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नई व्यावसायिक श्रेणियों के रूप में प्लेटफाॅर्म श्रमिक और गिग श्रमिक भारत में बेरोज़गारी की स्थिति को कम करने में मदद कर सकते हैं। हाल ही में सामाजिक सुरक्षा विधेयक, 2020 के लिये जारी सहिता के संदर्भ में चर्चा कीजिये। (250 शब्द) 

16 Nov 2020 | सामान्य अध्ययन पेपर 3 | अर्थव्यवस्था

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

दृष्टिकोण:

  • प्लेटफॉर्म श्रमिकों और गिग श्रमिकों के संदर्भ में सामाजिक सुरक्षा विधेयक, 2020 के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए एक परिचय लिखिये।
  • गिग इकोनॉमी के महत्त्व और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की सुरक्षा की आवश्यकता पर चर्चा कीजिये।
  • प्लेटफॉर्म श्रमिकों के संबंध में सुरक्षा विधेयक से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डालिये और इससे जुड़े कुछ उपाय सुझाइये।
  • आगे की राह के साथ एक संक्षिप्त निष्कर्ष लिखिये।

परिचय:

  • हाल ही में संसद ने श्रम कल्याण सुधार के उद्देश्य से देश में 50 करोड़ से अधिक संगठित और असंगठित श्रमिकों को कवर करने वाले सामाजिक सुरक्षा विधेयक, 2020 पर एक संहिता पेश की है। इस प्रकार की संहिता से रोज़गार के क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इस विधेयक के प्रावधानों को श्रम कानून से संबंधित अम्ब्रेला उपबंध माना जा रहा है क्योंकि इसमें प्रवासी श्रमिक, गिग श्रमिक जैसे सभी हितधारकों को शामिल किया जा रहा है।
  • प्लेटफॉर्म श्रमिक व्यवस्था एक पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से अलग प्रकार की कार्य व्यवस्था है जिसमें संगठन या व्यक्ति अन्य संगठनों या व्यक्तियों तक पहुँचने के लिये एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। उबेर, ओला, ज़ोमैटो और स्विगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों को प्लेटफॉर्म श्रमिक कहा जा सकता है।

प्रारूप

गिग इकॉनमी का महत्त्व:

  • शहरी क्षेत्रों में रोज़गार प्रदाता: फिलहाल, भारत में विनिर्माण क्षेत्र युवाओं को रोज़गार के पर्याप्त अवसर प्रदान करने में असमर्थ है तथा बाज़ार में शिक्षा और रोज़गार कौशल के बीच एक बेमेल संबंध है।
    • सरकार शहरी क्षेत्रों में लगातार पलायन करने वालों के लिये व्यवहार्य सार्वजनिक कार्य योजनाएँ बनाने में असमर्थ रही हैं।
    • इसके विपरीत गिग इकॉनमी, शहरी क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर प्रदान करने में सक्षम रही है। इसलिये अब सक्रिय रूप से स्वीकार किया जाता है कि प्लेटफॉर्म श्रमिक व्यवस्था देश में रोज़गार सृजन में सहायक है।
  • सामाजिक सेवा संवर्द्धन: केंद्र और कई राज्य सरकारों ने सामाजिक सेवाओं को बढ़ाने के लिये कई गिग प्लेटफार्मों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये हैं।
    • उदाहरण के लिये, उबेर ने आयुष्मान भारत के साथ भागीदारी की, ताकि ड्राइवरों और वितरण भागीदारों के लिये मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
    • अर्बनक्लैप ने शहरी गरीबों के लिये न्यूनतम सुनिश्चित मासिक वेतन के साथ रोज़गार उत्पन्न करने के लिये राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के साथ भागीदारी की।
    • अनौपचारिक नौकरियों के मामलों में जहाँ श्रमिकों को पहचानना मुश्किल था और जिनको सामाजिक सुरक्षा दी जानी थी, इस उद्देश्य के लिये इस प्रकार के प्लेटफॉर्म एक उपयुक्त माध्यम बन गये हैं।
  • सभी परिदृश्यों में रोज़गार सृजन में सक्षम: गिग अर्थव्यवस्था आधारित कंपनियाँ कार्य, उद्यमशीलता के अवसर और कौशल विकास में मददगार हैं।
    • सरकार और प्लेटफॉर्म व्यवस्था एक सार्वजनिक नीति एवं उपयुक्त परिवेश के साथ अधिक रोज़गार सृजन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं।

