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सेमिनार: अंग्रेज़ी सीखने का अवसर (23 सितंबर: दोपहर 3 बजे)
यूपीपीएससी FAQs
प्रश्न - 1 : कट-ऑफ' क्या है? इसका निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर : ‘कट-ऑफ’ का अर्थ है- वह न्यूनतम निर्धारित (आयोग द्वारा) अंक जिसे प्राप्त करके कोई उम्मीदवार परीक्षा (विशेष) में सफल होता है। यू.पी.पी.एस.सी. परीक्षा में हर वर्ष प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के परिणाम में ‘कट-ऑफ’ तय की जाती है। ‘कट-ऑफ’ या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार सफल घोषित किये जाते हैं और शेष असफल। आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत यह कट-आॉफ भिन्न-भिन्न वर्गों के उम्मीदवारों के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं

प्रारंभिक परीक्षा में ‘कट-ऑफ’ का निर्धारण यू.पी.पी.सी.एस. (प्रवर) के मामले में प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन के अंकों के आधार पर (क्योंकि द्वितीय प्रश्नपत्र सीसैट केवल क्वालिफाइंग होता है), यू.पी.पी.सी.एस. (अवर) के मामले में सामान्य अध्ययन के अंकों के आधार पर जबकि यू.पी. आर.ओ./ए.आर.ओ. के मामले में सामान्य अध्ययन एवं सामान्य हिंदी दोनों प्रश्नपत्रों के अंकों के योग के आधार पर किया जाता है। इसका अर्थ है कि यू.पी. आर.ओ. / ए.आर.ओ. की परीक्षा में अगर कोई उम्मीदवार किसी एक प्रश्नपत्र में काफी कमज़ोर तथा दूसरे में मज़बूत है तो भी उसके सफल होने की संभावना बनी रहती है। 

‘कट-ऑफ’ कोई स्थिर वस्तु नहीं है इसमें हर साल बदलाव होता रहता है। इसका निर्धारण सीटों की संख्या, प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर तथा उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता जैसे कारकों के आधार पर किया जाता है। स्वाभाविक सी बात है कि अगर प्रश्नपत्र सरल होंगे या उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता ऊँची होगी तो कट-ऑफ बढ़ जाएगा और विपरीत स्थितियों में अपने आप कम हो जाएगा।

कुछ लोग कहते हैं कि सीसैट के प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक से अधिक अंक लाने वालों को वरीयता दी जाती है जबकि कम अंक लाने वाले परीक्षा से बाहर हो जाते है। वस्तुतः ये दोनों बातें भ्रामक हैं। ऐसी अफवाहों पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिये।

प्रश्न - 2 : यू.पी.पी.सी.एस. (प्रवर), प्रारंभिक परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र (सीसैट) के क्वालिफाइंग होने का क्या अर्थ है?

उत्तर : द्वितीय प्रश्नपत्र सीसैट (सिविल सर्विस एप्टिट्यूड टेस्ट) के क्वालिफाइंग होने का अर्थ है कि इसमें न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। चूँकि इस प्रश्नपत्र में प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं, अत: अभ्यर्थियों को अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिये इस प्रश्नपत्र में न्यूनतम 66 अंक या उससे अधिक अंक प्राप्त करने अनिवार्य होंगे।

इस प्रश्नपत्र में 66 अंक से कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की प्रथम प्रश्नपत्र की कॉपी का मूल्यांकन ही नहीं किया जाता है।  इसलिये प्रथम प्रश्नपत्र में चाहे जितना भी अच्छा प्रदर्शन किया गया हो द्वितीय प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

प्रश्न - 3 : प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों का समाधान किस क्रम में करना चाहिये? क्या किसी विशेष क्रम से लाभ होता है?

उत्तर : इसका उत्तर सभी के लिये एक नहीं हो सकता। अगर आप सामान्य अध्ययन एवं सीसैट के सभी विषयों में सहज हैं और आपकी गति भी संतोषजनक है तो आप किसी भी क्रम में प्रश्न हल करके सफल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बेहतर यही होता है कि जिस क्रम में प्रश्न आते जाएँ, उसी क्रम में उन्हें हल  करते हुए बढ़ें। किन्तु अगर आपकी स्थिति इतनी सुरक्षित नहीं है तो आपको प्रश्नों के क्रम पर विचार करना चाहिये। ऐसी स्थिति में आप सबसे पहले, उन प्रश्नों को हल करें जो सबसे कम समय लेते हैं।

