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ऑस्ट्रेलियाई वनाग्नि के प्रभाव | 28 Jan 2020 | जैव विविधता और पर्यावरण

संदर्भ

सितंबर 2019 से शुरू हुई ऑस्ट्रेलिया की भीषण वनाग्नि के चलते जहाँ एक ओर व्यापक स्तर पर जान-माल की क्षति हो रही है वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के लिये यह एक भयावह संकट की स्थिति बन गई है। इस वनाग्नि में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड जैसे क्षेत्र मुख्य रूप से प्रभावित हुए हैं। हालाँकि इन क्षेत्रों के लिये वनाग्नि कोई नई बात नहीं है, क्योंकि यहाँ प्रत्येक वर्ष इस अवधि में ऐसी घटनाएँ देखने को मिलती हैं, किंतु इस वर्ष की वनाग्नि ने पिछले सभी वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ते हुए समस्त विश्व को पुन: इस विषय में गंभीरता से विचार-विर्मश करने और आवश्यक कदम उठाने के लिये विवश कर दिया है।

इस लेख में हम ऑस्ट्रेलिया की भीषण वनाग्नि से उपजे दस प्रमुख प्रभावों के विषय में बात कर रहे हैं।

1. प्रत्यक्ष, भौतिक रूप से परिलक्षित प्रभाव

2. पारिस्थितिक और जैव-विविधता पर पड़ने वाला प्रभाव

3. जन स्वास्थ्य

4. सीमा-पार तक वनाग्नि के प्रभाव

5. मानसिक स्वास्थ्य लागत

6. आर्थिक लागत

7. जलवायु प्रतिक्रिया एक फांस के रूप में

8. पर्यावरणीय लागत: प्रदूषण

यदि अतीत के कुछ उदाहरणों को संदर्भ के रूप में इस्तेमाल करने तो हम पाएंगे कि वनाग्नि से उत्पन्न धुएँ एवं राख ने समुद्री पारिस्थिकी तंत्र पर गंभीर रूप से नकारात्मक प्रभाव डाले हैं: 1990 के दशक के उत्तरार्ध में इंडोनेशिया में लगी भीषण वनाग्नि से उत्पन्न हुई धुंध ने व्यापक स्तर पर कोरल रीफ को नष्ट कर दिया था।

9. कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव

ऐसी पर्यावरणीय स्थिति में इतने व्यापक स्तर पर वनाग्नि की घटना का यदि अल्पकालिक प्रभाव इतना गंभीर है तो इसके दीर्घकालिक प्रभाव की कल्पना कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाना भी कठिन कार्य है।

10. बदलता सार्वजनिक दृष्टिकोण