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भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा  
Apr 14, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र - 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड - 11 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)
(खंड-13: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायो-टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता)

Information Technology

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय आईटी उद्योग को वियतनाम और फिलीपींस से कठिन प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रमुख बिंदु

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक देश के 16 राज्यों में सेवा क्षेत्र 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर से बढ़ोतरी कर रहा है, जिनमें छत्तीसगढ़ की वृद्धि दर सबसे अधिक है।
  • सेवा क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 62 प्रतिशत का योगदान करता है और इसमें वित्तीय वर्ष 2016-17 में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • भारत के सेवा क्षेत्र के कुल निर्यात में 45 फीसदी हिस्सेदारी केवल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की है
  • भारत का सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र वियतनाम और फिलीपींस जैसे निम्न मध्य-आय वाले देशों से कठिन प्रतियोगिता का सामना कर रहा है।
  • भारत में सेवा क्षेत्र में अपार संभावनाएँ विद्यमान हैं लेकिन यह क्षेत्र मुख्यधारा से थोड़ा अलग चल रहा है। वर्तमान में उन्नत तकनीकों वाले अन्य देश बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग कंपनियों (business process outsourcing companies) के माध्यम से इसका लाभ उठा रहे हैं।
  • गौरतलब है कि उच्च-प्रौद्योगिकी वाली सेवाओं को बेहतर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी अवसंरचना (information and communication technology infrastructure) तथा तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है।
  • यद्यपि सेवा क्षेत्र में उचित एवं सही आँकड़ों की कमी एक बढ़ी चुनौती है, जिसका शीघ्र समाधान करने की आवश्यकता है। क्षेत्रीय स्तर पर रोज़गार और सेवा निर्यात जैसे विभिन्न संकेतकों के संबंध में वर्तमान में राज्य स्तर पर आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं। वाणिज्य विभाग ने आँकड़ों की कमी को पूरा करने के लिये नीति आयोग की सहायता की मांग की है।
  • साथ ही, सेवा क्षेत्र क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दों की चुनौती का सामना कर रहा है। विभिन्न प्रकार की सेवाएँ जैसे- शिक्षा, पर्यटन, कानूनी परामर्श और चिकित्सा समवर्ती सूची में शामिल हैं  और इनमें "नीतिगत स्पष्टता और लक्ष्यों के निर्धारण की कमी" इत्यादि समस्याएँ विद्यमान हैं। 
  • 28 फरवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 मुख्य सेवाओं के विकास को बढ़ावा देने और उनकी क्षमताओं एवं उनमें विद्यमान संभावनाओं का पता लगाने वाले वाणिज्य विभाग के प्रस्ताव को मंज़ूरी प्रदान की है। 
  • इनमें सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी-सक्षम सेवाएँ (आईटीईएस), पर्यटन और आतिथ्य सेवाएँ, चिकित्सा हेतु यात्रा, परिवहन और रसद सेवाएँ तथा लेखा तथा वित्त सेवाएँ शामिल हैं। साथ ही इनमें ऑडियो विज़ुअल सेवाएँ, कानूनी सेवाएँ, संचार सेवाएँ, निर्माण और संबंधित इंजीनियरिंग सेवाएँ, पर्यावरण सेवाएँ, वित्तीय सेवाएँ और शिक्षा सेवाएँ भी शामिल हैं। 
  • केंद्र सरकार ने इन मुख्य 12 सेवाओं के विकास के लिये 5,000 करोड़ रुपए आवंटित किये हैं। 

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स्रोत : द इंडियन एक्सप्रेस 


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