प्लेटफार्म श्रमिकों के लिये सुरक्षा की आवश्यकता

  • अधिकार रहित लाभ : सामान्यतः प्लेटफॉर्म श्रमिक लाभ का दावा करते हैं और श्रम अधिकारों के प्रति उदासीन बने रहते हैं।
    • वर्तमान कानूनी ढाँचा श्रमिकों को बेहतर और स्थिर वेतन की मांग करने या कार्यों को निर्दिष्ट करने वाले विनियमन का अभाव है। अतः सरकार या न्यायालय बिना की ठोस विनियमन के एक निर्दिष्ट वेतन संबंधित कोई दबाव नहीं बना सकते ।
  • मनमानी कार्रवाई: पिछले छह महीनों के दौरान श्रमिकों द्वारा अखिल भारतीय गिग वर्कर्स यूनियन के तहत संघ बनाया है और वेतन में निरंतर गिरावट का विरोध किया है।
    • उदाहरण के लिये, महामारी के दौरान स्विगी श्रमिकों का लाभांश प्रति डिलीवरी 35 रुपए से घटाकर 10 रुपए कर दिया गया।
  • अंतर्राष्ट्रीय अनुभव: यूरोपीय संघ में कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ ​​श्रमिकों को संगठित क्षेत्र के कर्मचारी का दर्जा देने की दिशा में एक कदम उठाने की मांग कर रही हैं, इस प्रकार न्यूनतम वेतन और कल्याणकारी लाभों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • ऋण जाल की समस्या: प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में प्रवेश करने के लिये, श्रमिक ऋण योजनाओं पर भरोसा करते हैं, जिन्हें अक्सर प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा सुविधा दी जाती है।
    • यह वित्तीय दायित्वों से संचालित प्लेटफॉर्म कंपनियों पर निर्भरता का परिणाम है, जिससे वे लघु-मध्यम अवधि के ऋण जाल में प्रदान करता है।

सुरक्षा विधेयक से संबद्ध मुद्दे:

  • लाभों की कोई गारंटी नहीं: सामाजिक सुरक्षा विधेयक, 2020 के तहत प्लेटफार्म श्रमिक अब मातृत्व लाभ, जीवन और विकलांगता कवर, भविष्य निधि आदि जैसे लाभों के लिये पात्र हैं। हालाँकि, पात्रता से तात्पर्य लाभ की गारंटी से नहीं है।
  • निश्चित उत्तरदायित्व का अभाव: विधेयक में केंद्र सरकार, प्लेटफार्म एग्रीगेटर्स और श्रमिकों की संयुक्त जिम्मेदारी के रूप में बुनियादी कल्याण उपायों का प्रावधान है।
    • हालाँकि, यह नहीं बताया गया है कि कल्याण की मात्रा को वितरित करने के लिये कौन सा हितधारक जिम्मेदार है।

आगे की राह:

  • स्पष्टता की आवश्यकता: एक स्पष्ट विनियमन के माध्यम से ही प्लेटफॉर्म श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • संयुक्त जवाबदेही: गिग अर्थव्यवस्था में काम की विषमता की सामाजिक-कानूनी स्वीकार्यता और सरकार एवं प्लेटफार्म कंपनियों के लिये सामाजिक सेवाओं के वितरण हेतु संयुक्त जवाबदेही की आवश्यकता है।
  • समन्वित प्रयास: कल्याणकारी सेवाएँ प्रदान करने के क्रम में परिचालन टूटने को कम करने के लिये, सरकार, कंपनियों, और श्रमिकों द्वारा एक त्रिपक्षीय प्रयास की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

  • महामारी के दौरान आवश्यक सेवाओं के वितरण के लिये प्लेटफार्म श्रमिकों द्वारा किये गए कार्य सराहनीय है। इसने सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में अपनी भूमिका को मज़बूत किया तथा मांग-संचालित एग्रीगेटर्स को भी व्यवस्थित बनाए रखा ।
  • हालाँकि, महामारी के बीच स्पष्ट हुआ कि प्लेटफॉर्म श्रमिकों की भेद्यता ने प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर कंपनियों और राज्य के लिये एक अधिक मज़बूत ज़िम्मेदारी को पेश करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा प्रस्तुत किया।