सीसैट के प्रश्नपत्र में यदि आपकी अंग्रेज़ी ठीक है तो अंग्रेज़ी बोधगम्यता (English Comprehension) एवं व्याकरण( Grammar)  के लगभग 10 से 15 प्रश्नों को पहले हल कर लेना चहिये क्योंकि उनमें समय कम लगेगा और उत्तर ठीक होने की संभावना ज़्यादा होगी। ये 15 प्रश्न करने के बाद आपकी स्थिति काफी मज़बूत हो चुकी होगी। इसके बाद, आप तेज़ी से वे प्रश्न करते चलें जिनमें आप सहज हैं और उन्हें छोड़ते चलें जो आपकी समझ से परे हैं। जिन प्रश्नों के संबंध में आपको लगता है कि वे पर्याप्त समय मिलने पर किये  जा सकते हैं, उन्हें कोई निशान लगाकर छोड़ते चलें। अंत में समय बचे तो उन प्रश्नों को करें और नहीं तो छोड़ दें। एक सुझाव यह भी हो सकता है कि एक ही प्रकार के प्रश्न लगातार करने से बचें। अगर आपको ऐसा लगे तो बीच में गणित या तर्कशक्ति के कुछ सवाल कर लें उसके बाद अन्य प्रश्नों को हल करें। सरल से कठिन प्रश्नों की ओर बढ़ने की यह प्रक्रिया सामान्य अध्ययन एवं हिंदी के प्रश्नपत्रों को हल करते समय भी अपनाया जा सकता है।  

प्रश्न - 4 : परीक्षा में समय-प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है, उसके लिये क्या किया जाना चाहिये?

उत्तर : पिछले प्रश्न के उत्तर में दिये गए सुझावों पर ध्यान दें। उसके अलावा, परीक्षा से पहले मॉक-टेस्ट शृंखला में भाग लें और हर प्रश्नपत्र में परीक्षण करें कि किस वर्ग के प्रश्न कितने समय में हो पाते हैं। ज़्यादा समय लेने वाले प्रश्नों को पहले ही पहचान लेंगे तो परीक्षा में समय बर्बाद नहीं होगा। बार-बार अभ्यास करने से गति बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न - 5 : मैं अंग्रेज़ी में शुरू से ही कमज़ोर हूँ। क्या मैं सीसैट में सफल हो सकता हूँ?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। ‘सीसैट’ में केवल 10-15 प्रश्न ऐसे होते हैं जो सिर्फ अंग्रेज़ी में होते हैं। ये प्रश्न अंग्रेज़ी में दिये गए अनुच्छेदों पर आधारित बोधगम्यता (Comprehension) एवं व्याकरण (Grammar) के प्रश्न होते हैं। सच यह है कि अंग्रेज़ी में दिये गए अनुच्छेद काफी आसान भाषा में होते हैं और बहुत कमज़ोर विद्यार्थी भी इनमें से 3-4 सवाल ठीक कर सकते हैं।

प्रश्न - 6 : मैं शुरू से गणित में कमज़ोर हूँ। क्या मैं सीसैट में सफल हो सकता हूँ?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। सीसैट के 100 प्रश्नों में से लगभग 15 प्रश्न गणित से पूछे जाते हैं और उनमें से भी आधे प्रश्न तर्कशक्ति (रीजनिंग) के होते हैं। इन प्रश्नों की प्रकृति साधारण होती है अत: थोड़ा प्रयास करने से ये हल हो जाते हैं। हो सके तो गणित में कुछ ऐसे टॉपिक तैयार कर लीजिये जो आपको समझ में आते हैं और जिनसे प्रायः सवाल भी पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिये, अगर आप प्रतिशतता और अनुपात जैसे शीर्षक तैयार कर लेंगे तो गणित के 3-4 प्रश्न ठीक हो जाएंगे।

प्रश्न - 7 : क्या सभी प्रश्नों को ओ.एम.आर. शीट पर एक साथ भरना चाहिये या साथ-साथ भरते रहना चाहिये?

