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किसानों के पास बचत या निवेश हेतु नकद की कमी : NAFIS 
Sep 14, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 1 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)
(खंड- 2 : समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।)

NABARD

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रकाशित नाबार्ड अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण (NAFIS) 2016-17 की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015-16 में भारत में 10 ग्रामीण परिवारों में से एक के पास कोई निवेश योग्य अधिशेष नहीं था। सर्वेक्षण के मुताबिक लोगों ने भौतिक संपत्तियों में काफी हद तक निवेश किया है, लेकिन वित्तीय प्रपत्रों में यह निवेश 3% से भी कम था।

सर्वेक्षण से संबंधित प्रमुख बिंदु

  • सर्वेक्षण के मुताबिक, ग्रामीण परिवारों के आधे से अधिक (51%) ने वर्ष 2015-16 दौरान कुछ पैसे बचाए और केवल 2.3% परिवारों ने सावधि जमा या दीर्घकालिक बैंक जमा के रूप में पैसा निवेश किया है।
  • साथ ही वर्ष 2015-16 में 10% से भी कम ग्रामीण परिवारों ने कोई निवेश किया।
  • बैंक जमा के रूप में निवेश बहुत कम है और इससे पता चलता है कि ग्रामीण परिवारों के पास दीर्घकालिक निवेश हेतु वित्त नहीं है।
  • NAFIS रिपोर्ट में उल्लेखित है कि "कम आय के बावज़ूद कुछ व्यक्तियों ने बचत की है, जो उन्हें आकस्मिकताओं और कठिन परिस्थितियों से जूझने में मदद देगी।"
  • सबसे छोटी जोत की भूमि रखने वाले वे कृषक वर्ग, जिन्होंने निवेश किया, उनके द्वारा लगभग आधी राशि बैंक में या डाकघर में  जमा की गई थी।
  • गौरतलब है कि यह डेटा केवल उन घरों से संबंधित है जो निवेश करते हैं और इसलिये यह डेटा भूमि वर्ग, विशेष रूप से छोटे भूमि मालिकों का पूरी तरह से प्रतिनिधित्त्व नहीं करता है।
  • इसके अलावा, इस सर्वेक्षण के परिणामों की सावधानी के साथ व्याख्या किया जाना चाहिये क्योंकि हाल के वर्षों में इस वर्ग द्वारा सूखे के कारण सबसे खराब स्थिति का सामना भी किया गया था।
  • सर्वेक्षण के मुताबिक केवल बैंक खातों तक पहुँच ही उच्च बचत या निवेश का कारण नहीं हो सकता है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015-16 में 10 ग्रामीण घरों में से नौ के बैंक खाता होने की सूचना दी गई थी, जबकि बैंक में धन जमा करने वालों में केवल एक अधिसूचित अल्पसंख्यक निवेश करता है।
  • इसके अलावा, ग्रामीण परिवारों का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा ऋण के लिये अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर है।
  • सर्वेक्षण के मुताबिक लगभग एक-तिहाई (32%) ग्रामीण परिवार, जिन्होंने कोई ऋण लिया है, गैर-संस्थागत स्रोतों के माध्यम से लिया, जबकि 9% ने औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों पर भरोसा किया।
  • इस प्रकार वर्ष 2015-16 में उधार लेने वाले 41% ग्रामीण परिवारों ने अनौपचारिक स्रोतों जैसे - उधारकर्त्ताओं, स्थानीय मकान मालिकों, दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिया।
  • राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के अखिल भारतीय ऋण और निवेश सर्वेक्षण (ALDLS) के  अनुसार, यह आँकड़ा 60% ग्रामीण परिवारों से कम है, जिन्होंने 2012 में अनौपचारिक उधारदाताओं को ऋणी होने की सूचना दी थी।
  • सर्वेक्षण के मुताबिक, छोटे भूमि मालिकों की औपचारिक क्रेडिट तक पहुँच अभी भी एक चुनौती है।
  • अतः इस सर्वेक्षण के नतीज़े बताते हैं कि अधिक भूमि मालिकों की अपेक्षाकृत कम ब्याज दरों पर औपचारिक क्रेडिट तक पहुँच है, जिससे ग्रामीण इलाकों में असमानता कायम रखती है।
  • साथ ही बड़े भूमि मालिक उत्पादक संपत्तियों जैसे - कृषि उपकरण या पशुधन में अधिक निवेश करने में सक्षम हैं और अपनी आय में आगे बढ़ रहे हैं।

स्रोत : लाइव मिंट


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