विकास और कल्याण में क्या अंतर है?
विकास का ध्यान दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन, उत्पादकता में वृद्धि और मानव क्षमताओं के विस्तार पर केंद्रित होता है, जबकि यह अल्पकालिक कल्याणकारी सहायता से भिन्न होता है।
3. कल्याणकारी लोकलुभावनवाद क्या है?
यह उन राजनीतिक रूप से प्रेरित मुफ्त सुविधाओं और सब्सिडियों को संदर्भित करता है, जो राजकोषीय स्थिरता और विकास की तुलना में अल्पकालिक चुनावी लाभ को प्राथमिकता देती हैं।
4. FRBM अधिनियम क्यों महत्त्वपूर्ण है?
राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम घाटे को सीमित करके और अत्यधिक उधारी को रोककर राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम’ से लाभान्वित होने के पात्र हैं? (2011)
(a) केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों के वयस्क सदस्य
(b) गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों के वयस्क सदस्य
(c) सभी पिछड़े समुदायों के परिवारों के वयस्क सदस्य
(d) किसी भी परिवार के वयस्क सदस्य
उत्तर: (d)
प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-से 'राष्ट्रीय पोषण मिशन' के उद्देश्य हैं? (2017)
- गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण के बारे में जागरूकता पैदा करना।
- छोटे बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया के मामलों को कम करना।
- बाजरा, मोटे अनाज और बिना पॉलिश किये चावल की खपत को बढ़ावा देना।
- पोल्ट्री अंडे की खपत को बढ़ावा देना।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 2 और 3
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) केवल 3 और 4
उत्तर: A
मेन्स
प्रश्न. सुभेद्य वर्गों के लिये क्रियान्वित की जाने वाली कल्याण योजनाओं का निष्पादन उनके बारे में जागरूकता के न होने और नीति प्रक्रम की सभी अवस्थाओं पर उनके सक्रिय तौर पर सम्मिलित न होने के कारण इतना प्रभावी नहीं होता है। (2019)
प्रश्न. "एक कल्याणकारी राज्य की नैतिक अनिवार्यता के अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना धारणीय विकास की एक आवश्यक पूर्व शर्त है।" विश्लेषण कीजिये। (2021)