उत्तर :  बेहतर होगा कि 4-5 प्रश्नों के उत्तर निकालकर उन्हें शीट पर भरते जाएँ। हर प्रश्न के साथ उसे ओ.एम.आर. शीट पर भरने में ज़्यादा समय खर्च होता है। दूसरी ओर, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कई उम्मीदवार अंत में एक साथ ओ.एम.आर. शीट भरना चाहते हैं पर समय की कमी के कारण उसे भर ही नहीं पाते।

ऐसी दुर्घटना से बचने के लिये सही तरीका यही है कि आप 4-5 प्रश्नों के उत्तरों को एक साथ भरते चलें। सीसैट के प्रश्नों में प्रायः एक अनुच्छेद या सूचना के आधार पर 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे सभी प्रश्न एक साथ कर लेने चाहिये और साथ ही ओ.एम आर. शीट पर भी उन्हें भर दिया जाना चाहिये। चूँकि गोलों को काले या नीले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है, अत: उन्हें भरते समय विशेष सावधानी रखें। व्हाइटनर का प्रयोग कदापि न करें।

प्रश्न - 8 : यू.पी. आर.ओ./ए.आर.ओ. की प्रारम्भिक परीक्षा में हिंदी के प्रश्नपत्र की क्या भूमिका है? मैं हिंदी व्याकरण में शुरू से ही अपने को असहज महसूस करता हूँ। क्या मैं इस परीक्षा में सफल हो सकता हूँ?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। यू.पी. आर.ओ./ए.आर.ओ. प्रारम्भिक परीक्षा कुल 200 अंकों की होती है। इसमें द्वितीय प्रश्नपत्र सामान्य हिंदी का है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 60 एवं अधिकतम अंक 60 निर्धारित हैं। ‘सामान्य हिंदी’ के अंतर्गत सामान्य शब्द ज्ञान एवं व्याकरण (विलोम शब्द, वाक्य एवं वर्तनी शुद्धि, अनेक शब्दों के एक शब्द, तत्सम एवं तद्भव, विशेष्य एवं विशेषण एवं पर्यायवाची शब्द) से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों की प्रकृति साधारण होती है, अत: थोड़ा प्रयास करने से हल हो जाते हैं।

सामान्य हिंदी से सम्बंधित इन प्रश्नों को हल करने के लिये विगत 5 से 10 वर्षों में प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे गए हिंदी के सामान्य शब्द ज्ञान एवं व्याकरण संबंधी प्रश्नों को हल करना लाभदायक रहेगा। इसके लिये हिंदी की स्तरीय पुस्तक जैसे– वासुदेवनंदन प्रसाद एवं हरदेव बाहरी की ‘सामान्य हिंदी एवं व्याकरण’ पुस्तक का गहराई से अध्ययन करना उपयोगी रहेगा।  

प्रश्न - 9 : क्या ‘मॉक टेस्ट’ देने से प्रारम्भिक परीक्षा में कोई लाभ होता है? अगर हाँ, तो क्या ?

उत्तर : 

  • प्रारम्भिक परीक्षाओं के लिये मॉक टेस्ट देना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इसका पहला लाभ है कि आप परीक्षा में होने वाले तनाव (Anxiety) पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं।
  • दूसरे, समय प्रबंधन की क्षमता बेहतर होती है। 
  • तीसरे, अलग-अलग परीक्षाओं में आप यह प्रयोग कर सकते हैं कि प्रश्नों को किस क्रम में करने से आप सबसे बेहतर परिणाम तक पहुँच पा रहे हैं। इन प्रयोगों के आधार पर आप अपनी परीक्षा संबंधी रणनीति निश्चित कर सकते हैं। 
  • चौथा लाभ है कि आपको यह अनुमान होता रहता है कि अपने प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में आपका स्तर क्या है? 
  • ध्यान रहे कि ये सभी लाभ तभी मिलते हैं अगर आपने मॉक टेस्ट शृंखला का चयन भली-भाँति सोच-समझकर किया है। ‘दृष्टि’ की मॉक टेस्ट शृंखला अत्यंत श्रेष्ठ है जिसमें आप जनवरी से अप्रैल के दौरान काफी सारी जाँच परीक्षाएँ दे सकते हैं। 

 

प्रश्न - 10 : मुख्य परीक्षा के लिये वैकल्पिक विषय चुनते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिये?

उत्तर : उपयुक्त वैकल्पिक विषय का चयन ही वह निर्णय है जिस पर किसी उम्मीदवार की सफलता का सबसे ज़्यादा दारोमदार होता है। विषय चयन का असली आधार सिर्फ यही है कि वह विषय आपके माध्यम में कितना ‘स्कोरिंग’ है? विषय छोटा है या बड़ा, वह सामान्य अध्ययन में मदद करता है या नहीं ये सभी आधार भ्रामक हैं। अगर विषय छोटा हो और सामान्य अध्ययन में मदद भी करता हो किंतु दूसरे विषय की तुलना में 50 अंक कम दिलवाता हो तो उसे चुनना निश्चित तौर पर घातक है। भूलें नहीं कि आपका चयन अंततः आपके अंकों से ही होता है, इधर-उधर के तर्कों से नहीं।

 

प्रश्न - 11 : स्केलिंग क्या है? यू.पी.पी.सी.एस. (प्रवर) मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय में यह किस प्रकार निर्धारित की जाती है ?

उत्तर : स्केलिंग का अर्थ है - वास्तविक अंक से कुछ बढ़े या घटे हुए अंक प्राप्त होना। आयोग के अनुसार वह स्केलिंग के द्वारा विभिन्न विषयों, उनमें भाग लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या तथा पेपर की गुणवत्ता इत्यादि के आधार पर समानता स्थापित करती है, जिसके लिये वह किसी जटिल सांख्यिकीय सूत्र का प्रयोग करती है।

स्केलिंग को लेकर बहुत सारी भ्रामक बातें बताई जाती हैं। ऐसी अफवाहों पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिये। भूलें नहीं कि आपका चयन अंततः आपके अंकों से ही होता है इधर-उधर के तर्कों से नहीं। इसलिये मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय में ज़्यादा से 
ज़्यादा अंक प्राप्त करने के लिये अपनी लेखन शैली एवं उसकी तारतम्यता पर विशेष ध्यान देना चाहिये। अगर आप अपने विषय में अच्छे अंक प्राप्त करते हैं तो स्केलिंग का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये  आप परीक्षा से पूर्व किसी मॉक टेस्ट श्रृंखला में सम्मिलित हो सकते है। कुछ चुनिन्दा विषयों के लिये दृष्टि’ की मॉक टेस्ट श्रृंखला अत्यंत श्रेष्ठ है जिसमें आप जून से नवम्बर के दौरान काफी सारी जाँच परीक्षाएँ दे सकते हैं ।

 

मुख्य परीक्षा में अच्छी लेखन शैली के विकास संबंधी रणनीति के लिये इस  Link पर क्लिक करें

प्रश्न - 12 : यू.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित यू.पी.पी.सी.एस. (प्रवर), यू.पी.पी.सी.एस. (अवर) एवं यू.पी. आर.ओ./ए.आर.ओ. परीक्षा में हिंदी के प्रश्नपत्र की क्या भूमिका है? इसकी तैयारी कैसे करें?

उत्तर : यू.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इन परीक्षाओं में हिंदी के प्रश्नपत्र की अंकों की दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। पाठ्यक्रम से स्पष्ट  है कि इन परीक्षाओं में यह प्रश्नपत्र दो रूपों (बहुविकल्पीय एवं वर्णनात्मक) में पूछे जाते हैं। बहुत से अभ्यर्थियों में यह धारणा बनी हुई है कि हिंदी का प्रश्नपत्र आसान होता है इसलिये इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है और इस प्रश्नपत्र में औसत लेखन से भी अच्छे अंक प्राप्त किये जा सकते हैं। वस्तुतः ये दोनों बातें भ्रामक हैं। ऐसी अफवाहों पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिये।

यह सत्य है कि हिंदी की विषय-वस्तु अत्यंत रोचक एवं सहज है, लेकिन परीक्षा की दृष्टि से इसमें बेहतर अंक प्राप्त करने के लिये इसके व्याकरण और तारतम्यता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।   

यू.पी.पी.सी.एस.(प्रवर) मुख्य परीक्षा में अनिवार्य सामान्य हिंदी (150 अंक), यू.पी.पी.सी.एस. (अवर) मुख्य परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र के प्रथम खंड में सामान्य हिंदी के लिये 100 अंक एवं यू.पी. आर.ओ./ए.आर.ओ. की प्रारंभिक परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र (सामान्य हिंदी) के लिये  60 अंक एवं इसकी मुख्य परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सामान्य हिंदी एवं आलेखन’ (वर्णनात्मक) के लिये अधिकतम 100 अंक तथा तृतीय प्रश्नपत्र ‘सामान्य शब्द एवं हिंदी व्याकरण’ (वस्तुनिष्ठ) के लिये 60 अंकों का निर्धारित होना इस विषय की महत्ता एवं अंतिम चयन में सहभागिता को स्वयं ही स्पष्ट करती है। 

हिंदी के बहुविकल्पीय प्रश्न बहुत ही आसान होते है, जिन्हें किसी भी स्तरीय पुस्तक से सतत अध्ययन के द्वारा हल किया जा सकता है। इसके लिये हिंदी की स्तरीय पुस्तक जैसे– वासुदेवनंदन प्रसाद एवं हरदेव बाहरी की ‘सामान्य हिंदी एवं व्याकरण’ पुस्तक का गहराई से अध्ययन करना उपयोगी रहेगा।

चूँकि हिंदी और सामान्य अध्ययन के प्रश्नों के अंक सामान होते हैं, इसलिये कट-ऑफ निर्धारण में यह प्रश्नपत्र अत्यधिक लाभदायक सिद्ध हो सकता है। साथ ही हिंदी के 
वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों के लिये व्याख्या, व्याकरण एवं पत्र लेखन इत्यादि का परीक्षा से पूर्व कई बार निर्धारित समय में लिखने का अभ्यास करना चाहिये। अगर संभव हो तो इसके लिये आप किसी मॉक टेस्ट शृंखला में सम्मिलित हो सकते हैं।

 

प्रश्न - 13 : यू.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित परीक्षाओं में निबंध के प्रश्नपत्र की क्या भूमिका है? इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये क्या रणनीति अपनाई जानी चाहिये?

उत्तर : वर्तमान में यू.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षाओं में यू.पी.पी.एस.सी. (प्रवर), यू.पी.पी.एस.सी. (अवर) एवं यू.पी. आर.ओ./ए.आर.ओ. है इनमें निबंध का प्रश्नपत्र मुख्य परीक्षा का विषय है, लेकिन इसकी तैयारी एक सतत प्रक्रिया है। यू.पी.पी.एस.सी. (प्रवर) मुख्य परीक्षा में निबंध के लिये 150 अंक, यू.पी.पी.एस.सी. (अवर) मुख्य परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र के द्वितीय खंड में हिंदी निबंध के लिये 100 अंक तथा यू.पी. आर.ओ./ए.आर.ओ. मुख्य परीक्षा में चतुर्थ प्रश्नपत्र में हिंदी निबंध के लिये 120 अंक का निर्धारित होना, इस विषय की महत्ता एवं अंतिम चयन में सहभागिता को स्वयं ही स्पष्ट करती है।


निबंध लेखन के माध्यम से किसी व्यक्ति की मौलिकता एवं व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। वास्तव में निबंध लेखन एक कला है जिसका विकास एक कुशल मार्गदर्शन में सतत अभ्यास से किया जा सकता हैं। पूर्व में निबंध के लिये
 बाज़ार में कोई स्तरीय पुस्तक उपलब्ध नहीं होने के कारण इसके लिये अध्ययन सामग्री की कमी थी। लेकिन हाल ही में दृष्टि पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित ‘निबंध-दृष्टि’ पुस्तक ने इस कमी को दूर कर दी है। इस पुस्तक में लिखे गए निबंध न केवल परीक्षा के दृष्टिकोण से श्रेणी के अनुसार विभाजित हैं बल्कि प्रत्येक निबंध की भाषा-शैली एवं अप्रोच स्तरीय हैं। इसके अतिरिक्त इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये आप परीक्षा से पूर्व इससे सम्बंधित किसी मॉक टेस्ट शृंखला में सम्मिलित हो सकते हैं। अगर संभव हो तो ‘दृष्टि द विज़न’ संस्थान, द्वारा चलाए जाने वाले निबंध की क्लास में भाग ले सकते हैं ।
 

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प्रश्न - 14 : यू.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित परीक्षाओं में साक्षात्कार की क्या भूमिका है? इसकी तैयारी कैसे करें?

उत्तर : यू.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित परीक्षाओं में यू.पी.पी.सी.एस. (प्रवर) में साक्षात्कार के लिये कुल 100 अंक तथा यू.पी.पी.सी.एस. (अवर) में साक्षात्कार के लिये कुल 50 अंक निर्धारित है। चूँकि मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर ही अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट ) तैयार की जाती है, इसलिये इन परीक्षाओं में अंतिम चयन में साक्षात्कार की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। यू.पी.पी.सी.एस. (प्रवर) के साक्षात्कार में सामान्य परिस्थितियों में आप न्यूनतम 40 अंक तथा अधिकतम 70 अंक तथा यू.पी.पी.सी.एस. (अवर) के साक्षात्कार में सामान्यत: न्यूनतम 18 अंक तथा अधिकतम 35 अंक तक प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि साक्षात्कार इन परीक्षाओं का अंतिम चरण है, लेकिन इसकी तैयारी प्रारंभ से ही शुरू कर देना लाभदायक रहता है। वास्तव में किसी भी अभ्यर्थी के व्यक्तित्व का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है।

 

साक्षात्कार में अच्छे अंक प्राप्त करने संबंधी रणनीति के लिये इस Link पर क्लिक करें


Helpline Number : 87501 87501
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